आरक्षण पर छिड़ी बहस
न्यूज18 इंडिया के चर्चित शो भैयाजी कहिन में हाल ही में आरक्षण, सामाजिक पहचान और UGC से जुड़े नियमों को लेकर एक बेहद गरमागरम चर्चा देखने को मिली। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रतिनिधियों ने अपने पक्ष रखे। बिहार के दरभंगा से आए कोमलकांत चौधरी और राजस्थान के निवासी बलदेव सिंह राजपूत ने इस मंच पर आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए। कार्यक्रम के दौरान न केवल व्यवस्था में बदलाव की मांग उठी, बल्कि जातिगत पहचान को लेकर भी खुलकर बात की गई।
कोमलकांत चौधरी का पक्ष
बहस की शुरुआत करते हुए कोमलकांत चौधरी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा परिकल्पित आरक्षण के मूल उद्देश्य और सामाजिक समानता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सवाल किया कि आरक्षण का जो लाभ समाज के सबसे पिछड़े और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए था, क्या वह वास्तव में वहां तक पहुंच पा रहा है? चौधरी ने राजनीतिक परिवारों पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आरक्षण का अधिकांश लाभ बड़े राजनीतिक घरानों तक ही सीमित रह गया है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, शरद पवार और रामविलास पासवान जैसे दिग्गज नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से राजनीति में प्रभाव रखने वाले परिवार ही इसका फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने वाल्मीकि समाज और विभिन्न जातियों के बीच के समीकरणों पर भी सवाल खड़े किए और सामाजिक समानता के लिए एक बड़े मंथन की आवश्यकता जताई।
बलदेव सिंह राजपूत की हुंकार
दूसरी ओर, राजस्थान से पहुंचे बलदेव सिंह राजपूत ने अपनी मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने UGC के नियमों को रोल बैक करने और आरक्षण व्यवस्था में तत्काल बदलाव की पुरजोर मांग की। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी पहचान पर गर्व करते हुए कहा कि, मैं राजपूत हूं, पीछे नहीं हटूंगा। उन्होंने धरने-प्रदर्शन के दौरान आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रशासन उन्हें धरने वाली जगह से हटाने की कोशिश करता है, लेकिन वे बार-बार वापस आकर विरोध प्रदर्शन जारी रखते हैं।
संयम और अनुशासन की नसीहत
बहस के दौरान जब माहौल काफी तल्ख हो गया, तब शो के एंकर प्रतीक त्रिवेदी ने बीच-बचाव करते हुए बलदेव सिंह को अपनी बात संयम और विनम्रता के साथ रखने की सलाह दी। प्रतीक त्रिवेदी ने कहा कि हर किसी को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन बातचीत की मर्यादा बनाए रखना भी आवश्यक है।
सामाजिक शोषण का पहलू
प्रतीक त्रिवेदी ने इस दौरान सामाजिक असमानता के ऐतिहासिक संदर्भों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने बलदेव सिंह की परेशानी को समझते हुए कहा कि बारिश और खराब मौसम में सड़क पर प्रदर्शन करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन किसी भी बड़े सामाजिक मसले का समाधान रातों-रात संभव नहीं है। एंकर ने सैकड़ों वर्षों से चले आ रहे सामाजिक शोषण की ओर इशारा करते हुए बलदेव सिंह से कहा कि जहां सदियों पुराना शोषण का इतिहास रहा हो, वहां केवल चार दिन के संघर्ष से परेशान होकर समाधान की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने युवाओं की आवाज को महत्व देते हुए धैर्य बनाए रखने की बात कही।
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