बरसात में बढ़ता स्वास्थ्य जोखिम
इस समय मानसून का सीजन चल रहा है और इस मौसम में स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। हाल के दिनों में टाइफाइड फीवर के मामलों में काफी तेजी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मौसम में मामूली सी लापरवाही भी आपके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। अगर अपनी सेहत और खान-पान को लेकर सावधानी न बरती जाए, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। टाइफाइड जैसी बीमारियों से निपटने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके लक्षण क्या हैं और इनसे बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
टाइफाइड बुखार के मुख्य लक्षण
प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉक्टर मोहम्मद अरशद ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी साझा की है। डॉक्टर अरशद के अनुसार, टाइफाइड एक प्रकार का बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो साल्मोनेला टाइफी नामक ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया के कारण फैलता है। इस बीमारी की चपेट में आने पर मरीज को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिन्हें पहचानना बहुत जरूरी है।
- लगातार या बहुत तेज बुखार रहना।
- दिन भर शरीर में हल्का बुखार बना रहना।
- भूख में अत्यधिक कमी महसूस होना।
- हमेशा उल्टी जैसा महसूस होना या जी मिचलाना।
- पेट खराब होना और लूज मोशन की शिकायत।
- डायरिया होने की प्रबल संभावना।
डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को शरीर में इस तरह के बदलाव या लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत अपना ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। लक्षणों के आधार पर खुद से इलाज शुरू करने की गलती न करें, क्योंकि सही समय पर जांच न कराना आपकी स्थिति को बिगाड़ सकता है।
बिना मेडिकल जांच के उपचार न करें
बरसात के दिनों में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जाता है, जिनमें से एक बड़ा वर्ग टाइफाइड से पीड़ित होता है। मरीजों में अक्सर बहुत अधिक कमजोरी, थकान, उल्टी और भोजन करने में असमर्थता जैसे लक्षण पाए जाते हैं। जांच करने के बाद ही यह पुष्टि हो पाती है कि उन्हें टाइफाइड हुआ है।
डॉक्टर का मानना है कि उपचार से पहले मरीज का सही इन्वेस्टिगेशन करना अनिवार्य है। कई स्थितियों में टाइफाइड के संक्रमण के कारण मरीज के लिवर में सूजन तक आ जाती है। यदि किसी को टाइफाइड की पुष्टि होती है, तो उसे पूरी तरह ठीक होने में लगभग दो सप्ताह का समय लग सकता है। इसलिए किसी भी तरह के संदेह होने पर सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि बुखार किस प्रकार का है।
छोटी सी लापरवाही हो सकती है जानलेवा
डॉक्टर ने इस बात पर जोर दिया है कि टाइफाइड को हल्के में लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। यदि उपचार में देरी की जाए या सही तरीके से इलाज न हो, तो यह संक्रमण मरीज की आंतों में छेद (परफोरेशन) कर सकता है, जो सीधे तौर पर जीवन के लिए बड़ा खतरा पैदा कर देता है। इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर ने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- शुद्ध पेयजल: हमेशा पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए।
- स्वच्छता का ध्यान: अपने आसपास साफ-सफाई रखें और गंदगी से दूर रहें।
- खान-पान पर नियंत्रण: बाहर का दूषित भोजन न करें और ज्यादा तेल-मसाले वाले खाने से परहेज करें।
- नियमित जांच: शरीर में लक्षण दिखते ही तत्काल डॉक्टर से परामर्श लें और खून की जांच कराएं।
- सावधानी ही बचाव: संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करें।
कुल मिलाकर, टाइफाइड से सुरक्षित रहने का मंत्र यही है कि स्वच्छता को अपनी प्राथमिकता बनाएं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करें। समय पर लिया गया सही निर्णय न केवल आपको तेजी से रिकवरी में मदद करता है, बल्कि आपको गंभीर जटिलताओं से भी बचाता है।
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