उत्तराखंड के पहाड़ी अंचलों में मिलने वाला अमर तिमुल का पेड़ सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। यह अंजीर प्रजाति का पेड़ है, जो प्राकृतिक रूप से जंगलों में और गांवों के आसपास अपने आप उग आता है।
छाल और टहनियों से निकलता है सफेद दूध
बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि जब तिमुल की छाल या उसकी टहनियों को तोड़ा जाता है, तो उसमें से सफेद रंग का दूध बाहर आता है। स्थानीय बोलचाल में इसी तरल को चोप कहकर पुकारा जाता है।
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
यह पेड़ केवल सेहत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने और हरियाली को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाता है।
धार्मिक महत्व भी कम नहीं
पहाड़ों की धार्मिक विरासत में तिमुल के पेड़ की अलग पहचान रही है और यह वर्षों से अपने इस महत्व को बनाए हुए है।
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