डिफेंस से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक का बड़ा एजेंडा, प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा के क्या हैं मायने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो देशों की महत्वपूर्ण यात्रा पर निकले हैं, जिसका उद्देश्य मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना है। इस दौरे में व्यापार, रक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख मुद्दों पर विशेष चर्चा होगी।

मध्य एशिया के साथ भारत के गहरे होते संबंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो देशों की विदेश यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरे में वह उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की आधिकारिक यात्रा करेंगे। यह दौरा भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। मध्य एशिया के ये देश प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से दुर्लभ खनिजों यानी Rare Earth Material के मामले में अत्यंत समृद्ध हैं। इन खनिजों की भूमिका आज के युग में ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपरिहार्य हो गई है। भारत के लिए इन देशों के साथ मिलकर काम करना एक रणनीतिक आवश्यकता है।

उज्बेकिस्तान का दौरा और द्विपक्षीय बातचीत

प्रधानमंत्री 29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे की शुरुआत उज्बेकिस्तान से कर रहे हैं। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर ताशकंद पहुंच रहे प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यह उनकी इस देश की चौथी यात्रा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है। ताशकंद में राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ उनकी प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि वह विकसित भारत और यांगी उज्बेकिस्तान के साझा विजन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस यात्रा के दौरान वह ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थापित शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। यह कार्यक्रम भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे सांस्कृतिक और जन-आधारित संबंधों को दर्शाने वाला एक प्रमुख प्रतीक होगा।

किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन की भूमिका

अपनी यात्रा के अगले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 1 सितंबर को किर्गिस्तान पहुंचेंगे। वहां वह राष्ट्रपति सादिर झापारोव के विशेष आमंत्रण पर 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह सम्मेलन बेहद खास है क्योंकि यह संगठन अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ष 2017 से भारत SCO का एक अत्यंत सक्रिय सदस्य रहा है। प्रधानमंत्री ने इस मंच पर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों पर आधारित भारत के दृष्टिकोण को मजबूती से रखने की बात कही है।

उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ को पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा करार देते हुए कहा कि भारत इन बुराइयों से मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है। उनका मानना है कि ये चुनौतियां न केवल हमारे पड़ोस के लिए बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

वर्ल्ड नोमैड गेम्स और सांस्कृतिक जुड़ाव

किर्गिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। यह आयोजन मध्य एशिया की समृद्ध और जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसका भारत हमेशा से सम्मान करता रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा न केवल मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देगी, बल्कि हमारे सभ्यतागत जुड़ाव को और गहरा करेगी। अंततः, भारत की यह पहल शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के उन मूल्यों को आगे बढ़ाएगी, जो पूरी दुनिया के साथ भारत के संबंधों के केंद्र में हैं।

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