रेलवे स्टेशन को अमूमन ऐसी जगह समझा जाता है, जहां एक बार कोई चीज छूट जाए तो उसके दोबारा हाथ लगने की उम्मीद न के बराबर रह जाती है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैग, गहने या नकदी जैसी कीमती चीजें कई बार ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर ही रह जाती हैं। लेकिन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पूर्व स्टेशन मैनेजर राकेश शर्मा ने अपनी ईमानदारी और लगन से इस सोच को ही पलट कर रख दिया।
नौकरी के दौरान उन्होंने हजारों यात्रियों का गुम हुआ सामान खोजकर लौटाया और करोड़ों रुपये मूल्य की वस्तुएं उनके सही मालिकों तक सुरक्षित पहुंचाईं। जनवरी 2026 में स्टेशन मैनेजर के पद से रिटायर होने के बाद भी वह लोगों की मदद के काम में जुटे हुए हैं। सेवा के दौरान उनकी पहचान स्टेशन मैनेजर से कहीं ज्यादा एक 'खोया-पाया अधिकारी' के रूप में बन गई थी।
1,975 यात्रियों को मिला उनका सामान
राकेश शर्मा अब तक 1,975 यात्रियों को उनका खोया हुआ सामान वापस दिला चुके हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, केन्या, यूएई और नेपाल समेत 18 देशों के 40 विदेशी यात्री भी शामिल हैं। जिन चीजों को उन्होंने यात्रियों तक पहुंचाया, उनमें लैपटॉप, स्मार्टफोन, ट्रॉली बैग, स्मार्टवॉच, सोने की चेन, मंगलसूत्र, हीरे की अंगूठियां और बड़ी रकम शामिल हैं।
इसके अलावा 22.17 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा के साथ-साथ 2,106 अमेरिकी डॉलर और 2,200 चीनी युआन जैसी विदेशी मुद्रा भी उनके प्रयासों से यात्रियों को वापस मिल सकी। कुल मिलाकर उन्होंने करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य का सामान उसके असली मालिकों तक पहुंचाया।
सामान लौटाना नहीं था आसान
राकेश शर्मा बताते हैं कि उन्होंने रेलवे को 36 वर्ष की सेवा दी है। इस दौरान खोया-पाया विभाग के तहत मिले सामान को उसके मालिक तक पहुंचाना सबसे कठिन कामों में से एक रहा। उनके अनुसार जब कर्मचारी कोई लावारिस सामान उनके पास लाते थे, तब यह जानकारी नहीं होती थी कि वह किसका है और कहां छूटा।
ऐसे में सबसे पहले ट्रेन नंबर, कोच नंबर और बर्थ नंबर का पता लगाया जाता था। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगालकर यात्री की पहचान की जाती और उसका मोबाइल नंबर तलाशा जाता था। फिर संपर्क कर पूछा जाता था कि कहीं उनका कोई सामान तो नहीं छूटा। पुष्टि होने पर यात्री को बुलाकर सामान सौंप दिया जाता। दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले यात्रियों के लिए रेलवे पार्सल के जरिए सामान भेजने की व्यवस्था भी की जाती थी।
परिवार से मिली सेवा की प्रेरणा
राकेश शर्मा का कहना है कि रेलवे सेवा उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा रही है। उनके पिता रेलवे में लोको पायलट थे और उनके ताऊ भी रेलवे में काम कर चुके थे। उन्होंने बताया कि पूरे कार्यकाल में उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम किया।
रिटायरमेंट के बाद भी उनका मानना है कि व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर हो, उसे अपना दायित्व पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए। उनके मुताबिक ईमानदारी से किया गया काम एक न एक दिन सम्मान जरूर दिलाता है।
रेलवे पर भरोसा बढ़ाने में अहम योगदान
दिल्ली पत्रकार कल्याण समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता कहते हैं कि उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक राकेश शर्मा को काम करते देखा है। उनके अनुसार रेलवे में इतने ईमानदार और समर्पित अधिकारी बहुत कम मिलते हैं। उन्होंने कहा कि राकेश शर्मा ने केवल यात्रियों का सामान ही नहीं लौटाया, बल्कि रेलवे व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को भी और मजबूत किया है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
राकेश शर्मा की ईमानदार सेवा और उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें वर्ष 2023 का अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार खास तौर पर उल्लेखनीय है, जो रेल मंत्री द्वारा प्रदान किया गया था।
- राष्ट्रीय गौरव सम्मान (2025)
- समाज रत्न पुरस्कार
- प्रेरणा दीप सम्मान
- मार्तंड सम्मान
- यात्री रेल संचालन में रिसोर्सफुल एसोसिएट पुरस्कार
उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। साथ ही उन्हें ग्रैंड मास्टर की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है। राकेश शर्मा की यह कहानी साबित करती है कि ईमानदारी और सेवा भाव के बल पर किसी भी सरकारी पद को लोगों के भरोसे और सम्मान का प्रतीक बनाया जा सकता है।
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