मछली पालकों के लिए राहत भरी खबर, मछली बीज पर मिलेगा 50% तक अनुदान

बिलासपुर में मानसून के साथ मछली बीज उत्पादन शुरू होने जा रहा है और किसानों को रोहू, कतला तथा मृगल के बीज पर 50% तक अनुदान दिया जाएगा। जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह से अनुदानित दर पर बीज वितरण आरंभ होगा।

बिलासपुर जिले में मानसून के दस्तक देते ही मत्स्य बीज उत्पादन का काम रफ्तार पकड़ने वाला है। मत्स्य पालन विभाग किसानों को रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रमुख प्रजातियों का गुणवत्तापूर्ण मछली बीज मुहैया कराने की तैयारी में जुटा हुआ है। विभाग के मुताबिक जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह से किसानों को अनुदानित दर पर मछली बीज मिलना शुरू हो जाएगा। इससे जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सहायक मत्स्य अधिकारी योगेश मानवाटकर ने बताया कि यह समय मछलियों के प्रजनन का मौसम है। वंश वृद्धि के लिए विभाग द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन केंद्रों में विशेष इंतजाम किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अच्छी बारिश शुरू होते ही शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र भोजपुरी में मछली बीज उत्पादन का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।

जुलाई के पहले सप्ताह से मिलेगा मछली बीज

विभाग का लक्ष्य है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के प्रथम सप्ताह तक किसानों को मछली बीज उपलब्ध करा दिया जाए। इस दौरान रोहू, कतला और मृगल जैसी भारतीय मेजर कार्प प्रजातियों के बीज किसानों में बांटे जाएंगे, जिनकी मांग प्रदेश में सबसे ज्यादा बनी रहती है।

किसानों को मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान

मत्स्य विभाग द्वारा चलाई जा रही उंगली संचयन योजना के तहत किसानों को फिंगरलिंग यानी उंगली के आकार की मछली पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। विभाग के अनुसार यदि कोई किसान 2 हजार रुपये का मछली बीज खरीदता है तो उसे लगभग 4 हजार रुपये मूल्य तक का बीज मुहैया कराया जाता है। इस योजना का मकसद किसानों को कम लागत में मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित करना है।

इन मत्स्य बीज परिक्षेत्रों से होगी आपूर्ति

किसानों को मछली बीज देने के लिए जिले में कई शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शासकीय मत्स्य बीज परिक्षेत्र भोजपुरी, बेलमुंडी और निगारबंद शामिल हैं। किसान यहां विभागीय प्रक्रिया पूरी कर बीज हासिल कर सकते हैं।

स्पान और फ्राई की रियायती दरें

मत्स्य विभाग के अनुसार शासकीय बीज प्रक्षेत्रों में मत्स्य बीज यानी स्पान लगभग 600 से 650 रुपये प्रति लाख की दर पर दिया जाता है। वहीं फ्राई और संवर्धित बीज किसानों को रियायती एवं अनुदानित दरों पर उपलब्ध कराया जाता है। विभिन्न प्रजातियों की दरें विभाग द्वारा समय-समय पर तय की जाती हैं।

मत्स्य बीज उत्पादन का बड़ा केंद्र है बिलासपुर

बिलासपुर जिले को छत्तीसगढ़ में मत्स्य बीज उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां आधुनिक सर्कुलर हैचरी और मत्स्य बीज परिक्षेत्रों के जरिए रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कॉमन कार्प जैसी प्रजातियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। यहां तैयार होने वाला मत्स्य बीज न सिर्फ जिले और संभाग की जरूरतें पूरी करता है, बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों में भी भेजा जाता है।

आधुनिक तकनीकों को भी मिल रहा बढ़ावा

मत्स्य विभाग पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ-साथ केज कल्चर और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को भी प्रोत्साहन दे रहा है। इससे कम क्षेत्र में ज्यादा उत्पादन हासिल करने के अवसर बढ़ रहे हैं और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।

किसानों के लिए सुनहरा अवसर

विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून का मौसम मछली पालन शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। ऐसे में विभाग की अनुदान योजनाओं का लाभ उठाकर किसान कम निवेश में बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

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