सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही का पर्दाफाश
कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक इंजेक्शन की कीमत न केवल लाखों रुपये में होती है, बल्कि यह उनके जीवन की आखिरी उम्मीद भी होती है। लेकिन राजस्थान के सरकारी सिस्टम से चोरी कर इन दवाओं को दिल्ली के ब्लैक मार्केट में बेचने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा और वितरण प्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए कैंसर के इंजेक्शन के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि जो दवाएं मरीजों को निशुल्क मिलनी चाहिए थीं, वे राजधानी दिल्ली के बाजारों में ऊंचे दामों पर बेची जा रही थीं। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान कुल 22 वायल बरामद किए हैं। इनमें से 4 वायल विशेष रूप से दिल्ली के ब्लैक मार्केट से पकड़े गए हैं। इस बरामदगी के बाद से यह साफ हो गया है कि राजस्थान की सरकारी सप्लाई चेन में बड़ी सेंधमारी हुई है। एक वायल की कीमत लगभग 1 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है, जो इस अवैध धंधे की गंभीरता को दर्शाता है।
बीकानेर से दिल्ली तक का काला सफर
जांच में पता चला है कि यह सरकारी खेप राजस्थान के बीकानेर स्थित अस्पताल के लिए भेजी गई थी। जिस Bavencio यानी Avelumab इंजेक्शन का इस्तेमाल गंभीर कैंसर मरीजों के इलाज में किया जाता है, उसकी सप्लाई में भारी हेराफेरी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी अस्पताल के स्टॉक, वेयरहाउस या सप्लाई चेन के किस बिंदु से ये जीवन रक्षक दवाएं बाहर निकलीं? क्या अस्पताल के अंदर से ही दवाओं की चोरी हो रही थी या फिर गोदाम से इसे सीधे ब्लैक मार्केट के हवाले किया गया? फिलहाल पूरी निगरानी प्रणाली संदेह के घेरे में है और इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का काम दिल्ली क्राइम ब्रांच कर रही है।
राजस्थान मेडिकल कोरपोरेशन (RMSCL) की भूमिका और नोटिस
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने RMSCL यानी राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। पुलिस ने इस मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी सप्लाई की दवाएं किस रास्ते से और किन अधिकारियों की मिलीभगत से दिल्ली पहुंचीं। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या यह कोई संगठित गिरोह है जिसका नेटवर्क राजस्थान से दिल्ली तक फैला हुआ है।
अधिकारियों की चुप्पी और जिम्मेदारी
जब मामले की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो स्थिति और भी निराशाजनक नजर आई। RMSCL के दफ्तर में प्रबंध निदेशक पुखराज सेन से जवाब लेने के लिए घंटों इंतजार किया गया, लेकिन उन्होंने इस गंभीर मामले पर सीधे तौर पर बात करने से परहेज किया। काफी टालमटोल के बाद उन्होंने यह तो स्वीकार किया कि इंजेक्शन की कालाबाजारी हुई है, लेकिन उन्होंने सारा दोष बीकानेर के पीबीएम अस्पताल की सप्लाई के बाद वाली प्रक्रिया पर डाल दिया। हालांकि, यह स्पष्टीकरण राजस्थान सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अस्पताल बनाम ब्लैक मार्केट
यह पहला मौका नहीं है जब सरकारी अस्पतालों से दवाएं गायब होकर बाजार में बिकती पाई गई हों। लेकिन कैंसर जैसे संवेदनशील इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं का ब्लैक मार्केट में पहुंचना एक मानवीय आपदा जैसा है। दिल्ली पुलिस जहां जांच कर रही है, वहीं राजस्थान सरकार के पास अब तक इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि मरीजों की जिंदगी बचाने वाली दवाएं मरीजों के बजाय मुनाफाखोरों के पास कैसे पहुंचीं। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह स्पष्ट होगा कि सरकारी सिस्टम में कौन-कौन से चेहरे इस काले खेल में शामिल हैं।
https://hindi.news18.com/news/nation/cancer-injection-found-in-black-market-of-delhi-supply-from-rajasthan-to-delhi-racket-busted-by-crime-branch-ws-l-10767391.html