बरसीम की खेती: एक बार लगाएं, 6 बार काटें, पशुओं को मिलेगा सुपर फूड और खेत बनेगा उपजाऊ

किसान भाई अब बरसीम की खेती से अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं, क्योंकि यह फसल पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाती है।

पशुपालकों के लिए बरसीम की खेती का महत्व

अगर आप खेती के साथ-साथ पशुपालन का काम भी करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। बदलते मौसम के बीच अक्सर पशुपालक किसानों के सामने हरे चारे की समस्या खड़ी हो जाती है, जिससे निपटने के लिए उन्हें मजबूरन पशुओं को सूखा चारा खिलाना पड़ता है। इसका सीधा असर दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य और उनके दूध उत्पादन पर पड़ता है। ऐसे में बरसीम की खेती एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आई है। यह न केवल पशुओं के लिए एक पौष्टिक सुपर फूड है, बल्कि किसानों के लिए भी मुनाफे का सौदा साबित हो रही है।

बरसीम क्यों है पशुओं के लिए सुपर फूड

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बरसीम का चारा अत्यधिक मुलायम और रसदार होता है, जिसे पशु बहुत चाव से खाते हैं। इस चारे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बहुत आसानी से पच जाता है, जिससे पशुओं के पाचन तंत्र पर बुरा असर नहीं पड़ता। इसमें लगभग 20 फ़ीसदी तक कच्चा प्रोटीन और कई आवश्यक खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। रोजाना बरसीम का सेवन करने से न केवल पशुओं की सेहत सुधरती है, बल्कि उनके द्वारा दिए जाने वाले दूध की मात्रा और गुणवत्ता में भी भारी इजाफा होता है।

खेती की तैयारी और उचित मिट्टी का चयन

कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश का कहना है कि बरसीम की फसल के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। फसल की बुवाई शुरू करने से पहले खेत को पूरी तरह से तैयार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए किसान को खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करनी चाहिए। गहरी जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ें गहराई तक जा सकती हैं। जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत की सतह को समतल कर लेना चाहिए, ताकि कहीं पर भी पानी जमा न हो।

बुवाई का सही तरीका और बीज की मात्रा

एक एकड़ खेत में बरसीम की बुवाई के लिए आमतौर पर 8 से 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना बहुत जरूरी माना जाता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बीजों को राइजोबियम कल्चर से जरूर उपचारित करें। ऐसा करने से पौधों की जड़ों में गांठें बनती हैं, जो मिट्टी से नाइट्रोजन सोखकर फसल को मजबूती प्रदान करती हैं। खेत की क्यारियों में हल्का पानी भरने के बाद बीजों का छिड़काव करना सबसे अच्छा रहता है, इससे बीज सही तरीके से मिट्टी में सेट हो जाते हैं और उनका जमाव बहुत बेहतर होता है।

एक बार की बुवाई और 6 बार कटाई का लाभ

बरसीम की फसल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बार-बार कटाई की क्षमता है। बुवाई के लगभग 50 दिनों के भीतर यह फसल पहली बार कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। इसके बाद, जैसे ही किसान इसकी कटाई करता है, पौधा फिर से पनपने लगता है। हर कटाई के बाद यह फसल लगभग 25 दिनों के अंतराल पर अगली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इस तरह से, किसान पूरे एक सीजन में इसे कम से कम 5 से 6 बार काट सकते हैं। इसके अलावा, इस फसल की जड़ें मिट्टी की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती हैं, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता दोगुनी हो जाती है।

किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ

बरसीम की खेती न केवल पशुओं के आहार की कमी को दूर करती है, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी किसान को मजबूत बनाती है। कम लागत और अधिक पैदावार के कारण, यह फसल उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जो पारंपरिक फसलों के साथ-साथ पशुपालन को भी बढ़ावा देना चाहते हैं। मिट्टी की संरचना में सुधार होने के कारण, अगली फसल की उत्पादकता भी सकारात्मक रूप से प्रभावित होती है।

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