मानसून का बदला मिजाज
मौसम के बदलते मिजाज को लेकर एक पुरानी कहावत अक्सर चर्चा में रहती है और मौजूदा हालात इसे पूरी तरह सच साबित कर रहे हैं। फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के चलते ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में झमाझम बारिश हो रही है। लेकिन भारतीय मौसम विभाग (IMD) का ताजा पूर्वानुमान एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहा है। विभाग के मुताबिक, सितंबर के महीने में मानसून अपनी गति खो देगा और कुल वर्षा औसत से कम रहने की आशंका है। इसके अलावा तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है, जिसके पीछे अल नीनो के प्रभाव को मुख्य कारण माना जा रहा है।
अगस्त के अंत में सक्रिय हुआ सिस्टम
अगस्त के आखिरी दिनों में देश के कई हिस्सों में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ निम्न दबाव का क्षेत्र अब धीरे-धीरे जमीन के अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव के कारण पूर्वी भारत में सोमवार दोपहर से ही गरज और चमक के साथ तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। मानसूनी रेखा अभी पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश तक फैली हुई है, जिसकी वजह से कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटों में यह सिस्टम पश्चिम की ओर खिसकेगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और मध्य प्रदेश में बुधवार से वर्षा का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
सितंबर का पहला पखवाड़ा और उत्तर भारत
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि सितंबर के पहले सप्ताह में मानसून का पुनरुद्धार (रिवाइवल) देखने को मिल सकता है। अगले 48 घंटों में निम्न दबाव का क्षेत्र और अधिक अंदर की ओर बढ़ेगा, जिससे पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में 3 सितंबर तक भारी से अत्यंत भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही 2 या 3 सितंबर से मानसूनी रेखा के उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ने के आसार हैं। इससे दिल्ली, पूर्वी हरियाणा, पूर्वी पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, यह राहत हर जगह समान नहीं होगी। पश्चिमी पंजाब, पश्चिमी हरियाणा, पश्चिमी और मध्य राजस्थान तथा गुजरात के इलाकों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है, क्योंकि मानसूनी ट्रफ वहां तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है, जिससे वहां सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
सितंबर में सामान्य से कम बारिश
IMD के मासिक पूर्वानुमान के अनुसार, सितंबर 2026 में देशभर में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 91 प्रतिशत से भी कम रहने की संभावना है। देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है, हालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी भारत के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश के आसार हैं। इस मानसून सीजन में भारत के विभिन्न हिस्सों में बारिश का वितरण काफी अलग रहा है। पूर्वोत्तर, पूर्वी, उत्तरी और मध्य भारत के कई हिस्सों में अच्छी वर्षा हुई है, लेकिन दक्षिण और पश्चिम भारत में कमी के कारण राष्ट्रीय औसत अभी भी प्रभावित है।
अल नीनो और IOD का प्रभाव
इस महीने बारिश में कमी के पीछे प्रशांत महासागर में अल नीनो के मजबूत होने को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, हिंद महासागर में अभी तटस्थ इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) परिस्थितियां बनी हुई हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों के मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि सितंबर से यह सकारात्मक आईओडी में बदल सकता है, लेकिन फिलहाल इसका असर सीमित रहेगा।
बढ़ेगा तापमान
सितंबर में न केवल बारिश की कमी खल सकती है, बल्कि गर्मी भी लोगों को परेशान कर सकती है। IMD के अनुसार, सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। संक्षेप में कहें तो, सितंबर की शुरुआत में कुछ राज्यों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, लेकिन पूरे महीने के स्तर पर मानसून का प्रदर्शन कमजोर ही रहेगा, जो कृषि और जल संसाधनों के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है।
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