पटना में नकली शराब बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश, छापेमारी में संचालक गिरफ्तार और परिसर सील

बिहार की राजधानी पटना के ट्रांसपोर्ट नगर में मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली शराब बनाने की एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है और इसके संचालक को गिरफ्तार कर लिया है।

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद भी अवैध रूप से शराब की तस्करी और उसके निर्माण के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। शराब माफिया कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए नए नए तरीके अपना रहे हैं। इसी कड़ी में राजधानी पटना से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली शराब बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यह अवैध कारोबार पटना के एक बेहद व्यस्त इलाके में धड़ल्ले से चलाया जा रहा था।

ट्रांसपोर्ट नगर में चल रही अवैध फैक्ट्री पर छापा

पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में यह अवैध धंधा चल रहा था। मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग की टीम को इस संबंध में गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद विभाग की एक विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित संदिग्ध परिसर में छापेमारी की। जब टीम वहां पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके पर बड़े पैमाने पर नकली शराब तैयार करने की गतिविधियां चल रही थीं और इससे जुड़े साक्ष्य बिखरे पड़े थे। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद सभी सामग्रियों को जब्त कर लिया और नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे इस पूरे परिसर को सील कर दिया।

विभागीय कार्रवाई और संचालक की गिरफ्तारी

इस सफल छापेमारी के बारे में मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त प्रेम प्रकाश ने विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्रवाई उनके निर्देश पर की गई थी। इस छापेमारी अभियान का नेतृत्व विभाग के निरीक्षक अजीत कुमार कर रहे थे, जिन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर इस अवैध कारखाने का पर्दाफाश किया। छापेमारी के दौरान मौके से फैक्ट्री के संचालक को हिरासत में लिया गया, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान बादल कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नालंदा जिले के सिलाव का रहने वाला है।

पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी विभाग की टीम

सहायक आयुक्त प्रेम प्रकाश ने स्पष्ट किया कि संचालक की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले की जांच को तेज कर दिया गया है। विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध धंधे के पीछे और कौन कौन से चेहरे शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि सिलाव निवासी बादल कुमार के साथ इस पूरे नेटवर्क में और कौन से लोग जुड़े हुए थे। इसके साथ ही, इस अवैध कारखाने से नकली शराब की सप्लाई कहां कहां की जा रही थी और इसे तैयार करने के लिए कच्चा माल कहां से लाया जा रहा था, इन सभी बिंदुओं पर गहनता से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और शराबबंदी पर उठते बड़े सवाल

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर राज्य में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, तो राजधानी पटना के इतने व्यस्त और व्यापारिक इलाके जैसे ट्रांसपोर्ट नगर में नकली शराब बनाने की फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी। इतने लंबे समय तक इस अवैध कारोबार की भनक स्थानीय प्रशासन या पुलिस को क्यों नहीं लगी, यह भी एक बड़ा चिंता का विषय है। फिलहाल मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और इस मामले में शामिल सभी अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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