सतना और चित्रकूट में भारी बारिश से तबाही: उफान पर मंदाकिनी नदी, रामघाट का बड़ा पुल बहा, यूपी-एमपी का संपर्क टूटा

मध्यप्रदेश के सतना और धर्मनगरी चित्रकूट में मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 10 मीटर ऊपर पहुंचने से रामघाट का मुख्य पुल बह गया है और सैकड़ों दुकानें व मकान जलमग्न हो गए हैं।

मूसलाधार बारिश से बेकाबू हुए हालात, धर्मनगरी चित्रकूट जलमग्न

मध्यप्रदेश के सतना जिले और उसके आसपास के पहाड़ी व सीमावर्ती क्षेत्रों में शुक्रवार रात से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और निचले इलाकों में पानी का भराव तेजी से बढ़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति धर्मनगरी चित्रकूट में देखने को मिल रही है, जहां पवित्र मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा है कि पूरा तटीय इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोग अपनी गृहस्थी और घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हो गए हैं।

रामघाट का बड़ा पुल बहा, जलमग्न हुए मंदिर और दुकानें

शनिवार सुबह अचानक मंदाकिनी नदी का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ा, जिससे देखते ही देखते प्रसिद्ध रामघाट और उसके आसपास के बड़े हिस्से जलमग्न हो गए। प्रशासनिक आकलन के अनुसार, रामघाट पर नदी का पानी खतरे के निशान से लगभग 10 मीटर ऊपर बह रहा है। पानी के इस प्रचंड बहाव के कारण रामघाट का एक बड़ा पुल बह गया है, जिससे क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। इसके अलावा, घाट पर स्थित करीब 150 दुकानें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं। बाढ़ का पानी आसपास के रिहायशी मकानों, प्रसिद्ध तुलसी चबूतरा और आरती स्थल तक में प्रवेश कर चुका है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।

सड़कों पर चलने लगीं नावें, जीवन बचाने की जद्दोजहद

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिन सड़कों पर कल तक गाड़ियां दौड़ती थीं, वहां आज प्रशासनिक नावें चल रही हैं। रामघाट की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर पानी का बहाव बेहद तेज है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर दी है और लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। बेड़ी पुलिया से रामघाट की तरफ जाने वाला रास्ता और उसकी सीमा से लगी बस्तियां पानी में पूरी तरह डूब चुकी हैं। वहीं, निर्मोही अखाड़ा से लेकर पुरानी लंका तक के मुख्य मार्ग पर कई फीट पानी जमा हो जाने से यातायात पूरी तरह बाधित है। कई घरों के भीतर पानी घुस जाने से लोगों के सामने अब अपने सामान से ज्यादा खुद की और अपने परिवार की जान बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

धार्मिक स्थल डूबे, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का टूटा संपर्क

मंदाकिनी नदी की इस बाढ़ ने चित्रकूट के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को अपनी चपेट में ले लिया है। रामघाट के आसपास के सभी प्रमुख मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। इसके अलावा, कर्वी क्षेत्र में पुलघाट के समीप बने मंदिरों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण दो राज्यों के बीच का संपर्क भी टूट गया है। राजोला बाईपास के समीप हनुमान धारा मार्ग पर बना पुल बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह डूब गया है। इसके चलते चित्रकूट से सतना मुख्य मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे चित्रकूट का सतना और पड़ोसी जिलों से सीधा सड़क संपर्क टूट गया है।

प्रशासन हाई अलर्ट पर, राहत और बचाव कार्य जारी

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रभावित और निचले इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को लगातार सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी जा रही है। पुलिस बल, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की बचाव टीमें मुस्तैदी से राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। बाढ़ प्रभावित बस्तियों से लोगों को निकालने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती प्रशासनिक टीमें आपसी समन्वय स्थापित कर स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रही हैं। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नदी, घाटों और जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों से पूरी तरह दूर रहें।

पाठा क्षेत्र में दहशत, बरदहा नदी भी उफान पर

चित्रकूट के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण व पठारी इलाकों में भी हालात काफी चिंताजनक हैं। विशेष रूप से चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में बरदहा नदी उफान पर आ गई है। डोडामाफी के पास बने बांध का जलस्तर अत्यधिक बढ़ गया है और पानी बांध के फाटकों के ऊपर से बहने लगा है। इस स्थिति के कारण आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यहां के निवासियों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। भारी जलभराव के कारण ग्रामीण अंचलों को जोड़ने वाले कई मुख्य मार्गों को बंद करना पड़ा है।

पहाड़ी इलाकों की बारिश से बिगड़े हालात

शुक्रवार की रात शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने शनिवार दोपहर तक पूरे क्षेत्र के भूगोल को बदल कर रख दिया। पहाड़ी और ऊपरी इलाकों में हुई भारी वर्षा का पानी सीधे मंदाकिनी नदी में आने के कारण जलस्तर में यह अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। देखते ही देखते नदी ने तटीय बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। चित्रकूट में इस समय स्थिति किसी जल प्रलय जैसी प्रतीत हो रही है। रामघाट का मुख्य पुल बह जाने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि जब बाढ़ का पानी उतरेगा, तब यातायात को सामान्य करने में लंबा समय लग सकता है।

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