मानसून से बढ़ी किसानों की चिंता
इस बार की बारिश ने बैंगन उगाने वाले किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। खेतों में नमी बढ़ने के कारण कीड़ों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिसके चलते किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए महंगी कीटनाशक दवाओं पर काफी खर्च करना पड़ रहा है। फसल को सुरक्षित रखना अब किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
मुनाफे की उम्मीदों पर फिरा पानी
फरीदाबाद के किसान पप्पू ने बताया कि मेहनत के बावजूद उन्हें सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। उनके अनुसार वर्तमान में मंडी में बैंगन 15 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहे हैं। जबकि एक किसान के लिए इतनी मेहनत के बाद कम से कम 35 से 40 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने पर ही अच्छी कमाई की उम्मीद की जा सकती है।
नई वैरायटी और बढ़ता खर्च
किसान ने इस बार बैंगन की ऐसी उन्नत किस्म का चुनाव किया था, जो सामान्यतः आसपास के अन्य किसानों के खेतों में देखने को नहीं मिलती है। उन्हें उम्मीद थी कि यह नई किस्म बेहतर पैदावार और मुनाफा देगी, लेकिन अनपेक्षित बारिश ने पूरी योजना पर पानी फेर दिया है। पप्पू के अनुसार खेती का गणित इस प्रकार है:
- खेती के दौरान प्रति एकड़ का खर्च लगभग 15 हजार रुपये तक पहुंच जाता है।
- इस खर्च में बीज और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की लागत शामिल नहीं है, जिसे जोड़ने पर कुल लागत और अधिक बढ़ जाती है।
लगातार बढ़ते खर्च और मंडी में मिलने वाले कम भाव के कारण अब किसानों के लिए बैंगन की खेती करना एक कठिन सौदा साबित होता जा रहा है।
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