सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने का झंझट खत्म: मोदी सरकार ने शिकायत निपटारे का समय किया आधा, जानें कैसे काम कर रहा है नया सिस्टम

मोदी सरकार के ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल CPGRAMS ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव लाया है, जिससे शिकायतों के समाधान का औसत समय 28 दिन से घटकर मात्र 14 दिन रह गया है।

भारत में अक्सर यह माना जाता रहा है कि सरकारी विभागों में किसी शिकायत का समाधान पाना एक बेहद जटिल और थका देने वाली प्रक्रिया है। लोगों को फाइलों के आगे बढ़ने, बाबुओं की मिन्नतें करने और बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब समय बदल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस पूरी व्यवस्था में एक क्रांतिकारी सुधार किया है। सरकारी शिकायत निवारण के लिए तैयार किए गए विशेष डिजिटल मंच ने प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यप्रणाली का चेहरा बदल दिया है। अब न केवल शिकायतों का तेजी से निपटारा हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों की दौड़ भी नहीं लगानी पड़ रही है।

शिकायतों के निपटारे में आई ऐतिहासिक तेजी

केंद्र सरकार का केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली यानी CPGRAMS अब देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है। सीएनएन-न्यूज18 को विशेष रूप से मिले हालिया आंकड़ों के अनुसार, यह सिस्टम अब हर साल लगभग 22 लाख शिकायतों का प्रबंधन कर रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतों के समाधान की गति में असाधारण सुधार हुआ है। साल 2019 में जहां किसी सरकारी शिकायत के निपटारे में औसतन 28 दिन का समय लगता था, वहीं जून 2026 में यह घटकर मात्र 14 दिन रह गया है। यानी अब शिकायतों का समाधान पहले की तुलना में आधे समय में, यानी करीब दो हफ्ते पहले ही हो रहा है।

इस पूरे बदलाव का सबसे स्पष्ट संकेत शिकायत निवारण के औसत समय में आई कमी से मिलता है, जो साल 2019 के 28 दिन से घटकर साल 2025 में 15 दिन रह गया और अब जून 2026 में यह और भी कम होकर 14 दिन पर आ गया है।

मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इस प्रणाली का पैमाना और भी स्पष्ट हो जाता है। अकेले जून 2026 में केंद्रीय सचिवालय ने करीब दो लाख शिकायतों का निपटारा किया है। यह लगातार 48वां महीना था जब मासिक आधार पर शिकायतों के निपटारे का आंकड़ा एक लाख की संख्या को पार कर गया। शिकायतों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बावजूद समाधान की यह तेज रफ्तार प्रशासनिक तत्परता का जीता-जागता उदाहरण है।

करोड़ों नागरिकों का भरोसा और लंबित मामलों का बदलता स्वरूप

सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में आए इस सुधार का ही परिणाम है कि नागरिकों का इस शिकायत निवारण प्रणाली पर भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। साल 2019 से लेकर अब तक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को CPGRAMS पोर्टल के माध्यम से 1 करोड़ से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बावजूद, लंबित मामलों की संख्या को नियंत्रित रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 के अंत तक केंद्रीय सरकार के पास केवल 78,793 शिकायतें ही लंबित थीं।

सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी इस व्यवस्था के माध्यम से बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त की हैं। 2019 से अब तक राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस प्रणाली के माध्यम से 50 लाख से अधिक शिकायतें मिली हैं, जिनमें से हालिया अवधि के अंत तक केवल लगभग 2 लाख मामले ही लंबित बचे थे। यदि केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तीनों के आंकड़ों को मिला दिया जाए, तो 2019 से लेकर अब तक CPGRAMS ने कुल 1.5 करोड़ से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।

इस पूरी व्यवस्था की एक और बड़ी खूबी यह है कि जो शिकायतें लंबित हैं, वे बहुत पुरानी नहीं हैं। जून 2026 तक केंद्रीय सचिवालय में जितने भी मामले लंबित थे, उनमें से 68 प्रतिशत शिकायतें 21 दिन से भी कम पुरानी थीं। इसका सीधा मतलब यह है कि सिस्टम में लंबे समय से अटके रहने वाले पुराने मामलों की संख्या बेहद कम है और जो मामले पेंडिंग दिख रहे हैं, वे हाल ही में दर्ज किए गए हैं। यह शिकायत निवारण को समयबद्ध बनाने के व्यापक और गंभीर प्रयासों का हिस्सा है।

डिजिटल क्रांति और ग्रामीण इलाकों तक आसान पहुंच

CPGRAMS पोर्टल की लोकप्रियता और पहुंच का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2025 में इस डिजिटल मंच पर कुल 7,43,533 नए उपयोगकर्ताओं ने अपना पंजीकरण कराया था। अकेले जून के महीने में ही 83,544 नए लोगों ने इस पोर्टल पर अपना खाता बनाया। पंजीकरण का यह सिलसिला साल 2026 में भी लगातार जारी है और इस साल अब तक दो लाख से अधिक नए उपयोगकर्ता इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं।

किसी भी डिजिटल सार्वजनिक सेवा के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उसकी पहुंच केवल उन लोगों तक सीमित न रहे जो तकनीकी रूप से सक्षम हैं। इस चुनौती को दूर करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC नेटवर्क की मदद ली जा रही है। यह नेटवर्क उन नागरिकों को शिकायत प्रणाली तक पहुंचने का एक मजबूत जरिया देता है जो ग्रामीण इलाकों में रहते हैं या जहां डिजिटल कनेक्टिविटी कम है। केवल जून 2026 में CSC के माध्यम से 6,262 शिकायतें दर्ज की गईं, जो इसकी उपयोगिता को दर्शाती हैं।

सिर्फ फाइलों का बंद होना नहीं, जनता की संतुष्टि है प्राथमिकता

सरकार का ध्यान केवल कागजी तौर पर शिकायतों का समाधान बताने पर ही नहीं है, बल्कि वह इस बात पर भी जोर दे रही है कि शिकायतकर्ता को वास्तव में राहत मिली है या नहीं। इसके लिए सरकार ने एक प्रभावी फीडबैक सिस्टम तैयार किया है। साल 2025 में CPGRAMS के तहत नागरिकों से 10.7 लाख से अधिक फीडबैक रिस्पॉन्स दर्ज किए गए।

इनमें से लगभग दो-तिहाई फीडबैक रिस्पॉन्स विशेष रूप से बनाए गए फीडबैक कॉल सेंटर के जरिए प्राप्त किए गए। यह कदम इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सिर्फ फाइलों में शिकायतों को बंद कर देने और नागरिकों की समस्या का असल में हल होने में बड़ा अंतर होता है। नागरिकों के सीधे फीडबैक से यह अतिरिक्त मापदंड मिलता है कि संबंधित विभाग द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक था या नहीं। कुल मिलाकर, यह पूरा सिस्टम अब सरकारी जवाबदेही का एक नया मानक स्थापित कर रहा है।

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