चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन के इलाके में पहुंचने वाले हैं। इस दौरे से ठीक पहले उत्तर कोरिया का एक खतरनाक हथियार चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिसे खुद किम जोंग उन मीडिया के सामने प्रदर्शित कर रहे हैं। फिलहाल यही उनके शस्त्र-भंडार का सबसे विनाशकारी हथियार माना जा रहा है — एक डिस्ट्रॉयर युद्धपोत, जिसे असीमित परमाणु और क्रूज मिसाइलों से सुसज्जित किया गया है।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के अनुसार, किम जोंग उन ने गुरुवार को 5,000 टन वजनी इस अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर 'कांग कोन' (Kang Kon) का दौरा किया, जहां इसके विभिन्न सैन्य और क्षमता संबंधी परीक्षण किए जा रहे थे। एजेंसी के मुताबिक यह युद्धपोत एक बार लक्ष्य लॉक कर लेने के बाद पानी के ऊपर और भीतर, दोनों जगह से ऐसा घातक हमला कर सकता है कि दुश्मन का जीवित बचना लगभग असंभव हो जाता है।
क्या है 'कांग कोन' की सबसे बड़ी ताकत
इस 5,000 टन वजनी डिस्ट्रॉयर की सबसे भयावह विशेषता इसकी मिसाइल दागने की असीमित क्षमता है। आमतौर पर किसी भी युद्धपोत में मिसाइलें रखने की एक निश्चित सीमा होती है, लेकिन किम जोंग उन ने इस जहाज का पूरा ढांचा इस तरह तैयार करवाया है कि यह परमाणु मिसाइलों का एक चलता-फिरता 'फ्लोटिंग बेस' बन गया है।
परमाणु और क्रूज मिसाइलों का मेल
इस डिस्ट्रॉयर पर ऐसी उन्नत वर्टिकल लॉन्चिंग प्रणाली (VLS) लगाई गई है, जिसके जरिए एक साथ कई परमाणु हथियार ढोने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
रडार की पकड़ से बाहर
इस जहाज से छोड़ी जाने वाली क्रूज मिसाइलें समुद्र की लहरों से बिल्कुल सटकर उड़ती हैं, जिसके चलते दुश्मन के बड़े से बड़े रडार और एयर डिफेंस सिस्टम भी इन्हें समय रहते पकड़ नहीं पाते। जब तक दुश्मन को हमले का अंदाज़ा होता है, तब तक परमाणु विस्फोट सब कुछ तबाह कर चुका होता है।
पानी की सतह हो या गहराई, हर जगह मार
इन घातक परीक्षणों को देखते हुए किम जोंग उन ने अपनी नौसेना से साफ कहा कि इस हथियार की असली ताकत यही है कि यह दुश्मन को हर मोर्चे पर परास्त कर सकता है। यह युद्धपोत केवल सतह पर तैरते जहाजों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि समुद्र के भीतर छिपी पनडुब्बियों को भी खोजकर नष्ट करने की क्षमता रखता है।
अंडरवॉटर सीक्रेट वेपन्स का नियंत्रण केंद्र
केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, इस डिस्ट्रॉयर को उत्तर कोरिया के नए और अत्यंत गोपनीय 'अंडरवॉटर सीक्रेट वेपन्स', यानी पनडुब्बी रोधी और आत्मघाती टॉरपीडो को संचालित करने वाले एक मुख्य केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। इसके उन्नत सोनार और डिटेक्शन सिस्टम पानी के नीचे कई किलोमीटर की गहराई में छिपी दुश्मन की परमाणु पनडुब्बी को पल भर में ट्रैक कर लेते हैं।
एक साथ चलने वाला घातक हमला
एक बार जब इस जहाज के कंप्यूटरीकृत सिस्टम ने दुश्मन के लक्ष्य को लॉक कर लिया, तो वहां से बच निकलना नामुमकिन हो जाता है। सतह पर एंटी-शिप मिसाइलें और पानी के नीचे खतरनाक परमाणु टॉरपीडो एक साथ सक्रिय हो जाते हैं, जिससे दुश्मन को संभलने का एक सेकंड भी नहीं मिलता।
'क्रिमिनल' हादसे के बाद और भी ताकतवर
इस युद्धपोत की मारक क्षमता के पीछे किम जोंग उन का वह गुस्सा भी छिपा है, जिसने उत्तर कोरिया के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को दिन-रात मेहनत करने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, पिछले साल मई में जब चोंगजिन बंदरगाह पर 'कांग कोन' को पहली बार समुद्र में उतारा जा रहा था, तब एक बड़ा हादसा हो गया और जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उस समय शासक ने इस नाकामी को सीधे 'क्रिमिनल लापरवाही' करार दिया था।
इसी कड़ाई का परिणाम यह रहा कि जून में दोबारा लॉन्च होने के बाद से अब तक इस जहाज में इतने अपग्रेड किए जा चुके हैं कि यह पहले से कहीं अधिक आधुनिक और खतरनाक बन गया है। इसकी आर्मर प्लेटिंग यानी बॉडी की मजबूती को इतना भारी बनाया गया है कि यह दुश्मन के मिसाइल हमलों को आसानी से झेल सकता है। साथ ही इसमें अत्याधुनिक एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगाया गया है, जो आसमान से आने वाले किसी भी खतरे को हवा में ही नष्ट कर देता है।
10,000 टन के 'महा-दैत्य' की सिर्फ शुरुआत
किम जोंग उन की परमाणु नौसेना की योजना यहीं नहीं रुकती। यह 5,000 टन का 'कांग कोन' डिस्ट्रॉयर तो केवल एक शुरुआत है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अपनी नई पांच साल की रक्षा योजना के तहत उत्तर कोरिया की नौसेना में जल्द ही इसी श्रेणी के दो और डिस्ट्रॉयर शामिल किए जाएंगे।
इससे भी बड़ी बात यह है कि उत्तर कोरिया ने अब इससे दोगुने बड़े, यानी 10,000 टन श्रेणी के सुपर-डिस्ट्रॉयर्स बनाने के ब्लूप्रिंट पर काम शुरू कर दिया है। इन विनाशकारी जहाजों के पीछे उत्तर कोरिया की हाल ही में उजागर हुई 'यूरेनियम संवर्धन फैसिलिटी' का पूरा समर्थन है, जो इन्हें असीमित परमाणु ईंधन और मिसाइल वॉरहेड की आपूर्ति देती रहेगी।
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