चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य भर में 10 लाख निर्माण मजदूरों का मुफ्त पंजीकरण करने और पहले से दर्ज पंजीकरण को नवीनीकृत करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर कल्याणकारी योजनाओं का फायदा सीधे श्रमिकों तक पहुंचाया जाए। पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर निर्माण मजदूर को सामाजिक सुरक्षा, कल्याण सहायता और कौशल विकास के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
बोर्ड के गठन का उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने कहा, "पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन निर्माण मजदूरों के पंजीकरण, वित्तीय सहायता और कल्याण योजनाओं के जरिये उनकी भलाई, सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक उन्नति सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जरूरी धनराशि होने के बावजूद लंबी प्रोसेसिंग अवधि के कारण ये योजनाएं अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं।"
दायरा बढ़ाने के लिए और शिविर
योजनाओं की पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "इस समय बी.ओ.सी.डब्ल्यू. वेलफेयर बोर्ड के पास 2.21 लाख मजदूर पंजीकृत हैं, जो पूरे पंजाब में चल रही बड़े पैमाने की निर्माण गतिविधियों और तेज शहरीकरण को देखते हुए बहुत कम है। पंजीकरण की संख्या बढ़ाने के लिए राज्यभर में और पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे।"
पंजीकरण शुल्क का बोझ हटेगा
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विशेष मुहिम के दौरान सरकार मजदूरों पर लगने वाले पंजीकरण शुल्क का बोझ खत्म कर देगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें शामिल हों। उन्होंने कहा, "देखा गया है कि मजदूर अक्सर पंजीकरण कराने से हिचकते हैं क्योंकि उन्हें पंजीकरण शुल्क के तौर पर 145 रुपये जमा करने पड़ते हैं। नए पंजीकरण और नवीनीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए इस विशाल मुहिम में आवेदकों को यह शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी। अभियान के दौरान करीब 10 लाख मजदूरों का पंजीकरण किया जाएगा और इसके करीब 15 करोड़ रुपये के वित्तीय खर्च को पंजाब सरकार स्वयं वहन करेगी।"
गांवों में शाम को लगेंगे शिविर
उन्होंने आगे कहा कि पंजीकरण के बाद भी सरकार मजदूरों की मदद जारी रखेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, "जो मजदूर एक साल के भीतर किसी भी लाभ का इस्तेमाल नहीं कर पाते, उनका पंजीकरण शुल्क का खर्च भी सरकार उठाएगी। श्रम विभाग को गांवों में शाम के समय विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं क्योंकि उसी वक्त मजदूर काम से लौटते हैं और इससे अधिक से अधिक पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।"
लेबर चौकों पर बेहतर सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लेबर चौकों पर मजदूरों के लिए सुविधाएं सुधारने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "लेबर चौकों पर शेड बनाए जाने चाहिए और पीने के पानी का प्रबंध होना चाहिए, ताकि काम का इंतजार करते समय मजदूरों को किसी तरह की दिक्कत न झेलनी पड़े।"
प्रोसेसिंग समय में भारी कमी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आवेदनों के निपटारे में होने वाली देरी घटाकर कल्याण योजनाओं तक पहुंच को पहले ही आसान बना दिया है। उन्होंने बताया, "वित्तीय वर्ष 2022-23 में मजदूरों के लिए कल्याण योजनाओं का प्रोसेसिंग समय 203 दिन था, जिसे अब घटाकर 73 दिन कर दिया गया है। लंबा प्रोसेसिंग समय इन योजनाओं का लाभ लेने में सबसे बड़ी बाधा था, इसी वजह से यह अहम फैसला लिया गया।"
कौशल विकास पर जोर
कौशल विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बोर्ड को 50,000 पंजीकृत निर्माण मजदूरों का ब्योरा 'पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन' के साथ साझा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "बोर्ड को कौशल प्रशिक्षण के लिए 50,000 पंजीकृत निर्माण मजदूरों का डेटा पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन को सौंपना चाहिए। यह प्रशिक्षण केवल निर्माण स्थलों, पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन के प्रशिक्षण केंद्रों और बी.ओ.सी.डब्ल्यू. वेलफेयर बोर्ड द्वारा लगाए गए शिविरों में ही दिया जाना चाहिए।"
विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण
उन्होंने कहा कि मजदूरों को ऐसे विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षण मिलना चाहिए जिससे उनका हुनर और कमाने की क्षमता दोनों बढ़ें। मुख्यमंत्री के मुताबिक, "राजगीरी (मेसनरी), बार बेंडिंग एंड फिक्सिंग, शटरिंग कारपेंटरी, स्कैफोल्डिंग (पैड़ बांधना), क्वालिटी एशोरेंस, कंस्ट्रक्शन पेंटिंग, कंस्ट्रक्शन इलेक्ट्रिकल वर्क्स, सर्वेक्षण, सड़कों और रनवे का निर्माण, आंतरिक एवं बाहरी फिनिशिंग, फैब्रिकेशन, ड्राफ्टिंग, शटरिंग कारपेंटरी समेत अन्य संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।"
महिला मजदूरों के लिए विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए कि महिला मजदूरों को राज्य सरकार की प्रमुख कल्याण योजनाओं का लाभ अवश्य मिले। उन्होंने कहा, "बोर्ड को यह तय करना चाहिए कि महिला मजदूरों को 'मांवा-धीयां सत्कार योजना' के तहत वित्तीय सहायता भी मिले।" इस बैठक में कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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