डोनाल्ड ट्रंप के दूत बनकर ईरान पहुंचे पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर, इसी दौरान सऊदी तेल टैंकर पर हुआ हमला

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए तेहरान पहुंचे हैं, जबकि दूसरी ओर लाल सागर में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है।

तेहरान में कूटनीति और समुद्र में अशांति

एक ओर जहां मध्य-पूर्व में तनाव को कम करने के कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा के हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर इन दिनों तेहरान के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत की भूमिका निभा रहे हैं। मुनीर का मुख्य उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लाना और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को शांत करना है। हालांकि, इसी संवेदनशील समय के बीच सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर हमले की खबर ने पूरे क्षेत्र में खलबली मचा दी है।

ट्रंप की पहल और मुनीर की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में हैं, लेकिन उससे पहले वे कूटनीतिक मार्ग अपनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से फोन पर विस्तार से चर्चा की थी। पाकिस्तान के तीन अलग-अलग सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह कॉल ट्रंप की तरफ से की गई थी। इस बातचीत का सबसे प्रमुख एजेंडा ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करना था। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान ईरान के साथ अपने प्रभाव का उपयोग करे ताकि ईरान को फिर से संवाद के लिए राजी किया जा सके।

सऊदी टैंकर पर रहस्यमय हमला

एक तरफ जहां कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, वहीं लाल सागर के तट के करीब सऊदी अरब के एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने जानकारी दी है कि इस टैंकर पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिसके बाद जहाज के मुख्य डेक पर भीषण आग लग गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह घटना सऊदी अरब के यानबू शहर से लगभग 116 किलोमीटर पश्चिम में घटित हुई। यानबू लाल सागर के तट पर स्थित है, जो यमन से कई सौ किलोमीटर की दूरी पर है।

हमले की प्रकृति और अनिश्चितता

ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी वैनगार्ड टेक ने दावा किया है कि जहाज को मिसाइल के जरिए निशाना बनाया गया था। हालांकि, UKMTO ने अभी तक इसे केवल एक प्रोजेक्टाइल हमले के रूप में ही चिन्हित किया है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस हमले के पीछे कोई अटैक ड्रोन था या मिसाइल का उपयोग किया गया था। फिलहाल इस बात की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है कि इस हमले के पीछे कौन सा संगठन या देश शामिल है।

हूती विद्रोहियों का बढ़ता खतरा

इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी समूह ने नहीं ली है, लेकिन यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के चलते संदेह की सुई उन्हीं की तरफ घूम रही है। पिछले कुछ हफ्तों से हूती विद्रोही सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और उनके महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की बार-बार चेतावनी दे रहे थे। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव अपने चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के हमले जारी रहते हैं, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने के सभी प्रयास विफल हो सकते हैं।

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