मानसून की फुहारें पड़ते ही राजस्थान की राजधानी जयपुर का नजारा पूरी तरह से बदल जाता है। अरावली की प्राचीन पर्वत श्रृंखलाएं जो साल के अधिकांश समय शुष्क दिखाई देती हैं, वे बारिश के पानी से नहाकर हरी-भरी हो जाती हैं। प्रकृति के इसी सुंदर और विहंगम रूप को करीब से देखने और रोमांच का अनुभव करने के लिए इन दिनों युवाओं में ट्रेकिंग का गजब का उत्साह देखा जा रहा है। वैसे तो जयपुर और उसके आसपास लगभग 10 से 15 ऐसे रास्ते हैं जहाँ लोग अक्सर ट्रेकिंग के लिए जाते हैं, लेकिन कुछ खास स्थान ऐसे हैं जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच पहली पसंद बने हुए हैं।
जयपुर में ट्रेकिंग के सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय विकल्प
जयपुर शहर केवल अपने भव्य महलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक बनावट भी एडवेंचर प्रेमियों को अपनी ओर खींचती है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे ट्रेकिंग रूट्स हैं जो प्रकृति की गोद में बने हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से नाहरगढ़, जयगढ़, गलताजी, आमागढ़ ट्विन टावर ट्रेल, घाट के बालाजी, हथनी कुंड, नटाटा वैली, जलमहल के पीछे का इलाका, चौर घाटी और आमेर सागर से कुकस तक जाने वाला पथरीला रास्ता शामिल हैं। ये सभी स्थल चारों तरफ से ऊंचे पहाड़ों और चट्टानों से घिरे हुए हैं, जो ट्रेकर्स को एक अलग ही रोमांच का अहसास कराते हैं और मानसून के समय इनकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है।
इतिहास और प्रकृति का अनूठा मेल: नाहरगढ़, जयगढ़ और आमेर
अगर आप बारिश के दिनों में अच्छी शारीरिक कसरत के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और इतिहास का अनुभव करना चाहते हैं, तो नाहरगढ़, जयगढ़ और आमेर की घाटियां आपके लिए सबसे सही जगह हैं। इन प्रसिद्ध किलों की सुरक्षा के लिए बनी विशाल दीवारें पहाड़ों पर कई किलोमीटर तक फैली हुई हैं, जो ट्रेकिंग के लिए एक शानदार और सुलभ रास्ता प्रदान करती हैं। इन रास्तों पर ट्रेकिंग करना बेहद आसान है, जिससे हर उम्र के लोग यहाँ आसानी से चढ़ाई कर सकते हैं। ऊंचे पहाड़ों से दिखने वाला जयपुर शहर का नजारा बेहद मनमोहक होता है। यहाँ से पर्यटकों को शहर की अद्भुत बसावट देखने को मिलती है, जो फोटोग्राफी और वीडियो बनाने के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यही वजह है कि वीकेंड पर यहाँ युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ जुटती है।
जलमहल के पीछे छिपी जलधाराएं और हरे-भरे जंगल
जयपुर में घने जंगलों, बहते झरनों और प्राकृतिक पानी के बीच से गुजरने वाले रास्तों पर ट्रेकिंग का असली आनंद जलमहल के आसपास की पहाड़ियों में मिलता है। बारिश के मौसम में यहाँ का नजारा देखते ही बनता है। जलमहल के पीछे की पहाड़ियों में बेहद शांत और हरा-भरा माहौल रहता है। पथरीले रास्तों और घने पेड़ों के बीच से गुजरने वाली यह ट्रेल ट्रेकर्स के रोमांच को दोगुना कर देती है। इस मार्ग पर आगे बढ़ते हुए पर्यटकों को गुर्जर घाटी से वैष्णो देवी मंदिर समेत कई अन्य प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन करने का मौका भी मिलता है, जो इस ट्रेकिंग यात्रा को और भी धार्मिक और यादगार बना देते हैं।
वन्यजीव और एडवेंचर का रोमांच: लेपर्ड सफारी क्षेत्र
जयपुर के अरावली पर्वतीय क्षेत्र में 4 लेपर्ड सफारी क्षेत्र भी शामिल हैं, जो घने जंगलों के बीच बसे हैं। इनमें प्रमुख रूप से झालाना सफारी, आमागढ़ सफारी और बिड़ पापड़ सफारी शामिल हैं। सफारी के मुख्य रास्तों से अलग यहाँ कुछ बेहद खूबसूरत ट्रेकिंग पॉइंट्स बनाए गए हैं जहाँ युवाओं को जाना बेहद पसंद है। इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय आमागढ़ और हथनी कुंड के क्षेत्र हैं। यहाँ स्थित पुराने टावर तक जाने वाली खड़ी चढ़ाई पर्यटकों की शारीरिक क्षमता की परीक्षा लेती है, लेकिन ऊपर पहुँचने के बाद दिखने वाला मानसून का नजारा सारी थकान मिटा देता है। बारिश के मौसम में इन रास्तों पर चलना एक अलग ही रोमांच पैदा करता है।
धार्मिक आस्था और ट्रेकिंग का संगम
जयपुर के कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर घने जंगलों और पहाड़ों के बीच स्थित हैं, जहाँ पहुँचने का एकमात्र जरिया पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना ही है। गलताजी क्षेत्र में घाट के बालाजी, खोले के हनुमान जी मंदिर के आसपास की ऊँची पहाड़ियाँ, पापड़ के हनुमान मंदिर के आसपास फैला घना जंगल और गलता गेट की पहाड़ियाँ बेहतरीन ट्रेकिंग रूट्स माने जाते हैं। इन रास्तों पर चलते हुए श्रद्धालु और ट्रेकर्स दोनों ही अरावली की असीम शांति का अनुभव करते हैं। इन मंदिरों तक पहुँचने के लिए उबड़-खाबड़ और पहाड़ी पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है, जो भक्तों के लिए एक बेहतरीन एडवेंचर का अनुभव कराता है।
सुरक्षित ट्रेकिंग के लिए बेहद जरूरी बातें
यदि आप भी इस मानसूनी मौसम में जयपुर की खूबसूरत पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच ट्रेकिंग करने की योजना बना रहे हैं, तो सुरक्षा को लेकर बेहद सावधान रहना आवश्यक है। किसी भी तरह की अनहोनी और दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन नियमों और सुझावों का पालन जरूर करें:
- स्थानीय मार्गदर्शक के बिना न जाएं: किसी भी अनजान जंगल या पहाड़ी रास्ते पर बिना किसी स्थानीय जानकार या गाइड के जाने से बचें, क्योंकि बारिश में रास्ते भटकने और जंगली जानवरों का खतरा रहता है।
- हमेशा समूह में रहें: कभी भी अकेले ट्रेकिंग पर न निकलें। हमेशा अपने दोस्तों या परिवार के साथ एक समूह बनाकर ही आगे बढ़ें ताकि आपातकालीन स्थिति में मदद मिल सके।
- सही जूतों का चयन: पहाड़ी रास्तों पर बारिश के कारण फिसलन बहुत अधिक होती है, इसलिए हमेशा बेहतरीन ग्रिप वाले ट्रेकिंग जूते ही पहनें।
- खाद्य सामग्री और पानी: अपने साथ पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी और हल्का सूखा भोजन अवश्य रखें ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे।
- सरकारी नियमों का पालन करें: वन्यजीव क्षेत्रों और जंगलों में ट्रेकिंग करते समय वन विभाग द्वारा जारी किए गए सभी दिशा-निर्देशों और नियमों का कड़ाई से पालन करें और प्रकृति को नुकसान न पहुँचाएं।
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