पाकिस्तान की बढ़ती बेचैनी
सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सख्त तेवरों ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। भारत द्वारा इस संधि को स्थगित किए जाने के बाद से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी व्यथा लेकर पहुंच गया है। पाकिस्तान का कहना है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है और इसे नजरअंदाज करना वहां की जनता के लिए संकट पैदा कर सकता है।
25 करोड़ लोगों की जीवनरेखा
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक बयान में कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के 25 करोड़ से अधिक लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की कृषि, खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन और पूरी अर्थव्यवस्था इसी नदी प्रणाली पर टिकी हुई है। डार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि पानी का मुद्दा अनसुलझा रहा, तो इसके गंभीर क्षेत्रीय परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
भारत का स्पष्ट और सख्त स्टैंड
इस पूरे मामले पर भारत का नजरिया पूरी तरह से साफ है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पार से होने वाला आतंकवाद पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता, तब तक सिंधु जल संधि को सामान्य रूप से लागू करना संभव नहीं है। भारत पहले भी यह जता चुका है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन दोनों तरफ से तभी होता है जब शांतिपूर्ण माहौल हो। अब पाकिस्तान की ओर से की गई यह नई अपील भारत के कड़े रुख के जवाब में एक हताशा भरा कदम मानी जा रही है।
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