आसमान में महाशक्तियों के बीच तनाव का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। अंटार्कटिका जा रहे अमेरिकी वायुसेना के एक विशालकाय मालवाहक विमान C-17 ग्लोबमास्टर को रूस की ओर से मिली मिसाइल लॉन्च की चेतावनी के बाद अपनी उड़ान बीच में ही रद्द करनी पड़ी। यह विमान न्यूजीलैंड से उड़ान भरने के बाद वापस सुरक्षित लौट आया। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बीच रास्ते से वापस मुड़ा अमेरिकी सैन्य विमान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना का दिग्गज विमान C-17 ग्लोबमास्टर मंगलवार सुबह न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च से अंटार्कटिका के लिए रवाना हुआ था। इस विमान का कॉल साइन ICE28 था। विमान ने अपने निर्धारित समय सुबह करीब 9 बजे उड़ान भरी थी, लेकिन सफर शुरू होने के महज तीन घंटे बाद ही इसे वापस क्राइस्टचर्च लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस अचानक वापसी की वजह रूस द्वारा जारी की गई एक संभावित मिसाइल लॉन्च की चेतावनी थी। न्यूजीलैंड की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) को रूसी एयर ट्रैफिक एजेंसी से इस संबंध में सूचना मिली थी। इस संवेदनशील जानकारी के बाद नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक NOTAM (नोटिस टू एयर मिशन) जारी किया, जिसके बाद अमेरिकी विमान के पायलटों ने सावधानी बरतते हुए वापस लौटने का फैसला किया।
रूस ने पहले ही दे दी थी मिसाइल लॉन्च की सूचना
न्यूजीलैंड की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि रूसी एयर ट्रैफिक एजेंसी ने उन्हें पहले ही आगाह कर दिया था। रूस की ओर से दी गई सूचना में कहा गया था कि वे एक मिसाइल लॉन्च की योजना बना रहे हैं। इस परीक्षण के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में विमानों के लिए भारी जोखिम पैदा हो सकता था।
यह खतरा मुख्य रूप से न्यूजीलैंड के ओशेनिक फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन (FIR) के दायरे में आने वाले क्षेत्र में था। आपको बता दें कि यह हवाई क्षेत्र बेहद विशाल है और कई हिस्सों में बंटा हुआ है:
- यह फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन लगभग 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।
- इस क्षेत्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के अंतर्गत आता है।
- इसके तहत दक्षिण प्रशांत महासागर, दक्षिणी महासागर और तस्मान सागर के विशाल जलीय हिस्से शामिल हैं।
इस संभावित खतरे को देखते हुए न्यूजीलैंड के उड्डयन विभाग ने संबंधित इलाके को अस्थायी रूप से एक डेंजर एरिया घोषित कर दिया था और वहां से गुजरने वाले पायलटों को सचेत रहने के लिए कहा था।
उड़ान पर कोई पाबंदी नहीं थी, फिर भी अमेरिका ने क्यों लिया फैसला?
द हिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूजीलैंड की उड्डयन एजेंसी द्वारा जारी किए गए NOTAM का यह बिल्कुल भी मतलब नहीं था कि उस हवाई क्षेत्र में उड़ानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने यह साफ किया कि विमान का संचालन करने वाली एजेंसियां उपलब्ध सुरक्षा जानकारियों और आकलनों के आधार पर स्वयं निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र थीं।
यानी अमेरिकी वायुसेना के पास उस क्षेत्र से आगे बढ़ने का विकल्प मौजूद था और उन पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं था। इसके बावजूद, अमेरिकी सेना ने किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए अपने बहुमूल्य C-17 विमान और उसमें सवार कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्राइस्टचर्च लौटने का ही विकल्प चुना।
अंटार्कटिका जा रहा था अमेरिकी विमान, जानिए क्या था मिशन
अमेरिकी वायुसेना का यह विमान कोई सामान्य उड़ान पर नहीं था, बल्कि यह उनके बेहद महत्वपूर्ण मिशन का हिस्सा था। दरअसल, यह उड़ान अमेरिकी वायुसेना के विंटर फ्लाई सीजन के तहत संचालित की जा रही थी। इस सालाना मिशन का मुख्य उद्देश्य अंटार्कटिका में गर्मियों के आगामी शोध सत्र की तैयारियां पूरी करना है।
इस मिशन के तहत किए जाने वाले प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- अंटार्कटिका में काम करने वाले वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को वहां तक सुरक्षित पहुंचाना।
- शोध कार्यों के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरणों और जीवन रक्षक सामग्रियों की आपूर्ति करना।
- न्यूजीलैंड और अमेरिकी शोध केंद्रों के बीच आवश्यक तालमेल और लॉजिस्टिक्स को बनाए रखना।
न्यूजीलैंड का क्राइस्टचर्च शहर अंटार्कटिका जाने वाले वैज्ञानिकों और विमानों के लिए एक बेहद अहम पड़ाव माना जाता है। अमेरिकी वायुसेना हर साल इस मार्ग का उपयोग करके अपने और न्यूजीलैंड के अनुसंधान केंद्रों तक रसद तथा स्टाफ पहुंचाती है। लेकिन इस बार रूस की मिसाइल गतिविधि की चेतावनी के कारण इस नियमित और बेहद महत्वपूर्ण मिशन में अस्थायी रूप से बाधा उत्पन्न हो गई।
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