राहुल गांधी के बयानों का दौर और पीएम मोदी की कूटनीति
राजनीतिक गलियारों में इस समय दो अलग अलग ध्रुव देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ राहुल गांधी हैं, जो अपने बयानों के कारण लगातार विवादों के घेरे में हैं। राहुल गांधी के मंच से हाल ही में मेलोनी के अपमान को लेकर उपजे विवाद ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। इस डैमेज कंट्रोल के लिए राहुल गांधी ने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की और महिला सम्मान के साथ साथ मनुस्मृति जैसे मुद्दों को उठाया, लेकिन ये दांव भी उनके लिए उल्टा पड़ गया और वे और अधिक फंसते नजर आए।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से देश की विदेश नीति और आर्थिक मोर्चे को मजबूत करने में जुटे हैं। जहां एक ओर राहुल गांधी राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिशों में उलझे हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने एक व्यापक ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम के जरिए दुनिया भर में भारत का प्रभाव बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।
टीम मोदी का वैश्विक दौरा: क्यों अहम है ये कदम?
प्रधानमंत्री मोदी ने एक सोची समझी रणनीति के तहत अपनी टीम को अलग अलग देशों में मोर्चा संभालने के लिए भेजा है। इस कूटनीतिक सक्रियता का मुख्य मकसद भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। वर्तमान में जो महत्वपूर्ण दौरे हो रहे हैं, उनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का चीन दौरा।
- विदेश मंत्री एस जयशंकर का रूस दौरा।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का अमेरिका और कनाडा का प्रस्तावित दौरा।
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का 200 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान दौरा।
इसके अलावा अर्जेंटीना, चिली और ब्राजील जैसे देशों के साथ भी भारत अपने संबंधों को और गहरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
चीन में अजित डोभाल की अहम यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को चीन भेजा है। यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगले महीने भारत में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन होना है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की चर्चाएं हैं। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। डोभाल का दौरा इस यात्रा के लिए एक सकारात्मक वातावरण तैयार करने की कोशिश है।
अजित डोभाल वहां चीन के विदेश मंत्री के निमंत्रण पर पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता होगी, जिसमें सीमा विवाद को सुलझाने, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने और तनाव कम करने पर चर्चा की जाएगी। द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बातचीत का एजेंडा तय है।
रूस और भारत के प्रगाढ़ होते संबंध
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस का दौरा किया है, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का विशेष संदेश पुतिन को सौंपा और उन्हें भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। राष्ट्रपति पुतिन ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों को रेखांकित करते हुए किर्गिस्तान में होने वाली एससीओ बैठक में उनसे मिलने की इच्छा जताई है।
पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और रूस के बीच व्यापार में लगातार तेजी आ रही है और 2025 में आई मामूली गिरावट के बाद इस साल व्यापार का स्तर फिर से बढ़ा है। उन्होंने इस प्रगति के लिए प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत रुचि को सराहा है।
जापान और निवेश का लक्ष्य
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 200 सदस्यीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान में हैं। भारत के लिए जापान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत है। इस यात्रा का उद्देश्य अगले 10 वर्षों में भारत में 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश के लक्ष्य को प्राप्त करना है। प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, इस्पात, स्वास्थ्य देखभाल और स्टार्टअप सेक्टर से जुड़े प्रमुख लोग शामिल हैं, जो भारत की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने के लिए काम करेंगे।
अमेरिका, कनाडा और लैटिन अमेरिका के साथ नई रणनीतियां
व्यापार और निवेश की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 26 और 27 अगस्त को कनाडा का दौरा करेंगी। इसके बाद वे जी20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाएंगी। भारत दक्षिण अमेरिका के व्यापार ब्लॉक मरकोसुर के साथ भी ट्रेड एग्रीमेंट की प्रक्रिया में है। इस ब्लॉक में अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और बोलीविया जैसे देश शामिल हैं। इन देशों के साथ व्यापारिक समझौते का एक बड़ा उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना और भारत के लिए नए बाजार खोलना है।
बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था की मजबूती
भारत की अर्थव्यवस्था के संदर्भ में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय बैंक अपनी सबसे अच्छी स्थिति में हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार:
- किसी भी सूचीबद्ध बैंक का नेट एनपीए 1 प्रतिशत से अधिक नहीं है।
- कुल एनपीए में पिछले वर्ष की तुलना में 11.76 प्रतिशत की कमी आई है।
- नेट एनपीए की राशि घटकर 84,293 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल से 9.51 प्रतिशत कम है।
- संभावित नुकसान के लिए बैंकों को अलग रखी जाने वाली राशि में 41.61 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है, जो अब 25,448 करोड़ रुपये पर है।
- बैंकिंग उद्योग का कुल नेट प्रॉफिट 19.01 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक नींव न केवल मजबूत हुई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की विश्वसनीयता भी तेजी से बढ़ी है।
https://hindi.news18.com/news/nation/why-pm-modi-suddenly-sent-four-key-ministers-including-ajit-doval-and-s-jaishankar-to-china-us-russia-and-japan-sushant-sinha-desh-ki-pathshala-10779024.html