गर्मी की छुट्टियों में अक्सर बच्चे मोबाइल और गेमिंग में उलझे नजर आते हैं, जिससे माता-पिता परेशान रहते हैं और चाहते हैं कि जल्दी स्कूल खुलें ताकि बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर लगे। लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में इन दिनों एक अलग ही दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां शिप्रा शर्मा छुट्टियों के इस समय का सदुपयोग करते हुए बेटे-बेटियों को विभिन्न प्रकार की कला का प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क दे रही हैं।
उनका मानना है कि अगर बेटियां शिक्षित होने के साथ-साथ हुनर के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनें, तो वे एक बेहतर भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सकती हैं। इसी सोच के साथ वे बच्चों को लगातार अलग-अलग तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही हैं।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
शिप्रा शर्मा का कहना है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और व्यक्ति जब चाहे तब कुछ नया सीख सकता है, लेकिन बचपन वह समय है जब किसी चीज का अभ्यास करने पर हम कहीं बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकते हैं। यही वजह है कि वे बच्चों को मधुबनी आर्ट, मंडाला आर्ट और लिप्पन आर्ट सहित कई तरह की कलाओं से जुड़ी पेंटिंग बनाना सिखा रही हैं, ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ कला के क्षेत्र में भी हुनरमंद बन सकें।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जो युवा अच्छी पेंटिंग तैयार करते हैं, उनकी कीमत 5000 रुपए से शुरू होती है। उनके पास कई बेटियां सीख रही हैं, जो हाईस्कूल, इंटर और स्नातक से जुड़े पाठ्यक्रमों में भी पढ़ाई कर रही हैं।
सीखकर मिला बेहतर अवसर
पिछले 2 साल से लगातार पेंटिंग बना रहीं तुलसी ने बताया कि उन्हें जिस तरह निःशुल्क प्रशिक्षण मिला है, वह उनके अभ्यास में काफी काम आ रहा है। वे इंटर में पढ़ाई कर रही हैं और उनकी बनाई पेंटिंग लोगों को खूब पसंद आती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई का खर्च भी खुद निकाल लेती हैं।
इसी तरह आकांक्षा ने भी बताया कि उन्होंने 2 साल पहले सीखना शुरू किया था और तब से वे लगातार इस तरह की पेंटिंग बना रही हैं। खास बात यह है कि यहां सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि उनकी माताएं भी अलग-अलग तरह का प्रशिक्षण निःशुल्क रूप से प्राप्त कर रही हैं।
स्किल डेवलपमेंट जरूरी
कार्यशाला में युवाओं का मार्गदर्शन करने पहुंचीं जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने कहा कि शिप्रा शर्मा जिस तरह बेटे-बेटियों को यह प्रशिक्षण दे रही हैं, वह बेहद सराहनीय प्रयास है। उनका मानना है कि शिक्षा के साथ-साथ युवाओं में हुनर भी होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान उन्होंने खुद देखा कि बच्चे बहुत अच्छी पेंटिंग बना लेते हैं। साथ ही, बेस्ट मैटेरियल का उपयोग कर घर को सजाने का भी उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो उनके बेहतर भविष्य के लिए काफी उपयोगी है।
हर साल लगता है कला का कैंप
शिप्रा शर्मा इसी तरह हर साल गर्मी की छुट्टियों में कार्यशाला का आयोजन करती हैं। उनकी पेंटिंग की प्रशंसा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं।
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