बिहार MLC चुनाव: क्या मुश्किल में फंसेंगे उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश? अब तक उम्मीदवारी का ऐलान नहीं

एमएलसी चुनाव में नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक है, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के नाम पर NDA ने अब तक कोई फैसला नहीं सुनाया। आंकड़ों के लिहाज से नौवें उम्मीदवार की जीत के लिए महागठबंधन में सेंधमारी जरूरी होगी।

पटना: एमएलसी चुनाव को लेकर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के नाम का अब तक ऐलान न होना फिलहाल उनके लिए किसी संकट की निशानी नहीं माना जा सकता। दरअसल नामांकन की आखिरी तारीख परसों है। अगर NDA परसों दोपहर 3 बजे तक अपने नौवें उम्मीदवार का नाम सामने नहीं लाती, तभी दीपक प्रकाश के सामने कोई जोखिम खड़ा होगा। इसके उलट यदि गठबंधन नौवें प्रत्याशी के रूप में दीपक प्रकाश का नाम घोषित कर देता है, तो इसका साफ संकेत होगा कि NDA मतदान की नौबत तक जाने को तैयार है।

ऐसी सूरत में यह भी जाहिर हो जाएगा कि अपने नौवें उम्मीदवार को जिताने के लिए NDA को एक बार फिर राज्यसभा चुनाव की तर्ज पर महागठबंधन में सेंध लगानी पड़ेगी और इस चुनाव में महागठबंधन के करीब 12 अन्य विधायकों को अपनी ओर खींचना होगा।

अगर आपको लगता है कि NDA के लिए 12 विधायकों को तोड़ना आसान नहीं होगा और इसी वजह से दीपक प्रकाश पर खतरा बना रहेगा, तो भी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऐसी कोई स्थिति दीपक के लिए ही बनेगी। वजह यह है कि नौवें उम्मीदवार के तौर पर NDA दीपक को ही उतारेगी, यह अभी तय नहीं है। घोषित प्रत्याशियों में से कोई और भी नौवां उम्मीदवार बन सकता है और दीपक को सुरक्षित जगह पर रखा जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने उम्मीदवार शिवेश राम को 5वां प्रत्याशी बनाकर उपेंद्र कुशवाहा को सुरक्षित स्थिति में रख लिया था।

आंकड़ों की जुबानी पूरी तस्वीर

इस पूरे समीकरण को आंकड़ों के नजरिये से भी समझा जा सकता है। एक सीट जीतने के लिए 24.2 वोट की जरूरत है। नीतीश कुमार की छोड़ी एक सीट पर उपचुनाव हो रहा है, इसलिए उस सीट के लिए 24 वोट की दरकार नहीं होगी क्योंकि वह अलग चुनाव होगा। बीजेपी के 4 उम्मीदवारों के अलावा जेडीयू ने जिन 4 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, उनमें एक नाम उपचुनाव वाला भी शामिल है। ऐसे में मतदान की स्थिति में जदयू के तीन, बीजेपी के चार और लोजपा (आर) के एक यानी कुल 8 उम्मीदवारों की जीत के लिए विधायकों की संख्या अहम हो जाती है। NDA के पास कुल 202 विधायक हैं। इन 8 उम्मीदवारों की जीत के लिए 24.2 x 2 = 193.6 वोट चाहिए होंगे। ऐसे में नौवें उम्मीदवार के लिए NDA के पास 202-193=9 वोट ही सरप्लस के रूप में बचेंगे। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायक गैर हाजिर रहकर NDA के साथ आ गए थे। इस हिसाब से 13 विधायक NDA के पास होंगे, यानी जीत सुनिश्चित करने के लिए महागठबंधन के करीब 11 और विधायकों को तोड़ने की जरूरत पड़ेगी।

सूत्रों की मानें तो NDA इन 11 विधायकों को अपने पाले में लाने के अभियान में जुटी हुई है। अगर यह कोशिश कामयाब रहती है, तभी NDA की ओर से तय किया जाएगा कि उसका नौवां उम्मीदवार कौन होगा। यह नौवां चेहरा दीपक प्रकाश होंगे या कोई और, इसका ऐलान अब तक नहीं हुआ है। यही वजह है कि अगर NDA परसों तक अपना नौवां उम्मीदवार घोषित नहीं करती, तभी दीपक प्रकाश की कुर्सी पर असली खतरा मंडराएगा।

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