चीन का नया हाइपरसोनिक अस्त्र, 8000 किमी दूर से अमेरिकी विमानों को करेगा ढेर

चीन ने एक ऐसी घातक हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित कर ली है, जो 8000 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमानों को अपना निशाना बना सकती है। इस तकनीक ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि यह अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए बड़ा खतरा है।

चीन की नई मिसाइल तकनीक से बढ़ी वैश्विक चिंता

दुनिया भर में जारी हथियारों की दौड़ में चीन ने एक और खतरनाक मुकाम हासिल कर लिया है। अमेरिका द्वारा 1700 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल विकसित करने के जवाब में चीन ने अब एक ऐसा अस्त्र पेश किया है, जिसने वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों और डोनाल्ड ट्रंप की नींद उड़ा दी है। चीन की यह नई मिसाइल तकनीक हवा में उड़ रहे विमानों को 8000 किलोमीटर की दूरी से ही अपना निशाना बनाने में सक्षम है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया में हथियारों की सीमित होड़ की बातें हो रही थीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। आज हर देश अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए घातक से घातक हथियार बनाने की दौड़ में लगा है।

अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मंडराया खतरा

चीन और अमेरिका के बीच चल रही यह सैन्य प्रतिस्पर्धा अब एक नए स्तर पर पहुंच गई है। चीन द्वारा विकसित किए गए ये हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) लंबी दूरी तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागने की ताकत रखते हैं। इसकी मारक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी जद में अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डे तक आ रहे हैं। अगर भविष्य में चीन और अमेरिका के बीच कोई सैन्य टकराव होता है, तो अमेरिकी वायुसेना के हवाई अभियानों के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। चीन के इन हथियारों का मुख्य लक्ष्य लड़ाकू विमानों के साथ-साथ वे विमान हो सकते हैं जो सैन्य अभियानों को पीछे से सहयोग प्रदान करते हैं। इनमें हवाई निगरानी करने वाले विमान, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर और उड़ते हुए कमांड सेंटर प्रमुख रूप से शामिल हैं।

हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल की कार्यप्रणाली

हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) एक ऐसा उन्नत हथियार है जिसे पहले एक मिसाइल की मदद से निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद यह अत्यधिक तेज गति से वातावरण के भीतर आगे बढ़ता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि उड़ान के दौरान यह अपनी दिशा बदलने में सक्षम है। दिशा बदलने की इस क्षमता के कारण इसे बीच रास्ते में रोक पाना दुश्मन के लिए अत्यंत कठिन हो जाता है, जिससे इसकी मारक क्षमता और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है।

मिसाइलों की मारक रेंज और सामरिक ताकत

चीन की DF-17 मिसाइल से लॉन्च किया गया हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन लगभग 2414 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। यह मारक क्षमता चीन से अमेरिकी क्षेत्र गुआम तक पहुंचने के लिए पर्याप्त है, जहां अमेरिका का एक बड़ा और महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है। वहीं, चीन की DF-27 मिसाइल की रेंज करीब 5000 मील बताई गई है, जो हवाई तक पहुंचने के लिए सक्षम मानी जाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे एक लंबी किल चेन करार दिया है, जिसमें दूर स्थित सेंसरों से प्राप्त जानकारी को मिसाइल तक पहुंचाने की जटिल प्रक्रिया शामिल है। हालांकि दुश्मन इस संचार व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर सकता है, लेकिन यह कार्य बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। इस खतरे की सूची में अमेरिकी वायुसेना का E-4B Nightwatch विमान भी शामिल है, जिसे हवा में उड़ने वाला कमांड पोस्ट माना जाता है।

चीन के मिसाइल भंडार में भारी वृद्धि

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुमानों पर गौर करें तो चीन के हथियारों के जखीरे में पिछले कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार चीन के पास कम से कम 3150 बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 300 जमीन से लॉन्च की जाने वाली क्रूज मिसाइलें मौजूद थीं। यदि हम साल 2015 से इसकी तुलना करें, तो चीन के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार में करीब 147 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। चीन के साथ-साथ अमेरिका भी अब लंबी दूरी तक मार करने वाली हवा से हवा में मिसाइल विकसित करने पर तेजी से काम कर रहा है। यह साफ है कि आने वाले समय में हवाई युद्ध की रणनीति में लंबी दूरी के हथियार और दुश्मन के सपोर्ट सिस्टम को नष्ट करने की क्षमता निर्णायक भूमिका निभाने वाली है।

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