बलूचिस्तान के अशांत क्षेत्र से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बलूच स्वतंत्रता सेनानियों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े और सबसे सुनियोजित हमलों में से एक को अंजाम देने का दावा किया है। बलूचिस्तान में सक्रिय बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने वाशुक जिले के सीमावर्ती शहर माशकेल में एक अत्यंत व्यापक और भीषण सैन्य अभियान चलाया है। इस बड़े हमले में पाकिस्तान के कम से कम 25 से अधिक सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बलूच संगठन ने न केवल सैन्य ठिकानों को तबाह किया, बल्कि सुरक्षा बलों की हवाई निगरानी प्रणाली को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
माशकेल में सुनियोजित तरीके से की गई घेराबंदी
बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पूरा अभियान 29 अगस्त 2026 को दोपहर लगभग 3:30 बजे शुरू किया गया था। संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच के नाम से जारी इस विस्तृत बयान में कहा गया है कि संगठन के प्रशिक्षित लड़ाकों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत माशकेल शहर को चारों तरफ से घेर लिया। घेराबंदी इतनी सख्त थी कि शहर के भीतर और बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर लड़ाकों ने पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित कर लिया। बयान में दावा किया गया है कि लड़ाकों ने न केवल सुरक्षा चौकियों पर हमला किया, बल्कि कुछ समय के लिए पूरे शहर के महत्वपूर्ण और रणनीतिक रूप से संवेदनशील हिस्सों पर अपना पूरा नियंत्रण भी बना लिया था। पाकिस्तानी सेना की ओर से इस भीषण संघर्ष और इतने बड़े नुकसान पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिसे उनकी चुप्पी या रणनीतिक असमर्थता के रूप में देखा जा रहा है।
छह अलग-अलग दस्तों का खतरनाक प्लान
बलूच लड़ाकों ने इस पूरे ऑपरेशन को बहुत ही अनुशासित और रणनीतिक योजना के साथ अंजाम दिया। BLF के अनुसार, माशकेल शहर पर इस बड़े हमले को अंजाम देने के लिए लड़ाकों को कुल छह अलग-अलग विशेष दस्तों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक दस्ते को एक विशिष्ट लक्ष्य और जिम्मेदारी सौंपी गई थी ताकि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को संभलने का कोई मौका न मिल सके।
- सबसे पहले, एक दस्ते ने शहर की ओर आने-जाने वाले सभी मुख्य और लिंक मार्गों को सील कर दिया। वहां पर लड़ाकों ने अपने कड़े नाके स्थापित किए और हर आने-जाने वाले वाहन की गहन जांच शुरू कर दी।
- इसके बाद, दूसरे दस्ते ने शहर के कस्टम पुलिस स्टेशन की ओर रुख किया और उस पर धावा बोल दिया। लड़ाकों ने इस स्टेशन को बहुत ही कम समय में पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया।
- कस्टम स्टेशन में मौजूद सभी कर्मचारियों को बलूच लड़ाकों ने अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन बाद में बलूच लड़ाकों ने उदारता दिखाते हुए उन सभी को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित छोड़ दिया।
- इस कार्रवाई के दौरान, बलूच लड़ाकों ने कस्टम पुलिस स्टेशन में रखे सभी सरकारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को पूरी तरह से जलाकर राख कर दिया, और वहां खड़े एक महत्वपूर्ण कस्टम वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया।
सेना की कुमुक पर हमला और फ्रंटियर कॉर्प्स कैंप पर धावा
जब पाकिस्तानी सेना को कस्टम पुलिस स्टेशन पर हुए हमले की जानकारी मिली, तो स्थिति को संभालने के लिए सेना की एक विशेष टुकड़ी उस तरफ रवाना हुई। लेकिन BLF के लड़ाके पहले से ही घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही पाकिस्तानी सेना की यह टुकड़ी घटनास्थल के पास पहुंची, लड़ाकों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए हमले में पाकिस्तानी सेना के चार सुरक्षाकर्मी मौके पर ही मारे गए और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके बाद ऑपरेशन के दूसरे चरण में, बलूच लड़ाकों के एक और दस्ते ने माशकेल पुलिस स्टेशन पर जोरदार हमला किया। लड़ाकों ने पूरे पुलिस स्टेशन को घेरकर अपने कब्जे में ले लिया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को हिरासत में ले लिया गया और पुलिस स्टेशन में रखे सभी आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण बलूच लड़ाकों ने अपने कब्जे में ले लिए। पुलिस स्टेशन के भीतर मौजूद सभी महत्वपूर्ण और खुफिया सरकारी फाइलों को आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि, पूर्व की तरह ही, हिरासत में लिए गए पुलिसकर्मियों को बाद में मानवीय आधार पर सुरक्षित रास्ता देकर छोड़ दिया गया।
फ्रंटियर कॉर्प्स के मुख्य कैंप पर चौतरफा हमला
माशकेल पुलिस स्टेशन पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद, बलूच लड़ाकों ने वहां से फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के मुख्य सैन्य कैंप को अपना अगला निशाना बनाया। बलूच लड़ाकों ने FC कैंप पर कई दिशाओं से एक साथ भारी हमला बोल दिया। इस हमले में मुख्य रूप से LMG, रॉकेट लॉन्चर और ग्रेनेड लॉन्चर जैसे भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
कैंप के मुख्य प्रवेश द्वार के पास बनी दो महत्वपूर्ण सुरक्षा चौकियों को बलूच लड़ाकों ने सीधे निशाने पर लिया और उन्हें पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। इस भीषण गोलाबारी में FC के कम से कम पांच जवान मारे गए और कई अन्य सैनिक बुरी तरह से घायल हो गए। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भी कैंप के भीतर से जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की और बलूच लड़ाकों को पीछे धकेलने के लिए कई मोर्टार के गोले दागे। हालांकि, बलूच संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना द्वारा दागे गए ये मोर्टार के गोले अपने निशाने से चूक गए और आसपास के नागरिक इलाकों में जा गिरे, जिससे स्थानीय बलूच नागरिकों के घरों को भारी नुकसान पहुंचा।
हवाई निगरानी को किया नाकाम: ड्रोन और क्वाडकॉप्टर मार गिराए
पाकिस्तानी सेना अक्सर बलूचिस्तान के दुर्गम पहाड़ी और शहरी इलाकों में अपनी निगरानी और हमलों के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करती है। लेकिन इस बार माशकेल के इस ऑपरेशन के दौरान, BLF के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस हवाई तकनीक को भी नाकाम करने का दावा किया है। संगठन के बयान के अनुसार, युद्ध के दौरान लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के हवाई नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए निम्नलिखित कार्रवाई की:
- कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सेना के एक आधुनिक क्वाडकॉप्टर को हवा में ही निशाना बनाकर मार गिराया गया।
- इसके तुरंत बाद, सुरक्षा बलों के हवाई टोही नेटवर्क को बाधित करने के लिए एक और क्वाडकॉप्टर और एक मुख्य निगरानी ड्रोन को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।
- ऑपरेशन के अंतिम चरण में, बलूच लड़ाकों ने अपनी सटीक गोलाबारी से एक और क्वाडकॉप्टर को सफलतापूर्वक मार गिराया।
इस प्रकार, बलूच लिबरेशन फ्रंट ने इस पूरे सैन्य अभियान के दौरान पाकिस्तानी सेना के कुल तीन क्वाडकॉप्टर और एक निगरानी ड्रोन को नष्ट करने का बड़ा दावा किया है, जो पाकिस्तानी सेना के हवाई निगरानी तंत्र के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।
सैन्य वाहनों और दूसरे कैंप पर भी बरपाया कहर
अपनी आक्रामक रणनीति को जारी रखते हुए, बलूच लड़ाकों ने कमिश्नर हाउस के पास मोर्चा संभाला हुआ था। इसी दौरान, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के तीन FC वाहन, जिनमें एक अत्याधुनिक बख्तरबंद गाड़ी भी शामिल थी, बलूच लड़ाकों को चारों तरफ से घेरने और उन पर हमला करने के इरादे से आगे बढ़े। लेकिन मुस्तैद लड़ाकों ने इन वाहनों पर पहले ही हमला बोल दिया। इस जबरदस्त जवाबी हमले में सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और वे आगे बढ़ने के बजाय पीछे हटने पर मजबूर हो गए। इस विशिष्ट मुठभेड़ में कम से कम तीन और FC जवान मारे गए, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी समय, BLF के एक अन्य विशेष दस्ते ने माशकेल में स्थित पाकिस्तानी सेना के एक दूसरे सैन्य कैंप की घेराबंदी कर ली थी। लड़ाकों ने भारी रॉकेटों और आधुनिक हथियारों का उपयोग करके इस सैन्य कैंप के दो प्रमुख बंकरों को सीधे निशाना बनाया और उन्हें मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। इस कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के चार और सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। बलूच लड़ाकों के लगातार और अत्यंत आक्रामक हमलों के कारण पाकिस्तानी सुरक्षा बल इतने भयभीत हो गए कि वे अपने बैरकों के भीतर ही सिमटकर रह गए और बाहर आकर मुकाबला करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
माशकेल की रणनीतिक स्थिति और बलूचिस्तान का गहराता संकट
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो माशकेल बलूचिस्तान के वाशुक जिले में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है। इसकी सीमाएं बेहद दुर्गम हैं, जो इसे गुरिल्ला युद्ध के लिए एक आदर्श स्थान बनाती हैं। बलूचिस्तान का यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से पाकिस्तानी हुकूमत और विभिन्न बलूच राष्ट्रवादी संगठनों के बीच एक तीव्र और खूनी संघर्ष का मुख्य केंद्र रहा है।
बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) उन प्रमुख सशस्त्र संगठनों में से एक है जो पाकिस्तान से बलूचिस्तान की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। इस संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार बलूचिस्तान के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का बेरहमी से दोहन कर रही है, जबकि वहां के स्थानीय लोगों को बुनियादी अधिकारों और सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। यही कारण है कि यह संगठन पाकिस्तानी सेना, अर्धसैनिक बलों और उनके आर्थिक हितों को निशाना बनाकर लंबे समय से एक व्यापक सशस्त्र अभियान चला रहा है। माशकेल में किया गया यह भीषण हमला भी इसी निरंतर चल रहे बड़े संघर्ष का एक हिस्सा माना जा रहा है। यदि स्वतंत्र सूत्रों से BLF के इन दावों की पूरी पुष्टि होती है, तो यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति अब पाकिस्तानी नियंत्रण से बाहर होती जा रही है, और बलूच लड़ाके अब पाकिस्तानी सेना को उनके अपने ही मजबूत गढ़ों में चुनौती देने में सक्षम हो चुके हैं।
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