1971 की तरह बेइज्जत होकर भागना पड़ेगा, बलूच नेताओं का पाकिस्तानी सेना को खुला अल्टीमेटम

बलूचिस्तान ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए अपने क्षेत्र से सभी सुरक्षा बलों को तुरंत वापस बुलाने की मांग की है। बलूच नेताओं ने 1971 के बांग्लादेश युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान नहीं छोड़ा, तो उन्हें अपमानजनक हार का सामना करना पड़ेगा।

पाकिस्तान के लिए बढ़ता संकट

पाकिस्तान इस समय न केवल आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है, बल्कि आंतरिक मोर्चों पर भी उसकी हालत बेहद खराब होती जा रही है। एक तरफ पाक अधिकृत कश्मीर में विरोध की लहर चल रही है, तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में लंबे समय से सुलग रही विद्रोह की आग अब खुलकर बाहर आ चुकी है। बलूचिस्तान के अलगाववादी समूहों ने खुद को रिपब्लिक ऑफ बलोचिस्तान के रूप में स्वतंत्र घोषित कर रखा है। हाल ही में 11 अगस्त को बलूचों ने अपनी आजादी की वर्षगांठ का जश्न मनाया, जबकि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को दबाने के लिए अपने लड़ाकू विमानों और सैन्य बलों का सहारा लिया है।

पाकिस्तानी सेना को सीधी चुनौती

बलूच नेता मीर यार बलोच ने एक कठोर बयान जारी कर पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को सीधा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तानी सेना को बलूचिस्तान की धरती से अपने सभी सैन्य और सुरक्षा संस्थानों को तुरंत हटा लेना चाहिए। बलूच नेताओं का दावा है कि बलूचिस्तान एक संप्रभु राष्ट्र है और यहाँ पाकिस्तानी सेना की उपस्थिति पूरी तरह से अवैध है। बलूचों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना केवल उनके प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों की लूट कर रही है और स्थानीय निवासियों के जीवन, संपत्ति एवं शांति के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

1971 के इतिहास की याद

इस अल्टीमेटम में 1971 के बांग्लादेश युद्ध का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो पाकिस्तान के लिए एक जख्म की तरह है। बलूच नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने समय रहते अपनी सेना वापस नहीं बुलाई, तो उसे 1971 की तरह ही दुनिया के सामने शर्मिंदगी और बेइज्जती झेलकर भागना पड़ेगा। बयान में तर्क दिया गया है कि इतिहास गवाह है कि कैसे साम्राज्यवादी ताकतों को पीछे हटना पड़ता है। उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर 1947 में भारत से ब्रिटिश सेना की वापसी और अफगानिस्तान से सोवियत संघ एवं अमेरिका-नाटो की वापसी का हवाला दिया। बलूचों का कहना है कि पाकिस्तान को उसी राह पर चलने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से बाहर निकल जाना चाहिए।

सुरक्षा बलों के लिए सख्त निर्देश

बलूच नेतृत्व ने केवल सेना को ही नहीं, बल्कि फ्रंटियर कॉर्प्स, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थानों में काम करने वाले गैर-बलूच नागरिकों को भी तुरंत इलाका खाली करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, बलूचों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने मांग की है कि पाकिस्तान अपनी वायुसेना और नौसेना के जो हथियार और उपकरण बलूचिस्तान की जमीन पर इस्तेमाल कर रहा है, उन्हें वहीं छोड़ दे। उनका तर्क है कि ये उपकरण बलूचिस्तान के ही संसाधनों से खरीदे गए हैं, इसलिए उन पर बलूचों का ही हक है और पाकिस्तान को इन्हें अपने साथ ले जाने की जरूरत नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील

सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस बयान में बलूचों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने वैश्विक मंचों से आग्रह किया है कि वे बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दें और पाकिस्तान को उसकी जमीन से सैनिक हटाने के लिए मजबूर करें। बलूच नेताओं का कहना है कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को स्वीकार कर ले।

11 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व

पाकिस्तान के आजादी दिवस यानी 14 अगस्त को पूरी तरह नकारते हुए बलूच संगठन 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। बलूचों का दावा है कि उस समय कलात रियासत की आजादी को खुद पाकिस्तान ने भी मान्यता दी थी, लेकिन बाद में धोखे से इस क्षेत्र को पाकिस्तान में विलय के लिए मजबूर किया गया। बलूच संगठनों के अनुसार, उस समय इस स्वतंत्रता की घोषणा को द न्यूयॉर्क टाइम्स और ऑल इंडिया रेडियो जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी प्रसारित किया था। हालांकि आज दुनिया बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा मानती है, लेकिन बलूच जनता ने कभी भी इस जबरन विलय को दिल से स्वीकार नहीं किया है।

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