इजरायल में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, केरल उपभोक्ता आयोग ने लगाया 2 लाख रुपये का हर्जाना, पूरे पैसे लौटाने का दिया आदेश

केरल में इजरायल में नौकरी दिलाने के नाम पर 3.7 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित जोसेफ मैनुअल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दोषियों को भारी हर्जाने के साथ पूरी रकम वापस करने का आदेश दिया है।

विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला केरल से सामने आया है, जहां इजरायल में नौकरी दिलाने का झूठा वादा करके एक व्यक्ति से लाखों रुपये ठग लिए गए। इस मामले में पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए केरल के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने धोखाधड़ी करने वाले दो लोगों को आदेश दिया है कि वे पीड़ित को न केवल उनकी पूरी रकम वापस करें, बल्कि मानसिक प्रताड़ना और वित्तीय नुकसान के मुआवजे के रूप में भारी जुर्माना भी भरें।

यह पूरा मामला जोसेफ मैनुअल नाम के व्यक्ति से जुड़ा है, जो इजरायल में रोजगार पाकर अपने परिवार का भविष्य संवारना चाहते थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि नौकरी का यह सुनहरा अवसर उनके लिए मानसिक तनाव और आर्थिक बर्बादी का सबब बन जाएगा। अब उपभोक्ता आयोग के फैसले से उन्हें एक बड़ी राहत मिली है।

नौकरी दिलाने का झांसा और लाखों रुपये की ठगी

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जोसेफ मैनुअल ने साल 2022 में दो लोगों से संपर्क किया था। इन दोनों आरोपियों के नाम रेजी सी वर्की (जो बैगल हॉलिडेज नाम की एजेंसी के मालिक हैं) और प्रीता एलेक्स हैं। इन दोनों ने जोसेफ को विश्वास दिलाया कि वे उन्हें महज तीन महीने से लेकर एक साल के भीतर इजरायल में एक अच्छी नौकरी दिलवा देंगे।

आरोपियों ने जोसेफ के सामने दावा किया कि उनके पास विदेशी रोजगार, वीजा प्रोसेसिंग, दस्तावेजीकरण और यात्रा संबंधी सभी व्यवस्थाएं पूरी करने का लंबा अनुभव और पुख्ता इंतजाम हैं। जोसेफ उनकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ गए और उन पर भरोसा कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने प्रोसेसिंग फीस, प्लेसमेंट शुल्क और सर्विस चार्ज के नाम पर जोसेफ से कुल 3.7 लाख रुपये ऐंठ लिए।

इस भुगतान का विवरण भी काफी स्पष्ट था। जोसेफ ने अपने बैंक खाते से 2.2 लाख रुपये सीधे रेजी सी वर्की के खाते में ट्रांसफर किए। वहीं, बाकी बचे 1.5 लाख रुपये प्रीता एलेक्स के खाते में भेजे गए। उपभोक्ता आयोग के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, शुरुआत के दो भुगतान, जिनमें पहला भुगतान 1 लाख रुपये का और दूसरा 50 हजार रुपये का था, प्रीता की बेटी शिल्पा मैरी के बैंक खाते में जमा कराए गए थे।

फ्लाइट की तारीखों का खेल और फर्जी हवाई टिकट

पैसे लेने के बाद आरोपियों का असली खेल शुरू हुआ। साल 2022 से लेकर 2023 के बीच रेजी और प्रीता ने जोसेफ को इजरायल भेजने के लिए कई तारीखें दीं। वे हर बार जोसेफ को बताते थे कि उनकी फ्लाइट का टिकट बुक हो गया है और वे इस तारीख को उड़ान भरने वाले हैं। लेकिन जब भी तय तारीख नजदीक आती, आरोपी कोई न कोई बहाना बनाकर यात्रा को स्थगित या रद्द कर देते थे। कई महीनों तक यह सिलसिला लगातार चलता रहा।

एक बार तो आरोपियों ने हद ही पार कर दी। उन्होंने जोसेफ को बकायदा हवाई जहाज की टिकटें भेजीं और दावा किया कि उनका फ्लाइट रिजर्वेशन पूरी तरह से कन्फर्म हो चुका है। जोसेफ अपनी तैयारी करके खुश थे, लेकिन अंतिम समय पर उस टिकट को भी रद्द बता दिया गया। जब जोसेफ ने खुद इस मामले की गहराई से जांच की और एयरलाइन से संपर्क किया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह टिकट पूरी तरह से फर्जी था और आरोपियों ने जोसेफ के लिए कभी कोई फ्लाइट बुक ही नहीं की थी।

इसके बाद, अक्टूबर 2023 में इजरायल में संघर्ष शुरू हो गया। आरोपियों ने इस अंतरराष्ट्रीय स्थिति का फायदा उठाया और जोसेफ को बताया कि वहां युद्ध छिड़ जाने के कारण फिलहाल नौकरी दिलवाना संभव नहीं है। हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने जोसेफ को कई नई तारीखें दीं और फिर उन्हें टालते रहे। परेशान होकर जब जोसेफ सीधे आरोपियों के घर पहुंचे, तो उन्हें फिर से एक नई तारीख थमा दी गई, जो बाद में फिर बदल दी गई। आखिरकार, आरोपियों ने जोसेफ के फोन कॉल और संदेशों का जवाब देना पूरी तरह से बंद कर दिया। उन्होंने न तो जोसेफ को नौकरी दी और न ही उनका पैसा लौटाया।

उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया

जब जोसेफ को समझ आ गया कि उनके साथ पूरी तरह से धोखाधड़ी हुई है, तो उन्होंने न्याय पाने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई के 3.7 लाख रुपये वापस पाने और इस प्रताड़ना के खिलाफ मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की।

आयोग ने जोसेफ की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए 3 मार्च 2026 को दोनों आरोपियों रेजी सी वर्की और प्रीता एलेक्स को नोटिस जारी कर पेश होने का आदेश दिया। लेकिन दोनों में से कोई भी व्यक्ति आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुआ और न ही उन्होंने अपनी ओर से कोई लिखित जवाब दाखिल किया। उनकी इस उदासीनता को देखते हुए आयोग ने सख्त रुख अपनाया और 17 जून 2026 को उनके खिलाफ एकतरफा (एक्स पार्टे) कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी।

आयोग का सख्त फैसला और हर्जाने का आदेश

इस मामले की सुनवाई उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष एसके श्रीला और सदस्य स्टैनली हेरोल्ड की पीठ कर रही थी। पीठ ने उपलब्ध सबूतों और बैंक बयानों की जांच की, जिससे यह पूरी तरह साबित हो गया कि जोसेफ ने आरोपियों को पैसे दिए थे। चूंकि आरोपियों ने शिकायत का कोई विरोध नहीं किया और न ही अपनी सफाई में कुछ कहा, इसलिए आयोग ने माना कि जोसेफ के आरोप पूरी तरह सच हैं।

पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपियों ने जोसेफ को इजरायल में नौकरी, प्लेसमेंट, दस्तावेज और वीजा दिलाने का वादा किया था, लेकिन वे इसे पूरा करने में नाकाम रहे और उन्होंने जोसेफ का पैसा भी नहीं लौटाया। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत यह साफ तौर पर अनुचित व्यापार व्यवहार है और कानून की धारा 2(11) के तहत सेवा में गंभीर कमी का मामला है। बार-बार झूठा आश्वासन देना, उड़ानें रद्द करना और नकली हवाई टिकट देना यह साबित करता है कि जोसेफ से मोटी रकम ऐंठकर उन्हें लंबे समय तक धोखे में रखा गया।

आयोग ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि जोसेफ एक दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूर हैं। उन्होंने इस नौकरी के चक्कर में अपना बेहद कीमती समय गंवाया, कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी से पैसे दिए, और इसके बदले उन्हें केवल गहरी निराशा, चिंता और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ता आयोग ने जोसेफ के पक्ष में एक बेहद कड़ा फैसला सुनाया:

  • आयोग ने आदेश दिया कि जोसेफ को उनकी मूल राशि 3.7 लाख रुपये वापस की जाए। इस राशि पर भुगतान की तारीख से लेकर वास्तविक वसूली की तारीख तक 9 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज भी दिया जाएगा।
  • जोसेफ को हुई मानसिक प्रताड़ना, वित्तीय नुकसान और उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर आरोपियों को संयुक्त रूप से 2 लाख रुपये का हर्जाना देना होगा।
  • इसके अलावा, मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में जोसेफ को अलग से 10 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा।

आयोग ने रेजी सी वर्की और प्रीता एलेक्स को सख्त निर्देश दिया है कि वे इस आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर संयुक्त रूप से या व्यक्तिगत रूप से इस पूरी राशि का भुगतान करें। यदि वे इस तय समय सीमा के भीतर भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो पीड़ित जोसेफ मैनुअल उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ सख्त निष्पादन कार्यवाही शुरू करने के हकदार होंगे।

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