ठाकुर जी को पहला रक्षा सूत्र अर्पित करने की अनूठी परंपरा
राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी जयपुर में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आस्था और भक्ति का एक बेहद ही खूबसूरत रूप देखने को मिलता है। यहां भाई और बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ भक्त और भगवान के बीच अटूट विश्वास तथा रक्षा का भाव भी इस त्योहार से गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा के अनुसार, रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सबसे पहले ठाकुर श्री गोविंद देव जी को राखी अर्पित की जाती है। इसके बाद ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।
मंदिर में विशेष आयोजन और भव्य झांकी
इस विशेष दिन पर मंदिर प्रशासन और भक्तों द्वारा कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। भगवान के दरबार में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- ठाकुर जी का अत्यंत मनमोहक और विशेष श्रृंगार किया जाता है।
- भक्तों के दर्शन के लिए अलौकिक झांकी सजाई जाती है।
- भगवान का पवित्र पंचामृत अभिषेक विधि-विधान से संपन्न होता है।
- ठाकुर जी को विशेष पकवानों और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना
रक्षाबंधन के दिन सुबह के समय से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ता है। पूरा मंदिर परिसर भगवान के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठता है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान को राखी अर्पित करते हैं और अपने परिवार, सगे-संबंधियों व प्रियजनों की रक्षा, सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए मंगल कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा में जयपुर की समृद्ध धार्मिक विरासत की सुंदर झलक साफ तौर पर दिखाई देती है।
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