हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने पंचायती राज से जुड़ा एक अहम प्रशासनिक और राजनीतिक कदम उठाया है। सरकार ने नवनिर्वाचित ग्राम पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह को केंद्रीकृत रखने के बजाय इसका विकेंद्रीकरण करते हुए जिला स्तर पर ही आयोजित करने का ऐतिहासिक फैसला किया है।
अब अपने ही जिले में होगी शपथ
इस निर्णय के बाद पंचायत प्रतिनिधियों को शपथ के लिए राजधानी शिमला तक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके उलट, 15 जून को उन्हीं के जिले में भव्य आयोजन के बीच सरकार स्वयं उनके पास पहुंचकर उन्हें शपथ दिलाएगी। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
मंत्रियों को मिली जिलों की जिम्मेदारी
इस फैसले के तहत अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी मंत्रियों को सौंपी गई है। हालांकि, सूची में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह का नाम शामिल न होने से कई तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं।
सियासी हलकों में बढ़ी सुगबुगाहट
विक्रमादित्य सिंह का नाम गायब रहने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
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