जोधपुर-जैसलमेर रेल लाइन का होगा कायाकल्प, 713 करोड़ रुपये से बदलेगी 291 किलोमीटर लंबी पटरी

भारतीय रेलवे ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राईका बाग-जैसलमेर रेलखंड को अपग्रेड करने की बड़ी योजना बनाई है। इसके तहत 713 करोड़ रुपये की लागत से पटरियां बदली जाएंगी और स्लीपरों का नवीनीकरण किया जाएगा जिससे सुरक्षा और रेल यातायात क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।

जैसलमेर रेलमार्ग के आधुनिकीकरण की तैयारी

भारतीय रेलवे ने जोधपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले राईका बाग से जैसलमेर तक के रेलखंड को अत्याधुनिक बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। यह रेलमार्ग न केवल सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है, बल्कि पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरे 291 किलोमीटर लंबे रेलखंड के ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए रेलवे ने 713 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब इस परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

परियोजना का विस्तृत विवरण

उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के रेल प्रबंधक (DRM) अनुराग त्रिपाठी ने जानकारी दी है कि इस नवीनीकरण कार्य को चरणबद्ध तरीके से संपन्न किया जाएगा। परियोजना के तहत पूरे 291 किलोमीटर के दायरे में व्यापक बदलाव किए जाएंगे। इसमें से 268 किलोमीटर हिस्से में पुरानी पटरियों को हटाकर उनकी जगह नई और मजबूत पटरियां बिछाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, 23 किलोमीटर के खंड में पुराने स्लीपरों को बदलकर उनके स्थान पर नए स्लीपर स्थापित किए जाएंगे। इस बड़े तकनीकी सुधार से ट्रेनों की सुरक्षा तो बढ़ेगी ही, साथ ही परिचालन में भी पहले से कहीं अधिक सुगमता आएगी।

तीन चरणों में पूरा होगा निर्माण कार्य

रेलवे की ओर से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है ताकि ट्रेनों के सामान्य परिचालन में कम से कम बाधा आए। कार्य का विवरण इस प्रकार है:

  • पहला चरण: राईका बाग से मारवाड़ बीठड़ी तक के शुरुआती 160 किलोमीटर के हिस्से में पूरी पटरी को नए सिरे से बदला जाएगा।
  • दूसरा चरण: 160 किलोमीटर से 183 किलोमीटर तक के 23 किलोमीटर के खंड में मौजूद पुराने स्लीपरों को हटाकर नए स्लीपर लगाए जाएंगे।
  • तीसरा चरण: 183 किलोमीटर से 291 किलोमीटर के बीच के 108 किलोमीटर लंबे रेल पथ की पुरानी पटरियों को पूर्णतः बदलकर नई पटरी डाली जाएगी।

इस चरणबद्ध प्रक्रिया से राईका बाग से लेकर जैसलमेर तक का पूरा रेल मार्ग एक आधुनिक और सुरक्षित रेल पथ में तब्दील हो जाएगा। पटरियों और स्लीपरों के बदलाव के अलावा, रेल पथ से जुड़े अन्य तकनीकी घटकों का भी आवश्यकतानुसार आधुनिकीकरण किया जाएगा ताकि रेल नेटवर्क की कुल क्षमता में वृद्धि हो सके।

टेंडर प्रक्रिया और भविष्य की राह

परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जोधपुर मंडल ने पहले ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। राईका बाग से मारवाड़ बीठड़ी तक के शुरुआती 160 किलोमीटर हिस्से के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं और वर्तमान में यह प्रक्रियाधीन है। शेष कार्य के लिए टेंडर की कार्यवाही भी निर्धारित सरकारी नियमों के तहत जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।

सुरक्षा और विकास पर जोर

जैसलमेर का यह रेलखंड रक्षा और सुरक्षा की दृष्टि से भारतीय सेना और देश के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, थार के रेगिस्तान में स्थित जैसलमेर में हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्तमान रेल ढांचे के सुदृढ़ीकरण से ट्रेनों की औसत गति में इजाफा होगा, पटरियों पर दबाव कम होगा और भविष्य की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप अधिक मालगाड़ियों व यात्री ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। यह बदलाव क्षेत्र के आर्थिक विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा। रेलवे के इस कदम से यात्रियों को न केवल सुरक्षित सफर मिलेगा, बल्कि परिचालन क्षमता में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।

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