संघर्ष से सफलता की नई कहानी
जीवन की राहें हमेशा सीधी नहीं होतीं, लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। रामथुल्ला शेख की प्रेरणादायक यात्रा इसका जीता-जागता सबूत है। आंध्र प्रदेश के एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले रामथुल्ला ने आर्थिक तंगी के दिनों में कूली के तौर पर काम किया और एक दिन के मात्र 300 रुपये कमाए थे। आज वही युवक नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) में शोध कार्य कर रहा है, जो दुनिया के सबसे बेहतरीन शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। उनकी कहानी उन तमाम छात्रों के लिए एक मिसाल है जो अक्सर यह मान लेते हैं कि आर्थिक स्थितियां उनके सपनों में सबसे बड़ी बाधा हैं।
शिक्षा की शुरुआती नींव
रामथुल्ला की पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत आंध्र प्रदेश के स्थानीय जिला परिषद हाई स्कूल से हुई। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने विज्ञान वर्ग यानी गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान के साथ ससीकांत रेड्डी जूनियर कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का रुख किया, जहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक (BTech) की डिग्री हासिल की। वर्ष 2021 में अपनी इंजीनियरिंग पूरी करने तक उनका अकादमिक प्रदर्शन शानदार रहा और उनका स्कोर 8.9/10 रहा। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी पढ़ाई से मुंह नहीं मोड़ा और न ही अपने लक्ष्यों को धुंधला होने दिया।
कॉर्पोरेट नौकरी के साथ जारी रखा सपना
बीटेक के बाद रामथुल्ला ने फरवरी 2022 में एक प्रतिष्ठित कंपनी के साथ सिस्टम इंजीनियर के रूप में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया। कॉर्पोरेट दुनिया का दबाव और दफ्तर की जिम्मेदारी के बावजूद उनके भीतर उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा प्रबल थी। उन्होंने अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकाला और देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक, ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) की तैयारी शुरू कर दी। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनकी अटूट मेहनत का परिणाम वर्ष 2024 में सामने आया, जब उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ऑल इंडिया रैंक 809 हासिल की।
IISc बेंगलुरु और शैक्षणिक जिम्मेदारियां
गेट में मिली सफलता ने उनके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु के दरवाजे खोल दिए। यहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एमटेक (MTech) में प्रवेश लिया। आईआईएससी में बिताया गया समय उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने एनालॉग इंटीग्रेटेड सर्किट डिजाइन और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल विषयों में गहरी रुचि दिखाई। रामथुल्ला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने संस्थान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाईं। उन्होंने पावर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला, कंट्रोल सिस्टम्स डिजाइन कोर्स और एसएमपीसी लैब में टीचिंग असिस्टेंट के तौर पर काम किया। इसके अलावा, उन्होंने प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर की अहम जिम्मेदारी को भी बखूबी संभाला। जून 2026 में उन्होंने सफलतापूर्वक अपना एमटेक पूरा किया।
15 लाख के ऑफर को ठुकराकर चुना रिसर्च
रामथुल्ला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब गेट की शानदार रैंक और आईआईएससी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें नौकरी के कई बड़े प्रस्ताव मिले। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों से सालाना 15 लाख रुपये के वेतन पैकेज का ऑफर मिला था। हालांकि, रामथुल्ला ने कॉर्पोरेट नौकरी की चकाचौंध को छोड़कर ज्ञान और अनुसंधान (Research) की राह चुनी। उनका मानना है कि करियर का असली उद्देश्य केवल धन कमाना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में योगदान देना भी है।
सिंगापुर में पीएचडी का नया पड़ाव
अपने शोध के प्रति जुनून के चलते उन्होंने अगस्त 2026 में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में पीएचडी स्कॉलर के तौर पर नया अध्याय शुरू किया। आज वे पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर रहे हैं। मजदूरी से शुरू हुआ उनका सफर आज एक अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता तक पहुंच गया है। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा में निरंतर प्रयास किया जाए, तो परिस्थितियों का रोना रोने के बजाय सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। रामथुल्ला की कहानी आज देश भर के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है।
https://hindi.news18.com/news/career/jobs-linkedin-success-story-of-ramthulla-shaik-gate-2024-air-809-mtech-from-iisc-now-studies-phd-in-nus-national-university-of-singapore-10778327.html