शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की अहम मुलाकात
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बहुप्रतीक्षित अमेरिका दौरे की तारीखों की घोषणा कर दी गई है, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग 23 सितंबर को अमेरिका पहुंचेंगे। इसके अगले ही दिन यानी 24 सितंबर को वह वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ गहन वार्ता करेंगे। अपनी इस यात्रा को संपन्न कर वे 25 सितंबर को अमेरिका से वापस चीन के लिए रवाना हो जाएंगे। यह दौरा इसलिए भी वैश्विक सुर्खियों में है क्योंकि 11 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद चीनी राष्ट्रपति वॉशिंगटन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा से दूरी
इस दौरे के सबसे चौंकाने वाले पहलुओं में से एक यह है कि शी जिनपिंग संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में भाग नहीं लेंगे। सामान्यतः जब भी किसी बड़े देश का शीर्ष नेतृत्व अमेरिका आता है, तो न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाली महासभा का हिस्सा बनना एक सामान्य प्रक्रिया होती है। लेकिन बीजिंग ने इस बार कोई अलग रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति का पूरा कार्यक्रम केवल ट्रंप के साथ बैठक तक ही केंद्रित रहेगा। न्यूयॉर्क जाने या महासभा को संबोधित करने की अब तक कोई आधिकारिक योजना सामने नहीं आई है। न्यूयॉर्क में चीनी राष्ट्रपति के स्वागत या उनके कार्यक्रम से जुड़ी सुरक्षा तैयारियों के भी कोई संकेत फिलहाल नहीं मिल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे इस बार अंतरराष्ट्रीय मंच से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
UNGA में भागीदारी का इतिहास
शी जिनपिंग के संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल नहीं होने के फैसले ने कई जानकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यदि हम उनके पिछले रिकॉर्ड को देखें, तो शी जिनपिंग ने आखिरी बार 2015 में न्यूयॉर्क जाकर महासभा को संबोधित किया था, जो संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ का अवसर था। इसके बाद, साल 2021 में कोविड महामारी के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जाने के बजाय वीडियो लिंक के माध्यम से महासभा को अपना संबोधन दिया था। वर्तमान में दुनिया भर में भू-राजनीतिक परिस्थितियां जटिल बनी हुई हैं, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच शी जिनपिंग का इस बड़े वैश्विक मंच से दूर रहना इस बात का संकेत है कि वे फिलहाल इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे तौर पर कोई अंतरराष्ट्रीय रुख साझा नहीं करना चाहते हैं।
वार्ता के मुख्य विषय
वॉशिंगटन में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे बड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच यह मुलाकात काफी मायने रखती है, क्योंकि अमेरिका और चीन लंबे समय से एक दूसरे के धुर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शी जिनपिंग की अनुपस्थिति चीन के लिए एक अवसर खोने जैसा हो सकता है, लेकिन दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन के लिए यह स्थिति एक प्रकार से राहत देने वाली भी है। क्योंकि यदि चीनी राष्ट्रपति महासभा में होते, तो संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अमेरिका और चीन की नीतियों की सीधी तुलना और उनके बीच का टकराव और अधिक स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आता।
रिश्तों की नई दिशा का इंतजार
अब पूरी दुनिया की नजरें 24 सितंबर पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात अमेरिका और चीन के तनावपूर्ण रिश्तों में कोई सकारात्मक मोड़ ला पाती है या नहीं। फिलहाल दोनों देशों की ओर से इस दौरे को लेकर बहुत अधिक जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि इस संक्षिप्त दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की बातचीत और आपसी कूटनीतिक संवाद को बहाल करना है।
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