जापान में पिछले कई दशकों से जनसंख्या संकट एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मुद्दा बना हुआ है। लगातार घटती आबादी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या ने सरकार की चिंता बढ़ा रखी है। हालांकि, इसी बीच जापान के लिए एक राहत भरी और सुखद खबर सामने आई है। देश में करीब 11 साल बाद पहली बार जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस सकारात्मक बदलाव से उम्मीद की एक नई किरण जगी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश के सामने खड़ी विशाल जनसांख्यिकीय चुनौती अभी कम नहीं हुई है।
आंकड़ों में सुधार: 11 वर्षों बाद मिली बड़ी राहत
जापान के स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के बीच देश में कुल 3,42,068 बच्चों का जन्म हुआ। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 0.8 फीसदी अधिक है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इस साल पहली छमाही में पिछले वर्ष की तुलना में 2,788 अधिक बच्चों ने जन्म लिया है। गौरतलब है कि जन्म दर में यह बढ़ोतरी पूरे 11 साल बाद दर्ज की गई है। इस आंकड़े में जापानी नागरिकों के साथ-साथ जापान में रह रहे विदेशी नागरिकों के घर जन्मे बच्चे भी शामिल हैं।
शादियों की बढ़ती संख्या बनी उम्मीद की किरण
जानकारों का मानना है कि जन्म दर में आए इस मामूली सुधार के पीछे पिछले कुछ वर्षों में देश में शादियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी है। जापान में वर्ष 2024 और 2025 के दौरान विवाह के मामलों में तेजी देखी गई थी। साल 2025 में विदेशी नागरिकों को मिलाकर कुल 5.05 लाख विवाह संपन्न हुए थे, जो कि वर्ष 2024 की तुलना में 1.1 फीसदी अधिक थे। विवाह का यह सिलसिला साल 2026 में भी जारी रहा। इस साल जनवरी से जून के बीच लगभग 2.39 लाख शादियां दर्ज की गईं, जो पिछले साल की इसी समान अवधि से 0.2 फीसदी ज्यादा हैं। इसी वजह से नवजात शिशुओं की संख्या में भी यह सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।
देश के अलग-अलग प्रांतों का हाल
जापान के भौगोलिक वितरण पर नजर डालें तो देश के कुल 47 प्रांतों में से 26 प्रांतों में इस अवधि के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। सबसे शानदार प्रदर्शन राजधानी टोक्यो में रहा, जहां पिछले साल की तुलना में सबसे ज्यादा 2,278 अधिक बच्चों ने जन्म लिया। इसके बाद आइची प्रांत में 517 बच्चों और फुकुओका प्रांत में 438 बच्चों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, सभी क्षेत्रों की स्थिति एक जैसी नहीं रही। देश के 21 प्रांतों में बच्चों के जन्म में गिरावट भी दर्ज की गई, जिसमें इशिकावा प्रांत में सबसे अधिक 360 बच्चों की कमी पाई गई।
राहत के बीच अभी टला नहीं है बड़ा संकट
भले ही जन्म दर के ये नए आंकड़े जापान सरकार और समाज के लिए थोड़ी राहत लेकर आए हों, लेकिन इससे देश की दीर्घकालिक आबादी की समस्या का समाधान नहीं हो जाता। जापान में बच्चे पैदा करने की उम्र वाली महिलाओं और पुरुषों की आबादी लगातार घट रही है। इसके साथ ही, आधुनिक जीवनशैली और आर्थिक कारणों से लोग या तो बहुत देर से शादी कर रहे हैं या फिर शादी न करने का फैसला ले रहे हैं। इसका सीधा असर आने वाले वर्षों में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या पर पड़ सकता है। इससे पहले साल 2025 में जापान में केवल 7.05 लाख बच्चों का जन्म हुआ था, जो लगातार 10वां साल था जब जन्म दर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर दर्ज की गई थी।
मौतों और जन्मों के बीच का बड़ा फासला
जापान की सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि वहां मौतों की संख्या नवजातों के जन्म की तुलना में बहुत अधिक बनी हुई है। साल 2026 की पहली छमाही के दौरान देश में कुल 7,78,982 लोगों की मौत हुई। हालांकि, राहत की बात यह है कि मौत का यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 6.9 फीसदी कम है। इसके बावजूद, जन्म और मृत्यु के बीच का अंतर इतना बड़ा है कि केवल छह महीने की अवधि में जापान की प्राकृतिक आबादी में 4,36,914 की भारी कमी आ गई। इससे साफ जाहिर होता है कि बच्चों के जन्म में मामूली सुधार के बावजूद जापान की कुल आबादी अभी भी बहुत तेजी से घट रही है।
अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर गहरा प्रभाव
जनसंख्या में आ रही इस तीव्र गिरावट का असर केवल सामाजिक आंकड़ों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर जापान की मजबूत अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कामकाजी उम्र के लोगों की कमी के कारण देश के कई महत्वपूर्ण उद्योगों और क्षेत्रों में श्रम संकट गहराता जा रहा है। इसके अलावा, आबादी कम होने से घरेलू बाजार सुस्त हो रहे हैं, कारोबार प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। साथ ही, देश में बुजुर्गों की लगातार बढ़ती संख्या और कर चुकाने वाली युवा आबादी की कमी के कारण पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर वित्तीय दबाव बहुत ज्यादा बढ़ता जा रहा है, जो आने वाले समय में जापान के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।
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