भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव की वजह
बांग्लादेश की सत्ता में बदलाव के बाद से ही भारत और वहां की सरकार के बीच एक अजीब सी दूरी देखी जा रही है। भारत में बांग्लादेश की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार, ढाका का भारत के प्रति उदासीन रवैया किसी अचानक हुए बदलाव का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक असुरक्षा की एक गहरी भावना छिपी है। वीणा सिकरी का स्पष्ट मानना है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार शेख हसीना के दिसंबर तक देश लौटने के ऐलान से पूरी तरह डरी हुई है। यही डर भारत के साथ राजनयिक संपर्कों में बाधा बन रहा है और द्विपक्षीय बातचीत को प्रभावित कर रहा है।
भारत के न्योते को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं तारिक रहमान?
राजनयिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि तारिक रहमान भारत सरकार द्वारा दिए गए आमंत्रण को स्वीकार करने से बच रहे हैं। वीणा सिकरी के मुताबिक, तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद, फरवरी 2026 में भारत आने का न्योता दिया गया था। यह किसी भी नए प्रधानमंत्री के लिए भारत की ओर से मिलने वाला एक महत्वपूर्ण निमंत्रण था, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी ढाका की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। स्थिति तब और स्पष्ट हुई जब कुछ हफ्ते पहले उन्हें बिम्सेटक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए दूसरा औपचारिक न्योता भेजा गया। बार-बार मिल रहे इन न्योतों के बावजूद तारिक रहमान सरकार का मौन कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
शेख हसीना का प्रत्यर्पण बनाम राजनीतिक बहाना
ऐसा कहा जा रहा है कि तारिक रहमान सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे को भारत यात्रा टालने के लिए एक सुविधाजनक बहाने की तरह इस्तेमाल कर रही है। वीणा सिकरी ने स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण कोई रातों-रात होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक लंबी और जटिल कानूनी कार्यवाही है। शेख हसीना के 5 अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिसंबर तक देश लौटने के दावे ने ढाका के सत्ता गलियारों में हलचल मचा दी है। वीणा सिकरी के अनुसार, रहमान सरकार इस दावे को मुद्दा बनाकर भारत यात्रा से बचने की कोशिश कर रही है, ताकि वे अपनी अंदरूनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान भटका सकें।
अवामी लीग की लोकप्रियता से खौफ
पूर्व उच्चायुक्त ने यह भी उजागर किया कि तारिक रहमान का सत्ता में आने के बाद का रुख उनके पुराने बयानों से बिल्कुल उलट है। जब रहमान लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे थे, तब वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रैलियों को संबोधित करते थे और शेख हसीना सरकार की कड़ी आलोचना करते थे। उस समय शेख हसीना ने कभी भी उन पर या उनकी पार्टी की गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था। हालांकि, अब स्थिति बदल गई है। अवामी लीग पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों और दमनकारी नीतियों पर वीणा सिकरी कहती हैं कि जब तारिक रहमान सत्ता में नहीं थे, तो वह कहते थे कि किसी भी राजनीतिक दल पर पाबंदी का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। अब वही नेता सत्ता में बैठकर अवामी लीग को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि इस दल की लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जनता के बीच अवामी लीग का बढ़ता समर्थन ही तारिक रहमान की सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है और इसी घबराहट में भारत के साथ रिश्तों को ताक पर रखा जा रहा है।
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