गुरुग्राम में IAS अधिकारी डी. सुरेश पर भ्रष्टाचार के दो मामले दर्ज, सेवानिवृत्ति के दिन हाईकोर्ट से मिली आंशिक राहत

हरियाणा के गुरुग्राम में प्लॉटों के गलत आवंटन के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वरिष्ठ IAS अधिकारी डी. सुरेश और अन्य के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने उन्हें आंशिक राहत प्रदान की है।

हरियाणा के गुरुग्राम में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी डी. सुरेश और कई अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज किए हैं। यह पूरा मामला गुरुग्राम के सेक्टर-23 में आवासीय प्लॉटों के आवंटन में कथित तौर पर की गई भारी अनियमितताओं और धांधली से जुड़ा हुआ है। इस संवेदनशील मामले में ACB ने दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं और मामले की जांच को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह कानूनी कार्रवाई अधिकारी की सेवानिवृत्ति के ठीक पहले और उसी दौरान की गई है, जिससे राज्य के प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मच गई है।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से सेवानिवृत्ति के दिन मिली राहत

वरिष्ठ IAS अधिकारी डी. सुरेश को अपनी सेवानिवृत्ति के ही दिन इस बड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, सोमवार को उनके सेवानिवृत्त होने के अवसर पर उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से एक बड़ी आंशिक राहत मिल गई। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि यदि जांच प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ता अधिकारी डी. सुरेश को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता महसूस होती है, तो उन्हें इसके लिए कम से कम 7 दिन पहले एक औपचारिक नोटिस दिया जाएगा। इस कानूनी आश्वासन के बाद पूर्व मुख्य प्रशासक को फिलहाल तुरंत गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिल गई है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दर्ज की दो अलग-अलग एफआईआर (FIR)

गुरुग्राम में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरे मामले की कानूनी प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज की हैं:

  • पहली एफआईआर (FIR): पहली प्राथमिकी 26 अगस्त को दर्ज की गई थी। इस मामले में कुल चार लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी डी. सुरेश भी शामिल हैं।
  • दूसरी एफआईआर (FIR): इसके ठीक अगले दिन यानी 27 अगस्त को एक स्थानीय नागरिक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मुकदमे में IAS अधिकारी डी. सुरेश के अतिरिक्त हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के चार अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा तीन अन्य बाहरी लोगों को भी इसमें नामजद किया गया है, जिनमें एक स्थानीय संपत्ति कारोबारी (प्रॉपर्टी डीलर) और एक राजनेता शामिल हैं।

क्या है सेक्टर-23 के प्लॉटों के दोबारा आवंटन का विवाद?

यह पूरा विवाद गुरुग्राम के सेक्टर-23 में स्थित दो महत्वपूर्ण प्लॉटों के पुनः आवंटन में हुई गड़बड़ियों से संबंधित है। नियमों के अनुसार, ये प्लॉट पहले ही कुछ लोगों को आवंटित किए जा चुके थे। बाद में इन पहले से आवंटित किए गए प्लॉटों को किसी वजह से वापस ले लिया गया और नियमों को ताक पर रखकर इन्हें दूसरे लोगों को दोबारा आवंटित कर दिया गया। यह विवादास्पद आवंटन उस समय का है जब डी. सुरेश हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के मुख्य प्रशासक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

ACB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है और इस बात की पड़ताल की जा रही है कि इस अनुचित आवंटन के पीछे किस स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत हुई थी। विभाग इस मामले में शामिल अन्य सभी आरोपियों से भी जल्द पूछताछ करने की तैयारी कर रहा है।

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