चीन से ‘हांगोर क्लास’ पनडुब्बियों के सहारे हिंद महासागर में अपना दबदबा कायम करने का सपना देख रहे पाकिस्तान के लिए अब बड़ा झटका तैयार है। इस्लामाबाद जिन सबमरीन को अपनी छिपी हुई ताकत मान रहा है, भारतीय नौसेना के नए और स्वदेशी ‘एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) ने पानी के नीचे ही उनके लिए चुनौती खड़ी कर दी है। उथले पानी में अदृश्य होकर वार करने का दावा करने वाली ये पनडुब्बियां जैसे ही भारतीय सीमा के पास आएंगी, यह ‘सबमरीन हंटर’ अपने एडवांस्ड सोनार से उनकी सटीक स्थिति भांप लेगा।
इस युद्धपोत में लगे ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर्स पानी की गहराई में ही दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए तैयार रहते हैं। भारतीय नौसेना में अब तक ऐसे 6 स्वदेशी ASW-SWC युद्धपोत शामिल हो चुके हैं, जिनमें INS अरनाला और INS अंजादीप प्रमुख हैं। सरकार ने कुल 16 ऐसे ‘सबमरीन हंटर्स’ बनाने की मंजूरी दी है।
स्वदेशी डिजाइन और बढ़ती समुद्री ताकत
समुद्र में भारत की बढ़ती क्षमता और हिंद महासागर में दुश्मनों की हरकतों पर लगाम कसने के लिए ASW-SWC को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा रहा है। कोचीन शिपयार्ड (CSL) और जीआरएसई (GRSE) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित यह युद्धपोत तटीय इलाकों में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढकर नष्ट करने में दक्ष है। ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान की पनडुब्बियों का खतरा तटीय क्षेत्रों में बढ़ रहा है, यह घातक हथियार नौसेना के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
करीब 900 से 1100 टन क्षमता वाले इस आधुनिक पोत को अत्याधुनिक रडार, एडवांस सोनार और खतरनाक हथियारों के पेलोड से लैस किया गया है, जो समुद्र की गहराई में साइलेंट किलर की तरह काम करने वाली पनडुब्बियों को आसानी से अपना शिकार बना सकता है।
ASW-SWC वॉरशिप की 5 मुख्य बातें
- उथले पानी का बेताज बादशाह: इसे मुख्य रूप से भारत के तटीय इलाकों (बेस पोर्ट से 200 नॉटिकल मील के भीतर) और कम गहरे पानी में एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए विशेष रूप से बनाया गया है।
- स्वदेशी मारक क्षमता: इस युद्धपोत में 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण लगे हैं, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की ताकत को दर्शाते हैं।
- वाटर-जेट प्रोपल्शन तकनीक: यह जहाज पारंपरिक प्रोपेलर के बजाय तीन शक्तिशाली डीजल इंजन और वाटर-जेट प्रोपल्शन से चलता है, जिससे यह कम गहरे पानी में भी 25 नॉट्स की तेज स्पीड से दौड़ सकता है।
- अंडर-वॉटर ‘आंखें’: दुश्मन की पनडुब्बी को पकड़ने के लिए इसमें डीआरडीओ का ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार और एडवांस लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (LFVDS) फिट किया गया है।
- मल्टी-रोल ऑपरेशंस: पनडुब्बी को नष्ट करने के अलावा यह जहाज लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO), सर्च एंड रेस्क्यू और समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mine-Laying) बिछाने में सक्षम है।
पेलोड, रेंज और क्षमता: कितना है दमदार?
इस उथले पानी के शिकारी को बेहद आक्रामक हथियारों से लैस किया गया है। दुश्मन की पनडुब्बी पर हमला करने के लिए इसमें एलएंडटी (L&T) द्वारा निर्मित दो ट्रिपल-ट्यूब लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर्स दिए गए हैं, जो पानी के अंदर टॉरपीडो दागकर पनडुब्बियों को तबाह कर देते हैं। इसके अलावा इसमें पनडुब्बी रोधी मल्टीफंक्शनल रॉकेट लॉन्चर्स भी शामिल हैं।
जहाज की अपनी सुरक्षा और सतह पर हमलों के लिए इस पर एक 30mm क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) नेवल सरफेस गन और दो 12.7mm की स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन्स (SRCG) लगाई गई हैं। हवा से आने वाले खतरों से निपटने के लिए इसमें शार्ट रेंज एयर डिफेंस मिसाइल (VSHORAD) लॉन्चर भी फिट है। इसकी क्षमता 1,800 नॉटिकल मील (लगभग 3,300 किलोमीटर) है, यानी यह एक बार में बिना रुके लंबी दूरी तक गश्त लगा सकता है।
अंडर-वॉटर पनडुब्बी के खिलाफ क्या है इसकी खासियत?
समुद्र के तटीय और कम गहरे इलाकों में बड़ी पनडुब्बियों या बड़े डेस्ट्रॉयर्स को संचालित करने में काफी दिक्कतें आती हैं। दुश्मन देश इसी का फायदा उठाकर उथले पानी में अपनी छोटी या डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां छिपा देते हैं। ASW-SWC की सबसे बड़ी खासियत इसका कम ड्राफ्ट (Draught – 2.7 मीटर) होना है, जिसकी वजह से यह बहुत कम गहरे पानी में भी आसानी से नेविगेट कर लेता है।
इसके वेरिएबल डेप्थ सोनार पानी की अलग-अलग परतों (Thermal Layers) को चीरकर छिपी हुई पनडुब्बी की सटीक लोकेशन का पता लगा लेते हैं। जैसे ही दुश्मन की पनडुब्बी ट्रैक होती है, यह एंटी-सबमरीन रॉकेट्स और एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो की झड़ी लगा देता है। इसके अलावा, इसमें लगा एंटी-टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम दुश्मन द्वारा दागे गए टॉरपीडो को पानी में ही चकमा देकर डिफ्यूज (Decoy) करने की क्षमता रखता है।
सवाल-जवाब
ASW-SWC का मुख्य काम क्या है और इसे किसने बनाया है?
इसका मुख्य काम तटीय और उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजना और नष्ट करना है। इसे भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) ने बनाया है।
इस युद्धपोत की रेंज और अधिकतम गति कितनी है?
इसकी अधिकतम गति 25 नॉट्स (लगभग 46 किमी/घंटा) है और 14 नॉट्स की रफ्तार पर इसकी कुल रेंज 1,800 नॉटिकल मील (3,300 किलोमीटर) से अधिक है।
पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए इसमें कौन से मुख्य हथियार लगे हैं?
पनडुब्बियों के खिलाफ इसमें दो ट्रिपल-ट्यूब लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर्स, मल्टीफंक्शनल एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स और समुद्र के तल पर बिछाने के लिए एंटी-सबमरीन माइंस (Mine-laying rails) दी गई हैं।
अंडर-वॉटर सर्विलांस के लिए इसमें कौन सी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है?
इसमें पानी के नीचे देखने और सुनने के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (LFVDS) तकनीक का उपयोग किया गया है।
https://hindi.news18.com/news/nation/asw-swc-warships-range-payload-cost-strength-who-it-is-game-changer-for-indian-navy-against-hangor-class-submarine-10543711.html