नेपाल में कुदरत का कहर और चीन की भूमिका
नेपाल में बुधवार का दिन बेहद दुखद रहा, जब चीन के तिब्बत सीमावर्ती इलाकों से अचानक आए बाढ़ के पानी ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा के चलते नेपाल के कई क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। इस त्रासदी की सबसे चिंताजनक बात यह है कि आपदा के समय चीन की तरफ से कोई पूर्व चेतावनी यानी अर्ली वार्निंग नहीं दी गई, जिसके कारण आम जनता संभल नहीं सकी। इस लापरवाही पर नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार परशुराम काफ्ले ने चीन के प्रति अपना कड़ा गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने चीन को इस विनाशकारी स्थिति के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है और इसे एकतरफा संबंधों की सजा करार दिया है।
लापता लोगों की संख्या और बचाव कार्य
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ के कारण अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सबसे अधिक चिंता 384 लोगों के लापता होने को लेकर है, जो अभी तक मिल नहीं पाए हैं। इन लापता व्यक्तियों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे और स्याप्रुबेसी इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन की टीमें युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। नेपाल की सेना और पुलिस लगातार लोगों की तलाश में दिन-रात काम कर रही है।
नेपाली पत्रकार का चीन पर बड़ा हमला
पत्रकार परशुराम काफ्ले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी कड़ी नाराजगी जताते हुए चीन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि नेपाल हमेशा अपने पड़ोसी देशों की सुरक्षा चिंताओं का पूरा सम्मान करता है और सहयोग बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, चीन की इस हरकत ने नेपाल को भारी संकट में डाल दिया है। काफ्ले ने सवाल किया है कि नेपाल आखिर चीन के साथ इस एकतरफा प्यार की कीमत अपनी जनता की जान गंवाकर क्यों चुकाए। उन्होंने कहा कि चीन की सीमा से अक्सर इस तरह के संकट सामने आते रहे हैं, लेकिन चेतावनी न देना कतई स्वीकार्य नहीं है।
बाढ़ की भयावहता और ताजा स्थिति
यह घटना 26 अगस्त की है, जब सुबह करीब 9 बजे अचानक भोटे कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कहीं ऊपर चला गया। पानी के अचानक आए इस सैलाब ने सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। टूरिज्म बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता होने वालों में 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली शामिल हैं। इस बाढ़ ने स्थानीय बाजारों और सुरक्षा चौकियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, अब तक रेस्क्यू टीमों ने 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जबकि 14 हेलीकॉप्टर्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में खोजबीन जारी है। दुखद यह है कि नेपाल-चीन सीमा पर तैनात सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवान भी बाढ़ की चपेट में आने के बाद लापता हैं। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को नदी के किनारों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
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