जापान में भालुओं के खिलाफ छिड़ी जंग: 14,000 से अधिक भालुओं को मार गिराया गया

जापान में इंसानों पर भालुओं के लगातार बढ़ते हमलों को रोकने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर शिकार का अभियान चलाया है, जिसके तहत रिकॉर्ड संख्या में भालू मारे जा रहे हैं।

जापान में भालू और इंसानों के बीच खूनी संघर्ष

जापान में इस समय इंसानों और भालुओं के बीच टकराव एक बेहद गंभीर संकट के रूप में उभरकर सामने आया है। पिछले कुछ समय से भालुओं के हमले आम हो गए हैं और इसने सरकार को बड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल भालुओं ने 230 से अधिक लोगों को निशाना बनाया, जिसमें 13 लोगों ने अपनी जान गंवाई। यह जापान के इतिहास में भालू हमलों का सबसे घातक वर्ष साबित हुआ है। इस स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने भालुओं को मारने का व्यापक अभियान चलाया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 14,000 से ज्यादा भालुओं को मौत के घाट उतार दिया गया, जिनमें करीब 12,000 एशियाई काले भालू और 2,000 भूरे भालू शामिल हैं।

इंसानी बस्तियों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं भालू?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समस्या की जड़ें प्राकृतिक संसाधनों की कमी और बदलती भौगोलिक स्थितियों में छिपी हैं। जापान के जंगलों में भालुओं का प्रमुख आहार, जैसे कि बलूत और बीच के फल, कई क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन और गर्मी की मार ने जंगलों की खाद्य श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जापान के ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या में तेजी से गिरावट आई है। गांवों में खेती और बागवानी के काम कम होने की वजह से कई जगहें खाली पड़ी हैं, जहाँ उगने वाले फल और अन्य वनस्पतियां भालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं और वे भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।

शिकारियों की कमी और नियमों में ढील

जापान सरकार का मानना है कि हालात बिगड़ने के पीछे प्रशिक्षित शिकारियों की भारी कमी भी एक मुख्य कारण है। वर्ष 1975 के बाद से लाइसेंस प्राप्त शिकारियों की संख्या में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने आवासीय क्षेत्रों के पास भालुओं को गोली मारने के नियमों में बड़ी ढील दे दी, जिसके बाद से भालुओं को पकड़ने और मारने की गतिविधियों में तेजी आई है।

क्या शिकार से मिलेगी हमलों से मुक्ति?

अब सवाल यह है कि इतनी भारी संख्या में भालुओं को मारने के बाद भी क्या समस्या का समाधान निकला? उत्तर है, फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा है। अप्रैल 2026 से अब तक कम से कम 6 लोगों की मौत हो चुकी है और 35 से अधिक लोग हमले में घायल हुए हैं। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में शिकार के बावजूद हमले जारी हैं। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 8,800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ इस नीति की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

प्रजाति पर मंडराता विलुप्ति का खतरा

एशियाई काला भालू वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में आता है। जापान में इनकी कुल आबादी लगभग 42,000 होने का अनुमान है, हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आंकड़ा पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। सटीक संख्या का पता लगाने के लिए देश में एक नया राष्ट्रीय सर्वे शुरू किया गया है, जिसके पूर्ण होने में लगभग तीन साल लगेंगे। विशेषज्ञों को डर है कि यदि भालुओं की वास्तविक संख्या सरकारी अनुमान से कम हुई, तो इतने व्यापक स्तर पर शिकार से कई क्षेत्रों से यह प्रजाति पूरी तरह विलुप्त हो सकती है।

करुइजावा से मिल सकती है प्रेरणा

इस बीच, जापान के करुइजावा क्षेत्र ने एक अलग और सुरक्षित मॉडल पेश किया है। यहाँ भालुओं को मारने के बजाय उन्हें इंसानी बस्तियों से दूर रखने पर ध्यान दिया जाता है। यहाँ विशेषज्ञ प्रशिक्षित कुत्तों की सहायता से भालुओं को बस्तियों से खदेड़ते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहोश करके वापस गहरे जंगल में छोड़ दिया जाता है। इसके साथ ही, निवासियों को कचरा प्रबंधन और फलों को सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है ताकि भालू गांवों की ओर आकर्षित न हों। उल्लेखनीय है कि इस तरीके को अपनाने के कारण 2015 के बाद से करुइजावा में भालू के हमले से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।

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