पढ़ाई के कमरे में वास्तु का महत्व
आज के दौर में हर माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। महंगे निजी स्कूलों से लेकर कोचिंग और आधुनिक डिजिटल उपकरणों पर अभिभावक हजारों रुपये खर्च करते हैं। हालांकि, इस दौड़ में अक्सर एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बात छूट जाती है, जो सीधे तौर पर बच्चे की एकाग्रता और सीखने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह है बच्चों के स्टडी रूम का वास्तु और वहां का वातावरण। जानकारों का मानना है कि कमरे की सही दिशा, रोशनी और रंगों का तालमेल बच्चे की मानसिक एकाग्रता को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
स्टडी रूम के लिए शुभ रंग
अंबाला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, स्टडी रूम की दीवारों पर रंगों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। सही रंग का चुनाव बच्चे की बुद्धि और याददाश्त को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। वास्तु के अनुसार निम्नलिखित रंग सबसे प्रभावी माने गए हैं:
- सफेद रंग: यह रंग मस्तिष्क में स्पष्टता लाता है और एकाग्रता को बढ़ाने का कार्य करता है।
- क्रीम रंग: यह रंग कमरे में शांति और संतुलन बनाए रखने में मददगार होता है।
- हल्का पीला रंग: इसे सीखने की क्षमता और स्मृति को तेज करने वाला माना गया है।
- हल्का हरा रंग: यह आंखों को आराम देने के साथ-साथ पढ़ाई के दौरान होने वाले तनाव को कम करता है।
- आसमानी रंग: यह मन को शांत रखता है और बच्चे में रचनात्मक सोच को विकसित करने में सहायक है।
किन रंगों से बचना चाहिए?
पंडित दीपलाल जयपुरी चेतावनी देते हैं कि स्टडी रूम में बहुत गहरे या चटकीले रंगों का उपयोग करने से बचना चाहिए। ऐसे रंग बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटका सकते हैं और कमरे के ऊर्जा स्तर को असंतुलित कर सकते हैं। एक शांत और संयमित वातावरण ही बच्चे को लंबे समय तक ध्यान लगाकर पढ़ने में मदद करता है।
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