देश में जाति जनगणना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए दोनों नेताओं ने जाति जनगणना की वर्तमान प्रक्रिया और प्रश्नावली पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्तमान प्रश्नावली को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और जातियों की एक प्रमाणित तथा पूर्व-निर्धारित सूची तैयार कर नए सिरे से फॉर्म तैयार किया जाए।
खुले सवालों से आंकड़ों के बिखरने का खतरा
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि खुले प्रश्नों यानी ओपन-एंडेड सवालों के माध्यम से देश में जातियों की सही और सटीक गिनती कर पाना पूरी तरह असंभव है। जब जनगणना कर्मी लोगों से सीधे उनकी जाति पूछेंगे और बिना किसी प्रमाणित सूची के उसे वैसे ही दर्ज कर लेंगे, तो इससे भारी भ्रम की स्थिति पैदा होगी।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, इसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह होगा कि एक ही जाति के कई अलग-अलग नाम और उपजातियां रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएंगी। इससे जनगणना के आंकड़े पूरी तरह से बिखर जाएंगे और सरकार के पास कोई स्पष्ट डेटा नहीं बचेगा। इस अव्यवस्थित आंकड़े का सीधा नुकसान देश के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अति पिछड़े और समाज के अन्य वंचित समुदायों को उठाना पड़ेगा।
लाखों नई जातियों की सूची बनने की आशंका
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने विस्तार से समझाया है कि भारत जैसे विविध देश में सामाजिक न्याय की नीतियां मजबूत और सटीक आंकड़ों के बिना जमीन पर नहीं उतारी जा सकती हैं। उन्होंने लिखा कि देश की विभिन्न जातियों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती वैज्ञानिक और त्रुटिहीन तरीके से हो।
पत्र में सरकार की वर्तमान कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लिखा गया है कि सरकार ने जनगणना में जाति से जुड़ा जो खुला सवाल रखने का फैसला किया है, वह काफी भ्रामक है। इसके तहत जनगणना कर्मी के पूछने पर कोई भी व्यक्ति अपनी जाति का जो भी नाम बताएगा, उसे वैसा का वैसा ही फॉर्म में लिख लिया जाएगा।
इस प्रक्रिया की खामियों को उजागर करते हुए पत्र में कहा गया है:
भारत में सामाजिक और क्षेत्रीय विविधताओं के कारण एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों, उपजातियों तथा स्थानीय बोलियों में जानी जाती है। यदि जनगणना में हर व्यक्ति के मुंह से निकले नाम को ही अंतिम मानकर दर्ज किया गया, तो एक ही जाति हजारों अलग-अलग श्रेणियों में बंट जाएगी। इसके परिणामस्वरूप देश में लाखों नई जातियों की सूची बन जाएगी, जिसका कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं रह जाएगा।
ऐसी स्थिति में पूरी जाति जनगणना का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा और इससे प्राप्त होने वाला सारा डेटा अनुपयोगी साबित होगा। जब किसी विशेष समुदाय की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा ही उपलब्ध नहीं होगा, तो उनके कल्याण के लिए बनाई जाने वाली योजनाएं भी निष्प्रभावी हो जाएंगी। इसका सीधा असर शिक्षा, नौकरियों और सामाजिक न्याय से जुड़ी सरकारी नीतियों पर पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं ने यह भी रेखांकित किया कि इस जनगणना प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग शब्द तक को शामिल नहीं किया गया है, जिससे ओबीसी आबादी की सही गिनती प्रभावित होगी।
ड्रॉप-डाउन सूची का विकल्प और बिहार-तेलंगाना का उदाहरण
इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस नेताओं ने पत्र में एक बेहद व्यावहारिक समाधान भी सुझाया है। उनका कहना है कि सरकार को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की तरह ही अन्य जातियों के लिए भी एक ड्रॉप-डाउन विकल्प की व्यवस्था करनी चाहिए।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- पूर्व-निर्धारित सूची का निर्माण: सरकार देश में पहले से मौजूद आधिकारिक सूचियों, जैसे सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग की सूचियों तथा भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के दस्तावेजों का उपयोग करके जातियों की एक प्रमाणित सूची तैयार कर सकती है।
- ड्रॉप-डाउन विकल्प का उपयोग: ऑनलाइन या डिजिटल फॉर्म में जातियों की इस सूची को ड्रॉप-डाउन विकल्प के रूप में शामिल किया जाए, जिससे जनगणना कर्मी आसानी से सही विकल्प चुन सकें।
- क्षेत्रीय स्तर पर सत्यापन: अलग-अलग राज्यों की स्थानीय सूचियों के आधार पर जाति के नामों का मिलान किया जाए ताकि कोई भी विसंगति न रहे।
पत्र में बिहार और तेलंगाना राज्यों में हाल ही में कराए गए जाति सर्वेक्षणों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इन दोनों राज्यों ने पहले से तैयार और प्रमाणित जाति सूचियों के आधार पर ही अपनी गणना को सफलतापूर्वक पूरा किया था। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की सुविधा और संदर्भ के लिए बिहार और तेलंगाना के सर्वेक्षणों की जाति सूचियां भी इस पत्र के साथ संलग्न की हैं।
वर्तमान प्रारूप को स्वीकार करने से कांग्रेस का इनकार
पत्र के अंत में कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्तमान तौर-तरीकों के साथ की जाने वाली जाति जनगणना को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी। उनका कहना है कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को केवल खानापूर्ति के लिए नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसका सटीक और सार्थक होना अत्यंत आवश्यक है।
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार तुरंत इस त्रुटिपूर्ण प्रश्नावली को वापस ले। इसके बाद सरकार सभी राजनीतिक दलों, विषय विशेषज्ञों और आम जनता के साथ व्यापक विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करे। इस चर्चा के आधार पर ही एक ऐसी सर्वमान्य प्रश्नावली और वैज्ञानिक पद्धति तैयार की जानी चाहिए जिससे देश के हर समुदाय और जाति की सटीक संख्या सामने आ सके। तभी जाकर देश में वास्तविक सामाजिक न्याय की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
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