जयपुर में अक्षय ऊर्जा की नई बयार
भारत में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और नई परियोजनाओं को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू हो गया है। इसी दिशा में 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' का पहला रोड-शो राजस्थान की राजधानी जयपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जयपुर के आईटीसी शेरेटन होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग जगत और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के तमाम बड़े साझेदार एकजुट हुए। दिल्ली के भारत मंडपम में 2 से 5 नवंबर के बीच होने वाले मुख्य समिट की तैयारियों के तहत, देश के अलग-अलग राज्यों में इस तरह के रीजनल रोड-शो आयोजित किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य क्लीन एनर्जी सेक्टर से जुड़े निवेशकों, विशेषज्ञों और भागीदारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
राजस्थान की अहमियत और सोलर पावर
जयपुर को रोड-शो की शुरुआत के लिए चुनने का कारण काफी स्पष्ट है। अक्षय ऊर्जा, विशेषकर सौर और पवन ऊर्जा के मामले में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। प्रदेश में वर्तमान में बड़े स्तर पर सौर और पवन ऊर्जा की कई परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। आने वाले समय में इस क्षेत्र में निवेश की असीम संभावनाएं देखते हुए राजस्थान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कार्यक्रम में नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के संयुक्त सचिव राजेश कुलहरि ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने देश में अक्षय ऊर्जा के वर्तमान परिदृश्य और भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला। भारत का स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक 500 GW की नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता विकसित की जाए और इस बड़े लक्ष्य की प्राप्ति में राजस्थान एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
75 देशों के प्रतिनिधियों का महाकुंभ
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' महज एक आयोजन नहीं बल्कि इसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के रूप में देखा जा रहा है। इस भव्य समिट में 20 से अधिक राज्य सरकारों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, दुनिया के 75 देशों से प्रतिभागी इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुंचेंगे। इसके अलावा, आयोजन में 250 से ज्यादा उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिट भारत और अन्य देशों के बीच क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में आपसी सहयोग और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक बड़ा माध्यम बनेगा।
सम्मेलन की रूपरेखा और मुख्य विषय
इस आगामी समिट के दौरान 80 से अधिक विशेष सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें करीब 500 से अधिक वक्ता अपने विचार साझा करेंगे। इन सत्रों में अक्षय ऊर्जा के भविष्य, निवेश की संभावनाओं, अत्याधुनिक तकनीकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। सम्मेलन की मुख्य थीम में ग्रीन हाइड्रोजन, नेटवर्किंग और अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उद्देश्य साफ है कि भारत किस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा सकता है।
300 GW का आंकड़ा पार
भारत ने अपनी अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 300 GW के आंकड़े को पार कर लिया है। अब सरकार की पूरी नजर 2030 तक 500 GW के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने पर है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारी निवेश, नई परियोजनाओं और विश्व स्तरीय आधुनिक तकनीक की आवश्यकता है। इसीलिए, भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट को पूरे क्षेत्र के लिए एक निर्णायक मंच माना जा रहा है। जयपुर में हुए इस रोड-शो में सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच निवेश के संभावित रास्तों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
एग्जीबिटर्स और प्रदर्शनी का आकर्षण
मुख्य समिट में 400 से ज्यादा एग्जीबिटर्स अपनी तकनीक और समाधानों का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा, 25 से ज्यादा नॉलेज पार्टनर्स भी इस आयोजन का अभिन्न हिस्सा होंगे। प्रदर्शनी का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा से जुड़े नए उत्पादों और तकनीकों को सबके सामने लाना है ताकि कंपनियां, निवेशक और विशेषज्ञ आपस में सीधे संपर्क स्थापित कर सकें। जयपुर में आयोजित हुआ यह रोड-शो उसी वृहद आयोजन की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सरकार की रणनीति है कि अलग-अलग राज्यों में फैले क्लीन एनर्जी उद्योग और निवेशकों को पहले ही एक मंच पर लाकर एकजुट किया जाए ताकि नवंबर में दिल्ली में होने वाला आयोजन एक बड़ी सफलता सिद्ध हो सके।
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