PIB फैक्ट चेक: क्या जंतर-मंतर के विरोध के बाद 30 हजार जवानों ने छोड़ी नौकरी? जानिए वायरल वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर भारतीय सेना के 30 हजार जवानों के इस्तीफे का दावा करने वाला एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे पूरी तरह से फर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके बनाया गया दुष्प्रचार करार दिया है।

सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे की हकीकत

पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक सनसनीखेज दावा तेजी से फैल रहा है। इस दावे के मुताबिक, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के जवाब में भारतीय सेना के 30,000 जवानों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने देश भर में चिंता पैदा कर दी थी, लेकिन अब सरकार की आधिकारिक फैक्ट चेक इकाई ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने साफ शब्दों में कहा है कि यह दावा पूरी तरह से आधारहीन, फर्जी और भ्रामक है।

पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा और AI का इस्तेमाल

पीआईबी फैक्ट चेक के अनुसार, इस फर्जी खबर के पीछे कुछ ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स का हाथ है जो पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देते हैं। इन तत्वों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का सहारा लेकर एक ऐसा वीडियो तैयार किया है, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्हें कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के कारण सेना के 30 हजार जवानों ने इस्तीफा दे दिया है।

सीडीएस का नाम जोड़कर फैलाई जा रही अफवाह

पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस वीडियो का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने कभी भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। यह वीडियो पूरी तरह से छेड़छाड़ करके बनाया गया है। पीआईबी का कहना है कि यह न केवल एक फेक वीडियो है, बल्कि यह देश की सुरक्षा बलों की छवि को धूमिल करने और समाज में असंतोष फैलाने के इरादे से तैयार किया गया है।

वीडियो में क्या कहा जा रहा है?

इस एडिटेड और फर्जी वीडियो में जनरल सुब्रमणि को यह कहते हुए दिखाया गया है कि सरकार को छात्रों के प्रति नरम रुख अपनाना चाहिए। इसमें झूठ बोला गया है कि 30,000 से अधिक भारतीय सेना के जवानों ने इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि उनके बच्चों को जंतर-मंतर पर लाठियों से पीटा गया था। आगे यह भी दावा किया गया कि ये जवान अब सरकार की सेवा करने से इनकार कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की जा रही है, ताकि सशस्त्र बलों के बंटवारे को रोका जा सके। यह सभी बातें मनगढ़ंत हैं।

असली वीडियो का खुलासा

फैक्ट चेक टीम ने उस मूल वीडियो को भी सार्वजनिक किया है जिसका गलत उपयोग करके यह दुष्प्रचार किया गया। असल में, सीडीएस सुब्रमणि का जो वीडियो वायरल किया गया, वह दरअसल इंडियन ऑयल डूरंड कप के प्रचार से संबंधित था। ओरिजिनल वीडियो में सीडीएस लोगों को एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट में आने का निमंत्रण दे रहे थे। उन्होंने बताया था कि यह टूर्नामेंट 25 जुलाई से 23 अगस्त तक पांच शहरों—कोलकाता, इंफाल, शिलांग, गुवाहाटी और रांची में आयोजित किया जा रहा है। इसी वीडियो को एआई की मदद से बदलकर गलत संदेश दिया गया।

नागरिकों के लिए सतर्क रहने की सलाह

पीआईबी फैक्ट चेक ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन फैल रही किसी भी संदिग्ध जानकारी पर भरोसा न करें। पीआईबी की टीम ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ऐसे मैनिपुलेटेड कंटेंट से सावधान रहें और हमेशा वेरिफाइड आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। यदि आपको भारत सरकार या सरकारी संस्थाओं से संबंधित कोई संदिग्ध सामग्री सोशल मीडिया पर दिखाई देती है, तो आप उसे +91 8799711259 पर रिपोर्ट कर सकते हैं या फैक्ट चेक एट द रेट पीआईबी डॉट जीओवी डॉट इन पर ईमेल करके सूचित कर सकते हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जांचे ऐसी खबरों को आगे न बढ़ाएं, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में गलत धारणा फैला सकती है।

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