प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की अनूठी मिसाल
बिहार के मधुबनी जिले से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहाँ उछाल गांव की रहने वाली और कक्षा 12वीं की छात्रा स्वाति कुमारी ने अपनी बुद्धिमत्ता और मेहनत के दम पर सफलता का नया मुकाम हासिल किया है। स्वाति ने 'ऑफिसर्स फॉर ए डे' कार्यक्रम में भाग लिया और लगभग 5000 छात्र-छात्राओं को पीछे छोड़ते हुए एक दिन के लिए जिलाधिकारी का पदभार ग्रहण किया। यह उपलब्धि उनके परिवार और पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।
संघर्षों के बीच पले बड़े सपने
स्वाति का पारिवारिक बैकग्राउंड काफी साधारण है। उनके पिता संजय झा एक ड्राइवर के रूप में काम करते हैं, जबकि उनकी माता एक गृहिणी हैं जो घर पर गाय पालन करके परिवार का सहयोग करती हैं। आर्थिक रूप से मध्यमवर्गीय परिवार से होने के बावजूद स्वाति के हौसले बुलंद हैं और उनमें पढ़ने की गहरी ललक है। स्वाति ने सिद्ध किया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो संसाधन मायने नहीं रखते।
चयन प्रक्रिया और कड़ी प्रतिस्पर्धा
यह पूरा चयन एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से हुआ। जिले के सभी उच्च विद्यालयों में गूगल फॉर्म के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें कुल 5000 छात्र-छात्राओं ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इन आवेदनों में से 31 मेधावी बच्चों को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिन्हें विभिन्न प्रशासनिक पदों पर एक दिन के लिए कार्य करने का मौका दिया गया। स्वाति ने साक्षात्कार के दौरान अपने तार्किक और रचनात्मक उत्तरों से सभी को प्रभावित किया, जिसके चलते उन्हें पहला स्थान प्राप्त हुआ और जिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला।
जिलाधिकारी के रूप में 12 घंटे का अनुभव
स्वाति ने मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा के साथ पूरे 12 घंटे तक प्रशासनिक कामकाज को करीब से समझा। उन्होंने इस दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उनके कार्यकाल का सबसे खास हिस्सा 500 करोड़ रुपये की कोसी जल नहर परियोजना को मंजूरी देना रहा। इसके अलावा, उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई उच्च स्तरीय बैठक में भी हिस्सा लिया, जिसमें राज्य के सभी 38 जिलों के जिलाधिकारी शामिल थे।
प्रशासनिक अनुभव और भविष्य की प्रेरणा
एक दिन के इस विशेष अनुभव में स्वाति ने जनता दरबार में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को समझा। इसके अलावा, उन्होंने केंडल मार्च में हिस्सा लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी। स्वाति का मानना है कि जिलाधिकारी का पद बहुत जिम्मेदारी भरा होता है, जहाँ हर पक्ष को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लेना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को यूपीएससी जैसी बड़ी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने में मील का पत्थर साबित होते हैं। स्वाति ने जिलाधिकारी से अपने गांव के स्कूल की स्थिति सुधारने का भी आग्रह किया ताकि वहां पढ़ने वाले अन्य बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि 12वीं के बाद करियर की शुरुआत के दौरान मिलने वाला ऐसा अनुभव छात्रों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देता है।
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