परीक्षा में सेंधमारी और सवालों के घेरे में सुरक्षा
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में हाल ही में एक बड़ी शैक्षणिक अनियमितता सामने आई है, जिसने राज्य की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बीएससी एग्रीकल्चर दूसरे वर्ष की 'एग्रीकल्चरल एंटोमोलॉजी' परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर वायरल हो गया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब वायरल हुए प्रश्नपत्र के 70 प्रतिशत सवाल परीक्षा के वास्तविक पेपर से हूबहू मेल खा गए। इस गंभीर चूक के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आनन-फानन में परीक्षा को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है।
लीक का घटनाक्रम और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सुबह करीब 8:45 बजे से 9:00 बजे के बीच हुई, जब विश्वविद्यालय के डीन कार्यालय को एक अज्ञात ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में चेतावनी दी गई थी कि पेपर लीक हो चुका है, हालांकि उस समय कोई प्रश्नपत्र संलग्न नहीं था। कुछ समय बाद ही, प्रश्नपत्र की तस्वीरें छात्रों के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में तैरने लगीं। परीक्षा सुबह 10:00 बजे से निर्धारित थी, जिसमें 34 संबद्ध कॉलेजों के लगभग 500 छात्र शामिल होने वाले थे। जब विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने वायरल दस्तावेजों का मिलान मूल प्रश्नपत्र से किया, तो 70 प्रतिशत समानता पाई गई, जिसके बाद उसी शाम परीक्षा को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया गया। अब विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि यह परीक्षा सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी।
जांच और कानूनी कार्रवाई का मार्ग
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक पांच सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है, ताकि पेपर लीक के स्रोत का पता लगाया जा सके। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने पुष्टि की है कि इस पूरे मामले को पुलिस और साइबर सेल को सौंप दिया गया है ताकि औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सके। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी जनता और छात्रों को भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। इस घटना के बाद एनएसयूआई (NSUI) और एबीवीपी (ABVP) जैसे छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठाए हैं।
क्यों नहीं लागू होगा एंटी पेपर लीक कानून?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हाल ही में लागू किए गए कड़े 'एंटी पेपर लीक कानून' के तहत इन आरोपियों पर मुकदमा चलेगा? इसका तकनीकी जवाब है- नहीं। दरअसल, छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित 'पब्लिक रिक्रूटमेंट एंड प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बिल, 2026' और केंद्र सरकार का 'पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026' विशेष रूप से बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे एनईईटी (NEET), जेईई (JEE), यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC), सीजीपीएससी (CGPSC) और व्यापम जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं के लिए बनाए गए हैं। ये कानून संगठित रैकेट को निशाना बनाते हैं और इनमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन, विश्वविद्यालय के आंतरिक सेमेस्टर परीक्षाएं इन कानूनों के दायरे में नहीं आती हैं। ये कानून केवल राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं तक सीमित हैं।
दोषियों पर किस तरह के कानून के तहत होगी कार्रवाई?
चूंकि नए विशेष कानून यहां लागू नहीं हो सकते, इसलिए पुलिस और साइबर सेल को सामान्य आपराधिक कानूनों का सहारा लेना होगा। दोषियों पर निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है:
- भारतीय न्याय संहिता (BNS): इसके तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया जा सकता है।
- आईटी (IT) अधिनियम: चूँकि प्रश्नपत्र का प्रसार व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों से हुआ है, इसलिए अनधिकृत सामग्री के डिजिटल ट्रांसमिशन को लेकर आईटी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
- विश्वविद्यालय के आंतरिक नियम: विश्वविद्यालय की अपनी अनुशासनात्मक समिति यदि किसी छात्र या कर्मचारी को दोषी पाती है, तो उसे संस्थान से हमेशा के लिए निष्कासित किया जा सकता है या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में परीक्षाओं की चुनौतीपूर्ण पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ के लिए पेपर लीक की यह घटना कोई नई बात नहीं है। राज्य का इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा रहा है, जिसने पूर्व में भी हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटकाया है। वर्ष 2020 से 2022 के बीच सीजीपीएससी (CGPSC) भर्ती परीक्षा में धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) की जांच के बाद पूर्व चेयरमैन तमन सिंह सोनवानी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था। तब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि पेपर लीक करना हत्या से भी अधिक घिनौना कृत्य है क्योंकि यह लाखों युवाओं के भविष्य की बलि ले लेता है। इसके अलावा, मार्च 2024 में सीजीबीएसई (CGBSE) की 12वीं कक्षा की हिंदी बोर्ड परीक्षा का पेपर भी व्हाट्सएप पर लीक हुआ था, जिसके चलते परीक्षा को रद्द करना पड़ा था।
व्यापम की चुनौतियां और सुरक्षा के उपाय
छत्तीसगढ़ प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (CG व्यापम) के साथ भी ऐसी समस्याएं रही हैं, जहाँ कभी ब्लूटूथ के माध्यम से नकल तो कभी देर रात पेपर रद्द होने की खबरें आती रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार को परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए फिजिकल पेपर की चाबियों को सुरक्षित रखने हेतु सख्त डिजिटल लॉकबॉक्स जैसी तकनीकें अपनानी पड़ी हैं। हालांकि, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की इस हालिया घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर होने वाली परीक्षाओं की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए और अधिक कड़े और व्यापक सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता है।
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