भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के बीच नई दिल्ली में एक अहम मुलाकात हुई। माना जा रहा है कि इस बातचीत ने उस रणनीतिक तानेबाने को कमजोर कर दिया है, जिसके सहारे चीन भारत की सबसे संवेदनशील भौगोलिक कड़ी 'चिकन नेक' यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इर्द-गिर्द अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता था।
क्यों अहम है यह मुलाकात
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाली पतली पट्टी है, इसी कारण इसे रणनीतिक रूप से बेहद नाजुक माना जाता है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के दूत के साथ बंद कमरे में हुई इस बातचीत को इसी संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा और भारत-नेपाल संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
तीन कदमों की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर सहमति बनी, जिनके जरिए दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने का खाका तैयार किया गया।
- कनेक्टिविटी: दोनों देशों के बीच आवाजाही और बुनियादी ढांचे की कड़ियों को मजबूत करने पर जोर।
- ऊर्जा साझेदारी: एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ाकर आपसी निर्भरता और भरोसे को और पुख्ता करना।
- पर्यटन: टूरिज्म को बढ़ावा देकर लोगों के बीच संपर्क और आर्थिक संबंधों को विस्तार देना।
चीन की कोशिशों को झटका
विश्लेषकों का मानना है कि कनेक्टिविटी, ऊर्जा और पर्यटन के इन तीन कदमों के सहारे नेपाल को भारत के साथ करीब लाने की कोशिश की गई है। इससे उस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और रणनीतिक दबाव की योजनाओं को सीधी चुनौती मिली है, जहां वह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता था।
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