रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त और भद्रा का प्रभाव
भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का महापर्व इस वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाना है। इस बार रक्षाबंधन को लेकर सबसे अच्छी बात यह है कि इस दिन भद्रा का साया बिल्कुल भी नहीं रहेगा। 28 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, जिसके कारण बहनों के पास अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए पूरा दिन उपलब्ध रहेगा। हालांकि, भद्रा न होने के बावजूद शास्त्रों और ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि रक्षा सूत्र बांधते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि जीवन में खुशहाली बनी रहे और रिश्तों में कोई कड़वाहट न आए।
राहु काल के दौरान राखी बांधने से बचें
ज्योतिषाचार्य स्वामी कन्हैया महाराज के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन भद्रा का दोष नहीं है, लेकिन राहु काल का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बहनों को सलाह दी गई है कि वे भूलकर भी राहु काल के समय अपने भाई को राखी न बांधें। पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त को राहु काल सुबह 10 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस दौरान राखी बांधने के बजाय भगवान की आराधना करना अधिक शुभ माना जाता है।
रिश्तों की मर्यादा और आचरण
रक्षाबंधन का दिन भाई और बहन के बीच प्रेम को और अधिक गहरा करने का दिन है। इस दिन बहनों को अपने भाइयों के साथ किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़े से पूरी तरह बचना चाहिए। माना जाता है कि इस पावन दिन पर नकारात्मक विचारों या कटु शब्दों का प्रयोग करने से न केवल भाई की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि उनके भाग्य में भी बाधाएं आ सकती हैं। बहनों को चाहिए कि वे अपने भाई के प्रति आदर भाव रखें और अपशब्दों का प्रयोग कदापि न करें।
रक्षा सूत्र बांधने की सही विधि
राखी बांधने की प्रक्रिया महज एक धागा बांधना नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र संस्कार है। जब आप अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें, तो इन नियमों का पालन जरूर करें:
- सबसे पहले भाई को सम्मानपूर्वक तिलक लगाएं।
- तिलक लगाने के बाद भाई की आरती उतारें।
- भगवान श्रीकृष्ण से अपने भाई की लंबी उम्र और सुखद भविष्य की कामना करें।
- ध्यान रखें कि रक्षा सूत्र या राखी कहीं से भी खंडित न हो।
- भाइयों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे अपनी बहन को उपहार या पैसे भेंट स्वरूप जरूर दें। यह परंपरा उनके बीच आपसी मधुरता और स्नेह को बढ़ाती है।
कैसी राखी का चयन करें
आजकल के बदलते दौर में बाजार में कई तरह की फैंसी राखियां उपलब्ध हैं, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से रेशम के धागों वाली राखी को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। यदि रेशम की राखी न मिल सके, तो चांदी से बनी राखी का उपयोग भी किया जा सकता है। इसके अलावा, फूलों से बनी राखियां भी अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। कृत्रिम या बहुत अधिक सजावटी राखियों के बजाय सात्विक और साधारण रक्षा सूत्र का चुनाव करना बेहतर माना गया है, जो संबंधों की पवित्रता को दर्शाता है।
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