झारखंड के पलामू जिले में ग्रामीण विकास की एक नई और सुखद तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। यहां के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। सरकार के प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक संस्थाएं भी इस बदलाव की बड़ी सारथी बनी हैं। पलामू जिले की कौड़िया पंचायत में एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से एडेंट संस्था द्वारा चलाई जा रही ग्राम सेवा परियोजना इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीणों को शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, आधुनिक पशु चिकित्सा, स्वरोजगार और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके गांव में ही मिल रहा है।
ग्रामीणों के द्वार पर सरकारी योजनाएं: 'ग्राम सेवा केंद्र' की भूमिका
पलामू के चुकरी गांव में इस परियोजना के तहत एक विशेष ग्राम सेवा केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इस केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके जरिए ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सटीक जानकारी दी जाती है। इतना ही नहीं, जो ग्रामीण पढ़े-लिखे नहीं हैं या जिन्हें तकनीकी समझ नहीं है, उनके लिए आवेदन फॉर्म भरने और अन्य जरूरी कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करने में यह केंद्र पूरी मदद करता है। पंचायत के पांच गांवों के लिए समर्पित ग्राम सेवक नियुक्त किए गए हैं। ये ग्राम सेवक सीधे ग्रामीणों के घरों तक जाते हैं, उनकी समस्याओं और रोजमर्रा की जरूरतों को समझते हैं और फिर उन समस्याओं की जानकारी संस्था तक पहुंचाते हैं ताकि उनका त्वरित समाधान किया जा सके।
'एसबीआई संजीवनी': घर-घर तक पहुंच रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं
इस परियोजना का एक और सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय पहलू है स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जा रहा कार्य। संस्था के प्रबंधक नितेश कुमार के अनुसार, क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एसबीआई संजीवनी नाम से एक चलता-फिरता अस्पताल (मोबाइल मेडिकल यूनिट) चलाया जा रहा है। यह वाहन रोजाना विभिन्न ग्रामीण इलाकों और टोलों में जाता है, जहां डॉक्टरों की टीम लोगों की घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करती है। ग्रामीणों को इस सेवा के तहत न केवल डॉक्टरों का मुफ्त परामर्श मिलता है, बल्कि जरूरी दवाइयां और बुनियादी जांच की सुविधाएं भी पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पहल से उन गरीब मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिली है, जो पैसों की कमी या अस्पताल दूर होने के कारण अपना इलाज कराने से कतराते थे।
'शालिहोत्र एक्सप्रेस': पशुपालकों के लिए बड़ी राहत
पलामू के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ-साथ पशुपालन भी आजीविका का एक मुख्य साधन है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए संस्था द्वारा शालिहोत्र एक्सप्रेस सेवा का संचालन किया जा रहा है। यह पशुओं के लिए एक समर्पित मोबाइल एम्बुलेंस सेवा की तरह काम करती है। पशुपालकों को बस एक फोन कॉल करना होता है और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस टीम सीधे उनके घर पहुंच जाती है। यहां बीमार पशुओं की जांच, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) और विभिन्न गंभीर बीमारियों का इलाज पूरी तरह से मुफ्त किया जाता है। अब पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं को लेकर मीलों दूर स्थित सरकारी पशु अस्पतालों या महंगे निजी डॉक्टरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत हो रही है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण और स्वरोजगार
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी यह परियोजना एक मील का पत्थर साबित हो रही है। गांव की महिलाओं और युवतियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई और ब्यूटीशियन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्यूटीशियन कोर्स के अंतर्गत महिलाओं को पेशेवर तरीके से आइब्रो बनाना, फेशियल करना, हेयर कटिंग, मेकअप और ब्यूटी पार्लर से जुड़ी तमाम बारीकियां और आधुनिक तकनीकें सिखाई जा रही हैं। इस प्रशिक्षण की सबसे खास बात यह है कि सीखने की अवधि के दौरान उपयोग होने वाली सभी जरूरी सामग्रियां भी महिलाओं को निशुल्क दी जाती हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं अपना खुद का ब्यूटी पार्लर या सिलाई केंद्र खोलकर सम्मानजनक स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। इसके साथ ही, देश की सेवा करने के इच्छुक स्थानीय युवाओं के लिए सेना और सुरक्षा बलों (फोर्स) में भर्ती की तैयारी हेतु विशेष शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
शिक्षा, पर्यावरण और कचरा प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव
'ग्राम सेवा परियोजना' केवल स्वास्थ्य और रोजगार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के स्तर को सुधारने में भी अहम भूमिका निभा रही है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने और गांवों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत नियमित रूप से कचरा संग्रह वाहन गांवों से कचरा इकट्ठा करता है। वहीं दूसरी ओर, शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने के उद्देश्य से क्षेत्र के तेलैयबंध मध्य विद्यालय को गोद लेकर उसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इस सरकारी स्कूल में अब बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब, आधुनिक साइंस लैब और स्मार्ट क्लास जैसी बेहतरीन डिजिटल सुविधाएं स्थापित की गई हैं, ताकि ग्रामीण बच्चे भी शहरों की तरह आधुनिक और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकें।
एसबीआई फाउंडेशन और एडेंट संस्था का यह संयुक्त प्रयास पलामू के ग्रामीण इलाकों में एक नए और आधुनिक विकास का माध्यम बन चुका है, जिससे ग्रामीणों की जिंदगी बेहद सुगम हो रही है।
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