मानसून का सुहावना मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छाने लगती है। पेड़-पौधे खिल उठते हैं और लोग अपने घरों में सुंदर गार्डन तैयार करने की योजना बनाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही सुहावना मौसम आपके पौधों के लिए बड़ी मुसीबत भी ला सकता है? बरसात के दिनों में लगातार नमी और गमलों में पानी जमा होने की वजह से पौधों में कीट और दीमक (जिसे उधाई भी कहा जाता है) लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। कई बार हम देखते हैं कि अच्छा-भला हरा-भरा पौधा अचानक सूखने लगता है, जिसके पीछे का मुख्य कारण जड़ों में लगने वाले कीड़े होते हैं।
बरसात में पौधों के दुश्मन बनते हैं कीट और दीमक
बरसात का मौसम जहां वनस्पतियों के विकास के लिए अनुकूल माना जाता है, वहीं इस दौरान पौधों की विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। लगातार होने वाली बारिश के कारण गमलों की मिट्टी में नमी बनी रहती है। यदि इस पानी की निकासी सही तरीके से न हो, तो जड़ों के सड़ने और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस अतिरिक्त नमी के कारण मिट्टी में छोटे-छोटे कीट पनपने लगते हैं जो चुपके से पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। जड़ों के कमजोर होते ही पौधा धीरे-धीरे सूखकर पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। इसलिए इस मौसम में अपने बगीचे की नियमित निगरानी करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
नर्सरी एक्सपर्ट विपिन पाल के अनोखे घरेलू नुस्खे
अगर आपके बगीचे में भी पौधों को कीटों ने अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है, तो आपको महंगे रासायनिक कीटनाशकों के पीछे भागने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आपके घर की रसोई में मौजूद दो मामूली चीजें आपके पौधों के लिए रक्षक साबित हो सकती हैं। नर्सरी विशेषज्ञ विपिन पाल के अनुसार, घर में इस्तेमाल होने वाली हींग और नमक का सही तरीके से उपयोग करके पौधों को इन जिद्दी कीटों और दीमक से बचाया जा सकता है।
विपिन पाल बताते हैं कि यदि आपको अपने गमलों की मिट्टी के आसपास कीड़ों या दीमक की समस्या नजर आ रही है, तो आप हींग के पानी का एक हल्का घोल तैयार कर सकते हैं। इस घोल का मिट्टी के आसपास छिड़काव करने से कीट दूर भाग जाते हैं। इसके साथ ही, कई लोग घरेलू उपाय के तौर पर नमक के पानी का भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, नमक के इस्तेमाल को लेकर एक्सपर्ट ने एक जरूरी चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि नमक का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और पौधों की सेहत को बिगाड़ सकता है। इसलिए नमक के घोल को कभी भी सीधे पौधे की जड़ों या पत्तों पर नहीं डालना चाहिए। इसका इस्तेमाल बहुत ही सीमित मात्रा में और बेहद सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।
गमलों की सही देखभाल के लिए जरूरी सुझाव
बरसात के इस मौसम में घरेलू उपचारों के साथ-साथ पौधों की नियमित और बुनियादी देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। नर्सरी विशेषज्ञ ने पौधों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने गार्डन को सुंदर बनाए रख सकते हैं:
- मिट्टी की नियमित गुड़ाई: गमलों में जमा होने वाली मिट्टी को समय-समय पर हल्का ढीला यानी गुड़ाई करते रहें। इससे मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह सही बना रहता है और जड़ें सांस ले पाती हैं।
- पानी का ठहराव रोकें: इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गमलों में पानी बिल्कुल भी रुकने न पाए। यदि गमले के नीचे पानी जमा हो रहा है, तो जल निकासी के छिद्र को तुरंत साफ करें ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।
- सूखे और सड़े हुए हिस्से हटाएं: पौधों में दिखाई देने वाले सूखे, पीले या सड़े हुए पत्तों और टहनियों को तुरंत काटकर अलग कर दें। यह अन्य स्वस्थ हिस्सों में संक्रमण फैलने से रोकता है।
- हवा और धूप का प्रबंधन: अपने पौधों को ऐसे स्थान पर व्यवस्थित करें जहां उन्हें उचित मात्रा में ताजी हवा और पर्याप्त रोशनी मिल सके। बंद या अत्यधिक छायादार जगहों पर फंगस लगने की संभावना बढ़ जाती है।
सावधानी ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञ का मानना है कि किसी भी घरेलू नुस्खे को बड़े पैमाने पर आजमाने से पहले हमेशा उसका एक छोटा सा परीक्षण कर लेना चाहिए। आप जो भी घोल तैयार कर रहे हैं, उसे पहले पौधे के एक छोटे हिस्से या बहुत कम मात्रा में मिट्टी पर डालकर देखें। यदि आपको पौधे पर इसका कोई विपरीत प्रभाव या नुकसान दिखाई देता है, तो तुरंत इसका प्रयोग बंद कर दें। थोड़ी सी सजगता, सावधानी और नियमित रूप से की जाने वाली देखभाल से आप बरसात के इस चुनौतीपूर्ण मौसम में भी अपने घर के बगीचे को पूरी तरह से हरा-भरा और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।
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