खरीफ फसल की बुवाई शुरू होने से पहले मिट्टी की जांच कराना किसानों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। मृदा परीक्षण से खेत की असली उर्वरक क्षमता का पता चलता है, जिसके आधार पर किसान फसल की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर पाते हैं। हालांकि कई किसानों को मिट्टी का नमूना लेने की सही प्रक्रिया मालूम नहीं होती, जिसके चलते जांच रिपोर्ट सटीक नहीं आ पाती। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने नमूना संग्रहण के कुछ अहम नियम और जरूरी सुझाव बताए हैं, जिन्हें अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
मृदा परीक्षण क्यों है जरूरी
मृदा परीक्षण को खेत की सेहत की जांच की तरह समझा जा सकता है। इसके जरिये मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश समेत दूसरे पोषक तत्वों की जानकारी मिल जाती है। जांच रिपोर्ट देखकर किसान आसानी से तय कर सकते हैं कि उनके खेत में किस उर्वरक की कितनी मात्रा की आवश्यकता है। इससे उत्पादन बढ़ता है, लागत घटती है और खेती ज्यादा फायदेमंद बनती है।
खेत के किन हिस्सों से लें मिट्टी का नमूना
विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी का नमूना खेत के किसी एक ही स्थान से नहीं लेना चाहिए। बेहतर नतीजे के लिए खेत के अलग-अलग हिस्सों में 8 से 10 स्थानों पर 'वी' आकार का गड्ढा बनाकर करीब 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई तक की मिट्टी निकालनी चाहिए।
प्रतिनिधि नमूना कैसे तैयार करें
अलग-अलग जगहों से निकाली गई मिट्टी को आपस में अच्छी तरह मिलाना चाहिए और फिर उसमें से एक प्रतिनिधि नमूना तैयार करना चाहिए। इसी मिश्रित नमूने की जांच से खेत की मिट्टी की सही स्थिति का सटीक आकलन हो पाता है।
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