किसान रहें सतर्क! गन्ने को भीतर से खोखला बना रहा यह ज़मीनी कीट, जानें पहचान और बचाव के तरीके

इन दिनों गन्ने की फसल पर दीमक का हमला तेज़ी से बढ़ रहा है, जो जड़ों को काटकर पौधे को अंदर से खोखला कर देती है। विशेषज्ञों ने इसकी पहचान और जैविक व रासायनिक दोनों तरह के उपचार बताए हैं।

गन्ना किसानों के लिए एक नकदी फसल है, जिससे साल में सिर्फ एक बार उपज और मुनाफा हाथ लगता है। ऐसे में फसल की देखभाल में जरा-सी चूक भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। इन दिनों गन्ने की फसल पर दीमक का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है। यह एक ऐसा भूमिगत कीट है, जो शुरुआत में नज़र नहीं आता, मगर धीरे-धीरे पूरी फसल को भीतर से खोखला कर देता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और रोकथाम न की जाए, तो किसानों की सालभर की मेहनत और लागत दोनों बेकार चली जाती हैं।

दीमक क्यों है इतनी खतरनाक

फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के अनुसार, दीमक एक बेहद विनाशकारी और सामाजिक कीट है, जो ज़मीन के नीचे कॉलोनियों में रहता है। इसमें सैनिक तथा नर-मादा शामिल होते हैं, जिनमें सैनिक कीट फसल को सबसे अधिक हानि पहुंचाते हैं। दीमक गन्ने की जड़ों को काट देती है, जिससे पौधे का जाइलम (Xylem) तंत्र प्रभावित होता है और ज़मीन से ऊपर की ओर पानी तथा पोषक तत्वों का परिवहन पूरी तरह थम जाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान अपने खेतों में कच्चे गोबर की खाद का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि कच्चा गोबर दीमक का मुख्य और सबसे पसंदीदा आहार है।

लक्षण और नुकसान पहुंचाने का तरीका

दीमक मुख्य रूप से गन्ने की जड़ों पर हमला करती है। चूंकि यह ज़मीन के नीचे सक्रिय रहती है, इसलिए किसानों को इसके शुरुआती प्रकोप की भनक तक नहीं लगती। जब यह जड़ों को काटकर खोखला कर देती है, तो पौधे को ज़रूरी पोषण और पानी मिलना बंद हो जाता है। नतीजतन गन्ने की हरी-भरी पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगती हैं और पूरा पौधा सूखने लगता है। फसल की बढ़वार रुक जाती है और पैदावार में भारी गिरावट आ जाती है।

भूमि शोधन में बवेरिया बेसियाना का प्रयोग

एक्सपर्ट ने दीमक के खात्मे के लिए एक कारगर और जैविक उपाय सुझाया है। किसानों को भूमि शोधन के समय 'बवेरिया बेसियाना' का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए 3 किलोग्राम बवेरिया बेसियाना को 100 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर किसी छायादार जगह पर रख दें। इस मिश्रण पर रोज़ाना हल्के पानी का छिड़काव करते रहें। 10 दिनों में यह पूरी तरह तैयार हो जाता है, जिसे आखिरी जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए।

खड़ी फसल में रासायनिक नियंत्रण

यदि गन्ने की खड़ी फसल में दीमक का प्रकोप दिखाई दे, तो किसानों को तुरंत रासायनिक उपाय अपनाने चाहिए। इसके लिए 'क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी' (Chlorpyrifos 20 EC) की 2 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ खेत में चलानी चाहिए। इसके अलावा, किसान 'कोराजन' (Coragen) की निर्धारित मात्रा का उपयोग करके भी अपनी खड़ी फसल को इस जानलेवा कीट के हमले से सुरक्षित रख सकते हैं।

फर्टेरा से दूसरे हानिकारक कीटों का भी नाश

अगर किसान खेत की तैयारी या भूमि शोधन के समय 'फर्टेरा' (Fartera) कीटनाशक का प्रयोग करते हैं, तो वे न सिर्फ दीमक बल्कि कई अन्य हानिकारक कीटों से भी छुटकारा पा सकते हैं। फर्टेरा के इस्तेमाल से गन्ने में लगने वाले सफेद ग्रब (White Grub), जड़ बेधक (Root Borer) और अगेता तना बेधक (Early Shoot Borer) जैसे खतरनाक कीटों का भी पूरी तरह सफाया हो जाता है।

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