मौसम का महा-अलर्ट: हिमालयी क्षेत्रों में उथल-पुथल के साथ बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात, इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

देश के कई हिस्सों में मानसून की सक्रियता के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जहां नेपाल में आई बाढ़ का असर भारतीय सीमाओं पर भी दिखने की आशंका है।

हिमालयी क्षेत्रों में संकट और बंगाल की खाड़ी में नई हलचल

देश के मौसम तंत्र में इस समय दोतरफा हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां पड़ोसी देश नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश के कारण भारतीय सीमा से सटे इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी में बने एक नए मौसमी सिस्टम ने देश के मैदानी और तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के कारण आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के कारण उत्तर भारत की सीमावर्ती नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इससे बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी में लगातार सक्रिय हो रहे नए मौसमी तंत्रों के कारण पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के राज्यों में हल्की से लेकर अत्यंत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना बनी हुई है।

इन राज्यों में मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट

IMD द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश के बड़े हिस्से में मानसून अभी भी पूरी तरह से सक्रिय बना हुआ है। हाल के दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड और मध्य भारत के पूर्वी मध्य प्रदेश में भी मानसून का रौद्र रूप देखने को मिला है।

मौसम विभाग ने आने वाले समय के लिए अपनी चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि निम्नलिखित क्षेत्रों में भारी बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी:

  • अरुणाचल प्रदेश, बिहार और पूर्वी राजस्थान: इन क्षेत्रों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है और भारी बारिश होने की संभावना है।
  • पश्चिम बंगाल, सिक्किम और झारखंड: यहां के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा।
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा: इन राज्यों में भी चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लिए विशेष मौसम चेतावनी

मौसम विभाग ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए भारी बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों पर इस समय एक मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बना हुआ है। यह मौसमी सिस्टम फिलहाल अपनी जगह पर स्थिर है और इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। खास बात यह है कि इस सिस्टम का झुकाव दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर है।

इस सिस्टम के प्रभाव के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के भी अधिकांश हिस्सों में बादलों की आवाजाही के साथ मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मध्य भारत और उत्तर भारत के इन हिस्सों में बारिश की यह सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी जिससे आम जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

मानसून ट्रफ की स्थिति और दिल्ली का मौसम

मौसम की इस सक्रियता के पीछे मानसून ट्रफ का भी बड़ा हाथ है। वर्तमान में समुद्र तल पर सक्रिय मानसून ट्रफ जम्मू, देहरादून, बदायूं से होते हुए दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में बने कम दबाव के क्षेत्र के केंद्र से गुजर रही है। इसके बाद यह डाल्टनगंज और दीघा से होकर उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रही है। इस मानसूनी रेखा के प्रभाव के कारण ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और इनके पड़ोसी राज्यों में बारिश का सिलसिला लगातार बना हुआ है।

इसके विपरीत, देश की राजधानी दिल्ली में मौसम का मिजाज फिलहाल शांत रहने का अनुमान है। दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में आज भारी बारिश जैसी किसी बड़ी गतिविधि की संभावना नहीं है, हालांकि आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और उमस भरी गर्मी से लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।

ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश का संकट, जारी हुआ विशेष अलर्ट

ओडिशा के लिए मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को बेहद संवेदनशील बताया है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित होने की प्रबल संभावना बन रही है। इस नए सिस्टम के प्रभाव के कारण 31 अगस्त तक ओडिशा के विभिन्न जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि 30 अगस्त को ओडिशा के कुछ हिस्सों में अत्यंत भारी बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा है। स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में मुस्तैद रहने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण अब दक्षिणी बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की सीमा पर आ गया है। यह वायुमंडल में 1.5 किलोमीटर से लेकर 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच सक्रिय है और ऊंचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर झुका हुआ है।

इसके साथ ही, एक और मौसमी ट्रफ उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी से लेकर उत्तर-पूर्वी राजस्थान तक फैली हुई है। यह ट्रफ रेखा ओडिशा, उत्तरी छत्तीसगढ़ और उत्तरी मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है और यह हवा में लगभग 3.1 से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर पूरी तरह से सक्रिय बनी हुई है।

देश के अन्य हिस्सों में भी बने हुए हैं कई चक्रवाती तंत्र

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में इस समय कई चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं जो स्थानीय स्तर पर मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:

  • गुजरात क्षेत्र: गुजरात और उसके आसपास के वायुमंडल में लगभग 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।
  • उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश: इस क्षेत्र में करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक अन्य चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
  • पूर्वोत्तर असम: असम के पूर्वी हिस्सों पर भी एक चक्रवाती परिसंचरण की स्थिति देखी जा रही है।
  • तेलंगाना और रायलसीमा: इस दक्षिण-प्रायद्वीपीय क्षेत्र में करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक परिसंचरण मौजूद है।
  • कोंकण और अरब सागर: कोंकण तट और उससे सटे पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर भी 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।

हालांकि, इन तमाम हलचलों के बीच IMD ने यह भी संकेत दिया है कि अगले एक सप्ताह के दौरान देश के कुछ हिस्सों में मानसूनी बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। जहां उत्तर, मध्य और पूर्वी तटीय भारत में मानसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश होगी, वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में इस दौरान वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना व्यक्त की गई है।

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